स्वतंत्रता

महारानी लक्ष्मीबाई : सोए हुए पौरुष और स्वाभिमान को जागृत-झंकृत करने वाली वीरांगना

जनरल ह्यूरोज का यह कथन महारानी लक्ष्मीबाई के साहस एवं पराक्रम का परिचय देता है, ”अगर भारत की एक फीसदी महिलाएँ इस लड़की की तरह आज़ादी की दीवानी हो गईं तो हम सब को यह देश छोड़कर भागना पड़ेगा।”

‘भारतीय कम्युनिस्टों का चरित्र ऐसा है कि वे किसी के सगे नहीं हो सकते सिवाय अपने स्वार्थों के’

वो वामपंथी उदारवादी जो असहमत होने के अधिकार को संविधान द्वारा दिया गया सबसे बड़ा अधिकार मानते हैं, वही दूसरों की असहमति को स्वीकार नहीं कर पाते।

जब नेहरु सत्ता में थे तब आजादी की एक जंग लड़ रहा था ‘जनसंघ’

आज जब हम आजादी की सत्तरवीं सालगिरह मना रहे हैं तो हमें ये भी याद रखना चाहिए कि भारत कोई एक दिन में आजाद भी नहीं हुआ था। आज जिस भूभाग को हम नक़्शे पर देखते हैं वो 1947 में बनना शुरू हुआ था। धीरे धीरे करीब 15 साल का समय बीतने के बाद, हमारे उस नक़्शे ने अपनी वो शक्ल ली जिसे हम आज देखते हैं।