रेलवे

लॉकडाउन में श्रमिकों को घर पहुंचाकर रेलवे ने साबित किया कि वाकई में वो देश की जीवनरेखा है

भारत सरकार के प्रयासों और रेलवे के सक्रियतापूर्ण और समर्पण के साथ किए गए कार्यों ने लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों की कठिनाइयों को आसान करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

देश याद रखेगा कि संकटकाल में जब सरकार श्रमिकों के साथ खड़ी थी, विपक्ष संकीर्ण सियासत में लगा था

जब पूरा देश कोरोना संकट से उपजी चिंताओं एवं चुनौतियों में घिरा था तब कुछ राज्य सरकारें अपनी राजनीति में व्यस्त थीं, उन्हें न तो भूखे पेट सो रहे श्रमिकों की चिंता थी न ही बिना दूध के रोते बच्चों को। इन राज्यों को पैदल चल रहे श्रमिकों के पैरों के छाले नहीं दिखे लेकिन

कोरोना जैसी महामारी में भी श्रमिकों के हितों को सुरक्षित रखने में सफल रही मोदी सरकार

विपक्ष के आरोपों की सच्चाई धीरे-धीरे देश के सामने आ गयी जब विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिये श्रमिकों ने सरकार के सुप्रबंधन की सराहना की।

मजदूरों के बहाने सरकार को घेरने वाले विपक्ष की मजदूर ही खोल रहे पोल

मजदूरों के बहाने विपक्ष ने सरकार पर खूब निशाना साधा और तरह-तरह के आरोप लगाए। रेलवे पर भी मजदूरों को ले जाने में बहुत अव्यवस्था बरतने के आरोप लगाए गए। लेकिन सच इन सबसे अलग था और वो समय के साथ सामने भी आ रहा है।

लॉकडाउन में श्रमिकों के नामपर राजनीति करने वाले विपक्ष को आईना दिखाती हैं ये कहानियाँ

न जाने ऐसे कितने ही श्रमिकों की कहानियाँ हैं जो एक संवेदनशील सरकार व उसके उत्तरदायित्वों की चर्चा करती हैं। सर्वाधिक श्रमिक उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से थे।

रेलवे के बहाने आपदा काल में राजनीति कर रहे विपक्ष के दावों की श्रमिकों ने खोली पोल

जिस विपक्ष को आपदा की इस घड़ी में सरकार का साथ देना चाहिए था वह विपक्ष विस्‍थापितों की तकलीफों को बढ़ाने में जुटा था ताकि मोदी सरकार को बदनाम किया जा सके। इसे रेलवे के उदाहरण से समझा जा सकता है।

जनता कर्फ्यू : यह कोरोना से बचाव ही नहीं, आपदा में देश की एकजुटता का प्रमाण भी है

कोरोना वायरस के रूप में आज मानवता के समक्ष एक वैश्विक संकट आन खड़ा हुआ है। जहां दुनिया भर के देश इससे जूझ रहे हैं, वहीं भारत में इस वायरस के संक्रमितों की संख्‍या बढ़ती जा रही है। इस महामारी के खतरे से बचाव के लिए आज 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। मोदी ने दो दिन पहले राष्‍ट्र के नाम दिए संदेश में पूरे देश से यह अपील

मोदी सरकार की दो रेल परियोजनाएं जो उत्तराखंड के लिए युगांतरकारी सिद्ध होंगी

रेलवे लाइन के निर्माण के बाद उत्तराखंड जहां परिवहन कनेक्टविटी की दृष्टि से लंबी छलांग लगा सकेगा, वहीं पर्यटकों व तीर्थयात्रियों के लिए आवागमन का एक सुलभ व सस्ता साधन उपलब्ध हो सकेगा। रेल यातायात शुरू होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की दूरी, जिसे पूरा करने में सड़क मार्ग से लगभग 6 घंटे का समय लगता है, वो मात्र 2 घंटे में पूरी हो सकेगी। अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े उत्तराखंड में इस परियोजना का सामरिक कारणों से बेहद महत्व है।

मोदी राज में हो रहा रेलवे का कायाकल्प, विश्वस्तरीय बनती जा रही भारतीय रेलवे

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय रेलवे का अब धीरे-धीरे कायाकल्‍प होना शुरू हो गया है। 2014 से पहले रेलवे एक  बोझिल और जटिल क्षेत्र था जिससे जुड़ी समस्‍याओं का अंबार ही सामने आ पाता था लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं होता था। यदि हम ऐसा कहें कि मोदी सरकार ने भारतीय रेलवे को नए सिरे से निर्मित और परिभाषित किया है तो अतिश्‍योक्ति नहीं होगी

परिवहन के क्षेत्र में एक नयी बिजली क्रांति लाने में जुटी मोदी सरकार

बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।