फसल

मोदी सरकार के विपणन सुधारों से बेहतर हो रहे किसानों के हालात

मोदी सरकार चुनिंदा फसलों के बजाए विविधीकृत फसलों के उत्पादन के साथ-साथ उनके भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन का देशव्यापी व्यवस्थित नेटवर्क बना रही है।

फसल विविधीकरण के जरिए खेती को खुशहाल बनाने में जुटी मोदी सरकार

मोदी सरकार 2014 से ही खेती-किसानी को परंपरागत फसल चक्र से बाहर निकाल फसल विविधीकरण की ओर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

कृषि कानूनों की कामयाबी बयां कर रही है गेहूं की रिकॉर्डतोड़ खरीद

पंजाब में 14 मई 2021 को समाप्‍त हुए गेहूं खरीद सत्र में रिकॉर्ड खरीद हुई है। इस रबी खरीद सत्र के दौरान पंजाब में नौ लाख किसानों से 132 लाख टन गेहूं की खरीद की गई।

कृषि क्षेत्र में बाजार अर्थव्‍यवस्‍था का आगाज करने वाले हैं नए कृषि कानून

मोदी सरकार नए कृषि कानूनों के जरिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दूरगामी योजना पर काम कर रही है ताकि कृषि जैव विविधता के विनाश, गेहूं-धान की एकफसली खेती, मिट्टी-पानी-हवा के प्रदूषित होने, भूजल संकट आदि से बचा जा सके। 

कृषि क्षेत्र के लिए दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करने की दिशा में अग्रसर मोदी सरकार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में जो सरकार के आधारभूत लक्ष्य होने चाहिए तथा जिनसे हर भारतीय स्वावलम्बी बनेगा, वही आज की मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में जुटी मोदी सरकार

इस साल स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण अनुकूल खेती पर जोर देते हुए रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने और अंतत: इनका इस्‍तेमाल बंद करने का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि एक किसान के रूप में हमें धरती को बीमार बनाने का हक नहीं है। 

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए भाजपा सरकारों की अनूठी पहल

इसमें कोई दो राय नहीं कि देश की खेती-किसानी की बदहाली पिछली सरकारों द्वारा लंबे समय तक कृषिगत आधारभूत ढांचा विशेषकर बिजली, सड़क, सिंचाई, बीज, उर्वरक, भंडारण, विपणन, प्रसंस्‍करण आदि की ओर ध्‍यान न दिए जाने का नतीजा है। भ्रष्‍टाचार में आकंठ डूबी और जाति-धर्म की राजनीति करने वाली सरकारों के पास इतनी फुर्सत ही नहीं थी कि वे दूरगामी कृषि सुधारों की ओर ध्‍यान देतीं। यही कारण है