शिक्षा

योगी राज में उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे क्रांतिकारी सुधार

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा का फंड बढ़ाया है। लेकिन फंड के साथ ईमानदारी से कार्य करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। अन्यथा फंड भी भ्रष्टाचार  की भेंट चढ़ जाता है। पिछली सरकारों में ऐसा ही होता था। मगर, वर्तमान सरकार में फंड का पारदर्शी उपयोग होता दिख रहा है।

शिक्षा केवल साक्षरता का माध्यम नहीं, मनुष्य को मनुष्य बनाने की कला है!

आज ‘शिक्षा’ का अर्थ साक्षरता और सूचनात्मक जानकारियों से समृद्ध होना है और आज की शिक्षा का उद्देश्य किसी शासकीय, अशासकीय कार्यालय का वेतनभोगी अधिकारी-कर्मचारी बनना भर है। इस अर्थ में शिक्षा अपने वास्तविक स्वरूप और उद्देश्य से बहुत दूर है और तथाकथित शिक्षित उत्पन्न कर आधी अधूरी क्षमताओं वाले बेरोजगारों की भीड़ जुटा रही है। आधुनिक शिक्षा की

नीतीश कुमार ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था का मखौल बना दिया है !

बिहार में शिक्षा की किस कदर दुर्गति हुई है, इसका प्रमाण हमें पिछले दो साल के टॉपर ही दे देते हैं। गणेश कुमार और रूबी राय। दो नाम ही काफी हैं, शैक्षणिक व्यवस्था के क्रमिक विनाश को समझने के लिए। 2015 में बिहार में बारहवीं की परीक्षा में 75 फीसद छात्र पास हुए, वहीं 2017 में सिर्फ 36 फीसद छात्र ही उत्तीर्ण हुए यानि 64 प्रतिशत छात्र फेल हो गए। दो वर्षों के नतीजों के बीच आया ये बड़ा अंतर चौंकाता है।

बज़ट 2017-18 : राष्ट्र के दूरगामी हितों और नागरिकों के सर्वांगीण विकास को समर्पित

१ फरवरी २०१७ को अरुण जेटली ने २०१७-१८ के वित्तीय वर्ष का बजट प्रस्तुत किया। वित्त वर्ष २०१७-१८ का यह बज़ट पिछले कई वर्षो से पेश किये जा रहे अन्य बजटों की अपेक्षा ज्यादा चर्चित रहा, क्योंकि इस बार समय से पहले बज़ट पेश करने को लेकर विपक्ष सहित तमाम लोग यह अनुमान लगा रहे थे कि इस बजट में केंद्र की मोदी सरकार आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र लोक-लुभावने ऐलान कर सकती