राजस्व

जीएसटी के कारण कर संग्रह में हो रही वृद्धि

वित्त वर्ष 2018-19 में मासिक जीएसटी राजस्व 981 अरब रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में 9.2 प्रतिशत अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि हाल के महीनों में राजस्व वृद्धि ने जोर पकड़ा है। मार्च में कुल जीएसटी संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है, जिसमें केंद्रीय जीएसटी 203 अरब रुपये, एसजीएसटी 275 अरब रुपये और आईजीएसटी 504 अरब रुपये रहा। इसके अलावा केंद्र सरकार को उपकर मद में 82 अरब रुपये

मोदी इफ़ेक्ट : ‘2014 तक आयकर भरने वाले 3.79 करोड़ थे, जो अब बढ़कर 6.85 करोड़ हो गए हैं’

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के अनुसार 1 करोड़ रूपये से अधिक आय अर्जित करने वाले करदाताओं की संख्या वित्त वर्ष 2017-18 में 68 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 40 हजार  हो गई, जो वित्त वर्ष 2013-14 में 89 हजार थी। इस अवधि में एक करोड़ से अधिक आय दिखाने वाले करदाताओं में बड़े कारोबारी, फर्म्स, हिंदू अविभाजित परिवार आदि शामिल हैं। इधर,

जीएसटी के जरिये ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजे से बढ़ेगा राजस्व

नये नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत टैक्स डिड्क्कशन एट सोर्स (टीडीएस) एवं टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) देना होगा। इसके लिये केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने उन कंपनियों के लिए ऑडिट और समाधान फॉर्म जारी किया है, जिनका कारोबार 2 करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा है। दरअसल, इस नियम

जीएसटी से बढ़ रहा केंद्र और राज्य सरकारों का राजस्व

पुरजोर विरोध एवं मशक्कत के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू हो गया। शुरू में मुख्य तौर पर दरों और स्लैबों की संख्या को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध किया, लेकिन सरकार ने इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए उनमें आवश्यकतानुसार संशोधन किया। इसके अलावा भी सरकार ने दूसरे जरूरी सुधार किये।