सौभाग्य योजना

करोड़ों लोगों को गरीबी के दलदल से निकालने में कामयाब रही मोदी सरकार

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि देश में गरीबी मिटाने की सैकड़ों योजनाओं के बावजूद गरीबी बढ़ती गई। हां, इस दौरान ज्यादातर सत्‍ताधारी कांग्रेस से जुड़े नेताओं, ठेकेदारों, भ्रष्‍ट नौकरशाहों की कोठियां जरूर गुलजार होती गईं। यह भ्रष्‍टाचार का ही नतीजा है कि आजादी के सत्‍तर साल बाद भी हम गरीबी, बेकारी, बीमारी, अशिक्षा के गर्त में आकंठ डूबे हुए हैं। आज जब

बिजली क्रांति: मोदी राज में हुई लालटेन युग की विदाई

एक बड़ी विडंबना यह है कि पूरा विपक्ष एक होकर जितना जोर नरेंद्र मोदी को हराने में लगा रहा है, उसका दसवां हिस्‍सा भी भाजपा को हराने में नहीं। आखिर मोदी के नाम पर विपक्ष को चिढ़ क्‍यों है इसे पिछले पांच वर्षों में नरेद्र मोदी के प्रयासों से देश में हुई अनेक विकासात्मक क्रांतियों में से एक बिजली क्रांति से समझा जा सकता है।

बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में अव्वल मोदी सरकार

बिजली, स्वच्छता और सड़क ये बेहद जरूरी बुनियादी सुविधायें हैं और मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में इन मोर्चों पर उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसे खारिज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मोदी सरकार द्वारा किये गये कार्य आंकड़ों के आईने में साफ-साफ नज़र आ रहे हैं।

परिवहन के क्षेत्र में एक नयी बिजली क्रांति लाने में जुटी मोदी सरकार

बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

हर गाँव के बाद हर घर तक बिजली पहुँचाने में जुटी मोदी सरकार

जिस देश में योजनाओं की लेट-लतीफी का रिकॉर्ड रहा हो वहां निर्धारित समय से पहले योजना पूरी हो जाए तो इसे चमत्‍कार ही कहा जाएगा। पंद्रह अगस्‍त, 2015 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हजार दिनों के भीतर देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्‍य रखा था। राजनीतिक इच्‍छाशक्‍ति और नौकरशाही की चुस्‍ती के कारण यह महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य 988 दिन में ही पूरा हो गया अर्थात तय समय से 12 दिन पहले।

सौभाग्य योजना : हर घर बिजली पहुँचाने की ठोस और रचनात्मक पहल

मोदी सरकार द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ नागरिक की मूल आवश्यकताओं को केंद्रीत कर योजनाएं बनाई जा रही हैं। ये सरकार सिर्फ शहरीय विकास पर केन्द्रित नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री अपने भाषणों और कार्यक्रमों में इस बात को साफ कर चुके हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा, तभी शहरों में कुछ नए निर्माण की संभावना है।