विपक्ष

अमित शाह के प्रवास कार्यक्रमों से घबराया हुआ है विपक्ष !

अमित शाह की सक्रियता भाजपा के लिये प्रेरणा बन रही है, लेकिन विपक्ष के लिये यह परेशानी का सबब है। अमित शाह, संगठन को मजबूत बनाने के लिये सभी प्रदेशों में प्रवास कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा विरोधियों की धड़कने बढ़ा देती है। वह अपनी पार्टी की आंतरिक हलचल के लिये भी अमित शाह को दोषी बता रहे हैं

विपक्षी कब समझेंगे कि अंधविरोध की राजनीति के दिन अब लद चुके हैं !

2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता की दीवार दरकती हुई नज़र आ रही है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद विरोधी जितने ज्यादा मुखर हुए हैं, बीजेपी के सितारे उतने ज्यादा प्रखर हुए हैं। अच्छी बात यह है कि भारत की जनता इस बात को अच्छी तरह समझ गई है कि केंद्र की एनडीए सरकार सियासी एजेंडे को केंद्र में रखकर अपनी योजनाएं नहीं बना रही है, बल्कि इसके पीछे लोक-कल्याण

विपक्ष उम्मीदवार तो ले आया, मगर कोविंद जैसी सहजता और सरलता कहाँ से लाएगा !

एनडीए द्वारा राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह चर्चा जोरों पर थी कि यूपीए द्वारा इस राष्ट्रपति चुनाव में किसको उम्मीदवार बनाया जायेगा। तमाम पशोपेश के उपरांत यूपीए की तरफ से लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। गौरतलब है कि एनडीए द्वारा गहन मंथन के बाद नेतृत्व ने रामनाथ कोविंद के नाम पर सहमति जताई तथा

स्वच्छ छवि, सुलझा व्यक्तित्व और समन्वयकारी दृष्टि है रामनाथ कोविंद की सबसे बड़ी पूँजी

आम तौर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच मधुर सम्बन्ध नहीं रहते हैं, लेकिन कोविंद और नीतीश कुमार का रिश्ता मधुर रहा। यह कोविंद के समन्वयकारी और सुलझे हुए व्यक्तित्व को दिखाता है। बिहार के स्थानीय पत्रकार बताते भी हैं कि कोविंद समन्वयकारी नेता हैं और सबके साथ मिलकर काम करने की कला में महारत रखते हैं। ऐसे में इस प्रश्न का कोई तार्किक आधार नहीं रह जाता कि उनका

विकास की राजनीति के तीन साल

भाजपा नीत मोदी सरकार के तीन सालों के शासन के बाद आज देश में जो राजनीतिक माहौल नज़र आ रहा उसका स्पष्ट संकेत यही है कि अगर फिर से आम चुनाव कराया जाये तो आसानी से भाजपा दोबारा सत्ता में आ जायेगी। ऐसे में इस सवाल का उठना लाजिमी है कि आखिर कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पूरे देश में कायम है।

मोदी सरकार के तीन साल बीतने के बाद कहाँ खड़ा है विपक्ष ?

केंद्र में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के तीन साल पूरे हो रहे हैं। सरकार के उठाए गए कदमों के बारे में सब जगह चर्चा हो रही है, लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र में बगैर विपक्ष के बारे में बात किए कोई चर्चा पूरी नहीं होती है। आज जब सरकार ने तीन साल पूरे कर लिए हैं और प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में लगातार इजाफा हो रहा है, तब विपक्ष के बारे में, उसकी नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में विचार करना और जरूरी

मोदी ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है!

पूरे विपक्षी खेमे में कोई एक नेता ऐसा नहीं दिखता जो मोदी के जवाब में खड़ा हो सके। ऐसे में, ये कहना गलत नहीं होगा कि मोदी के आगे विपक्ष एकदम लाजवाब हो गया है। उसके पास न तो कोई नेता है और न ही कोई एजेंडा। दरअसल विपक्ष की इस दुर्गति के लिए काफी हद तक विपक्ष की नकारात्मक राजनीति ही जिम्मेदार है, जिससे जनता का उसके प्रति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता में सरकार के प्रति विश्वास जगाया है!

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान देश राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर प्रकार से एक अन्धकार में था। संप्रग-नीत सत्ता भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबी थी, जिसके कारण देश का आर्थिक ढांचा चरमरा रहा था और यह सब देखकर समाज में घनघोर निराशा व्याप्त थी। ऐसे समय में देश के सामने गुजरात के विकास मॉडल की उजली तस्वीर लेकर नरेंद्र मोदी आए।

नोटबंदी की विफलता का बेसुरा राग

नोटबंदी को लेकर पिछले पचास दिनों में जमकर सियासत हुई । व्यर्थ के विवाद उठाने की कोशिश की गई । केंद्र सरकार पर तरह-तरह के इल्जाम लगाए गए । केंद्र सरकार पर एक आरोप यह भी लग रहा है कि इस योजना से कालाधन को रोकने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि उसका स्रोत नहीं सूखेगा । इस तरह का आरोप लगाने वाले लोग सामान्यीकरण के दोष के शिकार हो जा रहे हैं । अर्थशास्त्र का एक बहुत ही

विमुद्रीकरण : निर्णय एक आयाम अनेक

सचमुच अतुलनीय हैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी। अनपेक्षित और चौकाऊ, हर कयास से परे, हर वह साहसिक फैसला लेने को हमेशा तैयार जिससे देश का कोई भला होने वाला हो, जिससे माँ भारती का भाल ज़रा और ऊँचा उठने वाला हो। देश भर में भाजपा-जन जब राजनीति में शुचिता के प्रतीक पुरुष श्री लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन मना रहे थे, उसी दिन भारत में आर्थिक स्वच्छता के एक बड़े कदम, या यूं कहें