वामपंथी

सीपीएम कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे – हमारे विरुद्ध आओगे तो हम तुम्हारे हाथ, पैर, सिर काट लेंगे !

ताज़ा घटना दिनांक 30 अप्रैल की है जब संघ के एक नवनिर्मित सेवा केंद्र को कन्नूर में उद्घाटन के महज २४ घंटों के अन्दर ही वामपंथी गुंडों के द्वारा तहस नहस कर दिया गया। इस केंद्र का शुभारम्भ जे नन्द कुमार जी ने किया था। रात्रि के तीसरे पहर में हुए आक्रमण में कार्यालय के अन्दर रखी सारी वस्तुएं तोड़ डाली गयीं; खिड़कियाँ, दरवाजे एवं ईमारत में लगे शीशे तोड़ डाले गए। भवन की बाहरी

संघ के वो राष्ट्र-हितैषी कार्य जिनकी बहुत कम चर्चा होती है !

वामपंथी विचारधारा के बुद्धिजीवियों और इसके पोषक कांग्रेस आदि राजनीतिक दलों ने अपने संकीर्ण स्वार्थों के कारण हमेशा इस देश के सबसे हितैषी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ अनर्गल आरोप गढ़े हैं। कांग्रेस ने तो संघ पर भगवा आतंकी संगठन होने का भी शिगूफा छोड़ा था। उसे कभी फासीवादी संगठन कहा गया तो कभी उस पर धार्मिक आधार पर देश को बांटने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस की इस

वामपंथी मानवाधिकारवादियों के मुँह से नक्सलियों के खिलाफ एक शब्द भी क्यों नहीं सुनाई दे रहा ?

वाम विचारधारा के तथाकथित मानवाधिकारवादी आम नागरिकों से लेकर सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों के हनन पर तो खामोश हो जाते हैं; पर अपराधियों, नक्सलियों, पत्थरबाजों के मानवाधिकारों को लेकर बहुत जोर-शोर से आवाज बुलंद करते हैं। अरुंधति राय से लेकर आनंद पटवर्धन समेत दूसरे भांति-भांति के स्वघोषित बुद्धिजीवियों और स्वघोषित मानवाधिकार आंदोलनकारियों के लिए

नक्सलियों के पैरोकार वामपंथी बुद्धिजीवियों को बेनकाब करने की ज़रूरत

इस देश के तथाकथित व्यवस्था विरोधी बुद्धिजीवी नक्सलियों के रोमांटिसिज्म से ग्रस्त हैं और नक्सलियों के वैचारिक समर्थन को जारी रखने की बात करते हैं । उन्हें नक्सलियों के हिंसा में अराजकता नहीं बल्कि एक खास किस्म का अनुशासन नजर आता है । नक्सलियों की हिंसा को वो सरकारी कार्रवाई की प्रतिक्रिया या फिर अपने अधिकारों के ना मिल पाने की हताशा में उठाया कदम करार देते हैं ।

हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर

भारत के स्वाभिमान और हिंदू आस्था से जुड़े राम मंदिर निर्माण का प्रश्न एक बार फिर बहस के लिए प्रस्तुत है। उच्चतम न्यायालय की एक अनुकरणीय टिप्पणी के बाद उम्मीद बंधी है कि हिंदू-मुस्लिम राम मंदिर निर्माण के मसले पर आपसी सहमति से कोई राह निकालने के लिए आगे आएंगे। राम मंदिर निर्माण पर देश में एक सार्थक और सकारात्मक संवाद भी प्रारंभ किया जा सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने

राष्ट्रहित के लिए घातक हैं वामपंथी और सेक्युलर, सावधान रहने की जरूरत

देश में कन्हैया कुमार से लेकर उमर खालिद जैसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों का समर्थन करने वाले वामी और तथाकथित सेक्युलर ब्रिगेड का देश की लोकतान्त्रिक संस्थाओं व शासन व्यवस्थाओं पर बेवजह के सवाल उठाना मुख्य शगल बन गया है। लोकतंत्र की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले इस ब्रिगेड का बात-बात पर देश की व्यवस्थाओं से भरोसा उठ जा रहा है। ये उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में धूल

ख़त्म हो रहा जनाधार, पतन की ओर बढ़ते वामपंथी दल

लेफ्ट पार्टियां देश की राजनीति में अप्रसांगिक होती जा रही हैं। इनकी नीतियों, कार्यक्रमों और विचारों को जनता स्वीकार नहीं कर रही है। इसलिए ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) लोक सभा से लेकर राज्य विधानसभा चुनावों में धराशायी होती जा रही हैं।

साईबाबा की सज़ा पर उनकी पत्नी की प्रतिक्रिया से निकलते संदेश

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और उसके नतीजों के कोलाहल के बीच एक बेहद अहम खबर लगभग दब सी गई । राजनीतिक विश्लेषकों ने इस खबर को उतनी तवज्जो नहीं दी जितनी मिलनी चाहिए थी । उस खबर पर प्राइम टाइम में उतनी बहस नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी । वह खबर थी दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज के शिक्षक जी साईबाबा और चार अन्य को देश के खिलाफ युद्ध

वैचारिक स्वतंत्रता की आड़ में ख़तरनाक साज़िशों का जाल

एक चर्चित पंक्ति है, ‘जब तलाशी हुई तो सच से पर्दा उठा कि घर के ही लोग घर के लूटेरे मिले’। यह पंक्ति अभी दो दिन पहले आई एक ख़बर पर सटीक बैठती है। हालांकि चुनावी ख़बरों के बीच वह ज़रूरी खबर दब सी गयी। दिल्ली विश्वविद्यालय से एक प्रोफ़ेसर जीएन साईबाबा को वर्ष २०१४ में नक्सलियों से संबंध होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और अब गढ़चिरौली की अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई

देश के शिक्षण संस्थानों पर वामपंथियों की कुदृष्टि

इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत अवस्थित रामजस महाविद्यालय विवादों में बना हुआ है। विषय को आगे बढ़ाने से पूर्व आवश्यक होगा कि हम रामजस महाविद्यालय के इतिहास के विषय में थोड़ा जान लें। इस महाविद्यालय की स्थापना सन 1917 में प्रख्यात शिक्षाविद् राज केदारनाथ द्वारा दिल्ली के दरियागंज में की गयी थी। जहाँ से 1924 में स्थानांतरित करते हुए इसे दिल्ली के आनंद परबत इलाके में महात्मा