विपक्ष

वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होते प्रधानमंत्री मोदी

‘मॉर्निंग कन्सल्ट’ नामक सर्वे एजेंसी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों को 75 प्रतिशत लोगों ने सही ठहराया है।

कृषि सुधार कानूनों को लेकर किसानों में भ्रम फैलाने का राजनीतिक कुचक्र

ये आंदोलन सीमित क्षेत्र में है, जबकि देशभर के बहुसंख्यक किसान कृषि सुधारों के पक्ष में हैं। अतः जो राजनीति करने पर तुले हुए लोग हैं, जो किसानों के कंधों पर बंदूकें रखकर राजनीति कर रहे हैं, देश के सारे जागरुक किसान उनको भी परास्त करके रहेंगे।

हाथरस प्रकरण के बहाने रची गयी दंगों की साज़िश के खुलासे से उपजते सवाल

हाथरस में हुई घटनाओं के संदर्भ में जाँच एजेंसियों के खुलासे ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। जो तथ्य निकलकर सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

वर्तमान सरकार ने अपने प्रथम कार्यकाल से ही 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है और सरकार इस दिशा में लगातार काम भी कर रही है।

विपक्ष द्वारा कृषि सुधार विधेयकों के विरोध की क्या है असली वजह ?

कृषि सुधार संबंधी कानून लागू होने के बाद भी सरकारी मंडी व्‍यवस्‍था और न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य जारी रहेंगे फिर भी विपक्ष वोट बैंक की राजनीति में डूबा विपक्ष भ्रम फैलाने से बाज नहीं आ रहा है। 

सरकार का अंधविरोध करते-करते विपक्ष अब संसदीय मर्यादाओं के विरोध पर उतर गया है

हां तक बिल की बात है, यह पूरी संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक ढंग से पारित किया गया है। लेकिन विपक्ष ने तो इस तरह हंगामा मचाया मानो इसे पिछले दरवाजे से बिना प्रक्रिया पूरी किए पास कर दिया गया हो।

किसानों को सशक्त बनाने वाले हैं कृषि विधेयक, भ्रम फैलाना बंद करे विपक्ष

मोदी सरकार के कार्यकाल में विपक्ष की भूमिका जनता में भ्रम और सरकार के कामों में गतिरोध पैदा करने तक सीमित होकर रह गयी है।

कोरोना संकट में श्रमिकों पर राजनीति कर विपक्षी दलों ने अपना असल चरित्र दिखा दिया

अंध-विरोध को ही अपनी राजनीति का मूल बना चुके विपक्षी दलों का रुख इस दौर में उत्तरदायित्वशून्य और निराशाजनक रहा है।

श्रमिक हितों के लिए ‘आपदा काल’ में भी मोदी सरकार का कामकाज ‘आदर्श’ रहा है

सिर्फ विपक्ष ही नहीं, मीडिया के एक ख़ास धड़े ने भी पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों की कब्र खोदते हुए श्रमिकों के पलायन पर बेहद गैरजिम्मेदाराना रुख दिखाया।

कोरोना संकट के दौर में यूपी सरकार ने जीता जनता का दिल, मुद्दाविहीन हुआ विपक्ष

हालांकि कोरोना के साथ जंग अभी जारी है, फिर भी सरकार के हौसले के सामने यह महामारी कई मायनों में नियंत्रित दिख रही है।