राजीव गाँधी

बोफोर्स घोटाला : अगर सब पाक साफ़ है, तो सीबीआई की अपील से कांग्रेस इतनी असहज क्यों है !

बहुचर्चित बोफोर्स मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर, अभी इस बिंदु पर, निर्णय होना शेष है कि यह प्रकरण दोबारा चलाया जाना चाहिये या नहीं। इधर, बोफोर्स मामले के फिर से सुर्खियों में आते ही कांग्रेस असहज होने लगी है जो स्‍वाभाविक है। असल में यह केस सदा से कांग्रेस को भयभीत करता आया है। जब वर्ष 1987 में स्‍वीडिश कंपनी बोफोर्स ने तोप खरीदी का सौदा प्राप्‍त करने के लिए दलाली दी

सर्वोच्च न्यायालय ने जब तीन तलाक पर जवाब माँगा था, तब अगर कांग्रेस सरकार होती तो क्या होता ?

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने केवल मुस्लिम महिलाओं को आजादी ही नहीं दी है, वरन् इससे धर्मनिरपेक्षता के दावेदार भी बेनकाब हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले की सुनवाई के प्रारम्भिक चरण में ही केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। कल्पना कीजिये कि तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार होती तो क्या होता। क्या ऐसा जवाब दाखिल करने का साहस वो दिखा सकती थी, जैसा वर्तमान भाजपा सरकार ने दिखाया। यदि

‘वन रैंक वन पेंशन’ पर बोलने से पहले अपनी दादी और पापा की ‘करनी’ को तो जान लें, राहुल गाँधी!

वन रैंक वन पेंशन का मामला एकबार फिर गरमाया हुआ है। दरअसल गत दिनों एक पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने कथित तौर पर वन रैंक वन पेंशन की अनियमितताओं के कारण आत्महत्या कर ली। बस इसके बाद से ही इस मामले पर सियासी महकमे में सरगर्मी पैदा हो गई है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तक तमाम नेता मृतक सैनिक के परिजनों से मिलने के नाम पर