शिव

‘नारी की गरिमा पुरुष के मुकाबले में खड़े होने में नहीं, उसके बराबर खड़े होने में है’

नारी, ईश्वर की वो रचना जिसे उसने सृजन की शक्ति दी है; ईश्वर की वो कल्पना जिसमें प्रेम, त्याग, सहनशीलता, सेवा और करुणा जैसे भावों  से भरा ह्रदय  है। जो  शरीर से भले ही कोमल हो लेकिन इरादों से फौलाद है। जो अपने जीवन में अनेक किरदारों को सफलतापूर्वक जीती है। वो माँ के रूप में पूजनीय  है, बहन के रूप में सबसे खूबसूरत दोस्त  है, बेटी के रूप में घर

सामान्य भारतीय जन के प्रतीक हैं भगवान शिव !

त्याग और तपस्या के प्रतिरुप भगवान शिव लोक-कल्याण के अधिष्ठाता देवता हैं। वे संसार की समस्त विलासिताओं और ऐश्वर्य प्रदर्शन की प्रवृत्तियों से दूर हैं। सर्वशक्ति सम्पन्न होकर भी अहंकार से मुक्त रह पाने का आत्मसंयम उन्हें देवाधिदेव महादेव का पद प्रदान करता है। शास्त्रों में शिव को तमोगुण का देवता कहा गया है, किन्तु उनका पुराण-वर्णित कृतित्व उन्हें सतोगुणी और कल्याणकारी देवता के रूप में प्रतिष्ठित करता है।

जानिए कि अमित शाह का ‘शाह’ कहां से आया?

प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ जुड़े ‘शाह’ उपनाम पर सवाल उठाए हैं। अयोध्या और प्रयागराज नामकरण पर उनकी प्रतिक्रिया शाह नाम पर बम बनकर फूटी है। उनका दावा है कि अमित शाह का शाह शब्द या उपनाम तो फारसी है, गुजराती नहीं। तो क्या अमित शाह, शाह उपनाम छोड़ेंगे?