लोकसभा चुनाव

लोकसभा चुनाव : जनकल्याण के कार्य बनाम मोदी विरोध की नकारात्मक राजनीति

लोकसभा चुनाव की शुरुआत हो चुकी है, सभी राजनीतिक दल अपने–अपने ढ़ंग से अपनी पार्टी का प्रचार कर जनता का समर्थन पाने की कवायद में जुटे हुए हैं, किन्तु इस महान लोकतांत्रिक देश में मतदाता अब सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को अपनी अपेक्षाओं की कसौटी पर कसने लगे हैं।

राहुल के बाद प्रियंका की भी घिसे-पिटे मुद्दों की राजनीति

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण, भाषा, शैली के चलते स्वयं को हल्का बना लिया है। उनकी बातों में अध्यक्ष पद की गरिमा का नितांत अभाव है। वह प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित व सड़क छाप नारे लगवाते हैं। राफेल सौदे पर उनके पास कोई तथ्य नहीं, फिर भी हंगामा करते रहते हैं। ऐसे में यह माना गया था कि प्रियंका गांधी वाड्रा का चुनाव प्रचार अलग ढंग का होगा। लेकिन वह भी पुराने और तथ्यविहीन मुद्दे ही उठा रही हैं।

रमजान में मतदान पर विपक्षी नेताओं की व्यर्थ सियासत

जो लोग रमजान की तीन तारीखों पर मतदान का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुस्लिम समाज की जमीनी जानकारी नहीं है, या वह किसी अन्य उद्देश्य से विरोध कर रहे हैं। यह अच्छा है कि अनेक मुसलमान ऐसे विरोध को अनुचित बता रहे हैं।

क्या प्रियंका का राजनीति में आना राहुल की विफलता पर मुहर है?

इन दिनों टीवी स्टूडियोज में एंकर और कांग्रेस के प्रवक्ता बड़े प्रसन्नचित्त हैं कि कांग्रेस के खानदान से एक और सदस्य ने राजनीति में एंट्री मार ली है। कांग्रेसी प्रवक्ताओं को ऐसा उत्साह है  जैसे इससे कांग्रेस की सारी समस्याएं छू-मंतर हो जाएंगी। पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गांधी की बेटी और उत्तर प्रदेश के व्यवसायी रोबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपने का ऐलान किया।

क्यों लगता है कि सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा को नहीं होगी कोई मुश्किल?

2019 लोक सभा चुनाव से पूर्व देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश ने कांग्रेस को न चाहते हुए भी अपना दुश्मन नंबर-2 बना लिया है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को हराने की मजबूरी में दो ऐसी पार्टियों सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ जो पिछले दो दशक से एकदूसरे की धुर विरोधी रही हैं। 

पूरब से पश्चिम तक भाजपा का बुलंद मंसूबा

विपक्षी महागठबंधन की कवायदों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी अपना मंसूबा बुलंद कर लिया है। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पहले कलकत्ता की जनसभा और फिर मेरठ में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के समापन भाषण से जाहिर हुई। पश्चिम बंगाल में भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों को पछाड़ कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। मतलब यहाँ पार्टी जमीनी स्तर पर मुख्य विपक्षी पार्टी की हैसियत में आ गई है। अमित शाह ने इसी अंदाज में ममता बनर्जी  सरकार पर हमले

ममता बनर्जी की बौखलाहट के पीछे यह भय छिपा है कि कहीं ‘बंगाल का त्रिपुरा’ न हो जाए!

उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मिली प्रचंड जीत के बाद अप्रैल, 2017 में ओड़िसा में हुई भाजपा की  राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अमित शाह ने एक बयान दिया था, जो तब सुर्ख़ियों में छाया रहा। उत्तर प्रदेश की प्रचंड जीत के उत्सव में झूम रहे भाजपा कार्यकर्ताओं से शाह ने कहा था कि यह जीत बड़ी है, लेकिन यह भाजपा का स्वर्णकाल नहीं है। भाजपा का स्वर्णकाल तब आयेगा