राहुल गाँधी

परिवारवाद के कारण डूब रहा है कांग्रेस का जहाज

गांधी-नेहरू परिवार के वर्चस्‍व का ही नतीजा है कि पिछले 20 साल में कांग्रेस में केवल दो अध्‍यक्ष रहे। कांग्रेस कार्यसमिति के चुनाव 1997 के बाद से नहीं हुए हैं। मई 2019 के बाद से कांग्रेस का कोई स्‍थायी अध्‍यक्ष नहीं है। यही कारण है कि कांग्रेसियों में हताशा व्‍याप्‍त है।

संभावित हार की हताशा में एकबार फिर ईवीएम पर सवाल

भारत की विपक्षी पार्टियां भी गज़ब हैं, इन्हें जब-जब भी हार का डर सताता है, ये ईवीएम को चुनावी मैदान में घसीट लाती हैं। यहीं ईवीएम हैं, जिससे इनकी भी सरकारें बनी हैं, लेकिन इन्हें बखेड़ा खड़ा करने की आदत हो गई है। विपक्षी पार्टियों को लगता है कि चुनाव आयोग भी सत्ताधारी पार्टी के साथ मिलकर कोई बड़ा खेल कर सकता है। पिछले दिनों से आप एक बयान लगातार

राहुल गांधी बताएं कि सिद्धू के पाकिस्तान प्रेम से क्या कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व भी सहमत है?

करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत ने अपने प्रतिनिधि अधिकृत तौर पर भेजे थे। यह औपचारिक निर्णय था। लेकिन पंजाब के उपमुख्यमंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह व कई मंत्रियों ने अनुचित माना था। ऐसे में बेहतर यह था कि सिद्धू वहां न जाते। पिछली यात्रा के दौरान सिद्धू के करतारपुर

कांग्रेस अधिवेशन : खयाली पुलाव वाली राजनीति भाजपा का मुकाबला नहीं कर पाएगी !

उत्‍तर प्रदेश की दो और बिहार के एक लोकसभा सीटों के लिए हुए उप चुनाव में नापाक जातिवादी गठजोड़ की जीत क्‍या हुई, राजनीति में नए-नए समीकरण बैठाने की मुहिम को पंख लग गए। 2019 के आम चुनाव में सीटों की संख्‍या और मत प्रतिशत को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। कांग्रेस की स्‍थिति तो बेगाने की शादी में अब्‍दुल्‍ला दीवाना वाली है। जिन उप चुनावों में भाजपा की हार से उत्‍साहित होकर वह

गुजरात चुनाव : विकास की राजनीति बनाम विद्वेष की राजनीति

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दोनों राज्‍यों में अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा व कांग्रेस अपने-अपने स्‍तर पर जुटे हुए हैं। लेकिन, यहां दोनों दलों के काम करने के, प्रचार करने के तरीके में अंतर स्‍पष्‍ट नज़र आता है। एक तरफ जहां भाजपा सकारात्‍मक ढंग से प्रचार कर रही है, वहीं कांग्रेस सस्‍ते हथकंडे अपनाकर थोथी राजनीति दिखाने से बाज नहीं आ रही। इसी के समानांतर नेताओं

राजनीति में परिवारवाद को सही साबित करने के लिए बचकानी दलीलें दे रहे, राहुल गांधी !

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया, बर्कले में छात्रों से चर्चा के दौरान कई ऐसी बातें कहीं जो कांग्रेस के भूत और भविष्य की रूपरेखा का संकेत दे रही हैं। इस व्याख्यान में राहुल गाँधी ने नोटबंदी, वंशवाद की राजनीति सहित खुद की भूमिका को लेकर पूछे गये सवालों के स्पष्ट जवाब दिए। मसलन 2014 के आम चुनाव से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि कांग्रेस 2012

राजनीतिक जमीन के साथ-साथ बोलने की तमीज भी खोती जा रही है कांग्रेस !

कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने महिला पत्रकार गौरी लंकेश हत्‍याकांड के मामले पर बयानबाजी करने में जिस प्रकार की जल्‍दबाजी दिखाई व बड़बोलापन प्रकट किया उससे उनकी राजनीतिक नासमझी पर मुहर ही लगी है। उन्‍होंने इस मामले का पूरी तरह राजनीतिकरण करते हुए भाजपा व आरएसएस पर आधारहीन होकर आरोप लगाए। उन्‍होंने कहा कि भाजपा व आरएसएस के खिलाफ जो भी बोलता है, उस पर हमला

कांग्रेस शासित कर्नाटक में हुई हत्या के लिए किस मुँह से भाजपा पर इल्जाम लगा रहे, राहुल गांधी!

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। यहां कानून व्यवस्था बनाये रखना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या होना निस्संदेह दुखद और निंदनीय है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह यथाशीघ्र दोषियो को गिरफ्तार करके उन्हें कठोर सजा दिलवाए। यह प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सच्चाई को सामने लाये। प्रदेश के पुलिस प्रमुख ने कहा कि अभी वह घटना की

कांग्रेस की सल्तनत तो चली गयी, लेकिन अकड़ अब भी सुल्तानों वाली है !

राजा के सिपहसालारों का काम होता है, वह राजा को हमेशा सच बताएं। अब राजा सच सुने या नहीं, यह उसपर निर्भर करता है। राजहित में यह ज़रूरी है कि राजा अपने सलाहकारों की बात सुने और उस पर अमल भी करे। जो ऐसा नहीं करता उसका पतन अवश्यम्भावी हो जाता है। देश की सबसे पुरानी पार्टी है इंडियन नेशनल कांग्रेस, फ़िलहाल इसी तरह के संकट से गुजर रही है।

राहुल गांधी की कार पर चले पत्थर को मुद्दा बनाकर खुद फँस गयी है कांग्रेस !

प्रजातंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। गुजरात में राहुल गांधी की कार पर पत्थर फेंकना निंदनीय व आपराधिक कृत्य है। गुजरात सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। पत्थर फेंकने वाले को जेल भेजा। अब कानून अपना कार्य करेगा। लेकिन इस प्रकरण ने कुछ प्रश्न भी उठाए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर एक पत्थर क्या फेंका गया कि लोकतंत्र खतरे में पड़ गया। एक साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय