राज्यसभा

तीन तलाक बिल पर भी तुष्टिकरण की राजनीति के खोल से निकलने में नाकाम रही कांग्रेस

इसे नरेंद्र मोदी की राजनीतिक रणनीति की कामयाबी ही कहेंगे कि व्हिप जारी होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी के पांच सांसद मतदान के दौरान सदन से अनुपस्‍थित रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019’ को राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित कर दिया।

तीन तलाक निषेध कानून : मुस्लिम महिलाओं के हितों व अधिकारों की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम

मंगलवार का दिन देश की मुस्लिम महिलाओं के लिए अत्यंत मंगलकारी रहा। इस दिन तीन तलाक बिल पर मोदी सरकार को बड़ी सफलता मिली। लोकसभा के बाद अब यह बिल राज्‍यसभा से भी पारित हो गया है। अब यह कानून की शक्‍ल ले लेगा जिसके तहत तीन तलाक देने वाले पुरुष पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकेगा।

तीन तलाक बिल : यह आस्था नहीं, अधिकारों की लड़ाई है!

यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है। अपनी वोटबैंक की राजनीति की एकतरफा सोच में  विपक्षी दल इतने अंधे हो गए हैं कि  यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके इस रवैये से उनका दोहरा आचरण ही देश के सामने आ रहा है।

नाखून कटाकर शहीद बनने का नाटक कर रही हैं मायावती

“यदि मैं सदन में दलितों की बात नहीं उठा सकती तो मुझे सदन में रहने का अधिकार नहीं।” यह कहते हुए मायावती ने राज्‍य सभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया। उपर से देखने पर मायावती के इस्‍तीफे में बलिदान की भावना नजर आती है, लेकिन यदि इसका विश्‍लेषण किया जाए तो यह सियासी वजूद मिट जाने के भय से उठाया गया कदम नजर आएगा।

मोदी सरकार को किस मुँह से अर्थशास्त्र सिखा रहे हैं, मनमोहन सिंह ?

संसद में नोटबंदी पर जारी बहस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी आखिर अपनी बात रखी। चूंकि बतौर अर्थशास्त्री उनकी ख्याति विश्वस्तरीय है, इसलिए उम्मीद थी कि इस आर्थिक निर्णय का वे आर्थिक दृष्टि से मूल्यांकन करेंगे। लेकिन, अपने लगभग पंद्रह मिनट के वक्तव्य में मनमोहन सिंह ने जिस तरह से इस निर्णय की उसी अतार्किक ढंग और लीक जिसपर उनकी पार्टी के बाकी नेता चल रहे हैं, पर