सरदार वल्लभ भाई पटेल

जयंती विशेष : राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा सरदार पटेल का व्यक्तित्व

आज देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और आजाद भारत को एकता के सूत्र में बाँधने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144 वीं जयंती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में उनकी विशाल प्रतिमा ‘स्टेचू ऑफ़ यूनिटी’, जिसका अनावरण गत वर्ष ही हुआ था, पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यहाँ मोदी ने जम्मू-कश्मीर की चर्चा करते हुए कहा कि सरदार पटेल ने कहा था कि अगर ये मामला उनके हाथ में होता जल्दी सुलझ गया होता। साथ ही प्रधानमंत्री ने

कांग्रेस द्वारा उपेक्षित आजादी के असल नायकों को सम्मान देने में जुटी मोदी सरकार

अक्‍टूबर का महीना देश के लिए बहुत अहम साबित होने जा रहा है। इस महीने के समापन तक यह देश ऐसे दो बड़े आयोजनों का साक्षी बनेगा जो अभूतपूर्व हैं। अभूतपूर्व इस अर्थ में कि उनके क्रियान्‍वयन की बात तो दूर, उनके बारे में पूर्ववर्ती किसी सरकार ने आज तक विचार तक नहीं किया था। ये दोनों आयोजन क्रमश: 21 अक्‍टूबर, रविवार और 31 अक्‍टूबर, बुधवार को होंगे। दोनों

लौह पुरुष सरदार पटेल जो धर्मपत्नी की मृत्यु की सूचना के बाद भी केस लड़ते रहे !

स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण तक में सरदार वल्लभ भाई पटेल का  योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।  उनका जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव प्रेरणा के रूप में देश के सामने रहेगा। उन्होने युवावस्था में ही  राष्ट्र और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया था। इस ध्येय पथ पर वह निःस्वार्थ भाव से लगे रहे। गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म को योग रूप में समझाया है।