अगस्ता-वेस्टलैंड : मिशेल के प्रत्यर्पण से कांग्रेसी खेमे में इतनी बौखलाहट क्यों है?

देखा जाए तो मिशेल के प्रत्‍यर्पण के बाद से ही कांग्रेसी खेमा बौखलाया हुआ है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार किसीसे डरता नहीं है। उन्होंने इस मिशन के अगुआ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर निशाना साधा। सलमान खुर्शीद ने सीबीआई पर ही सवाल खड़े कर दिए। ऐसे में सवाल है कि अभी तो मिशेल ने कोई खुलासा भी नहीं किया है, फिर कांग्रेस इतनी बौखलाई क्यों है? कहीं इस बौखलाहट के पीछे ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाली बात तो नहीं?

इस सप्‍ताह हुए एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत अगस्‍ता वेस्‍टलैंड मामले के बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को मंगलवार की रात यूएई से प्रत्‍यर्पित करके नई दिल्‍ली लाया गया। निश्चित ही यह मोदी सरकार की एक बड़ी सफलता है। इस सफलता की अहमियत इससे प्रकट होती है कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्‍या ने स्‍वत: ही सहमकर ट्विट किया कि वो बैंकों का सौ प्रतिशत पैसा वापस करने को तैयार है। हालांकि फिर उसने सफाई दी कि इसका मिशेल के प्रत्यर्पण से कोई संबंध नहीं है।  

सीबीआई की इस सख्‍त कार्यवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मिशेल को रात में केवल दो घंटे ही सोने दिया गया। यह बात अलग है कि उसका समानांतर डॉक्‍टरी परीक्षण किया गया। असल में सीबीआई इस दलाल से गहन पूछताछ के इरादे में थी, इसके चलते उस पर सख्‍ती बरती गई।

मिशेल क्रिश्चियन (साभार : आज तक)

रात को भारत लाने के बाद सुबह 4 से 6 के लिए ही उसे नींद मिली, इसके बाद फिर पूछताछ का दौर चला और अगले ही दिन उसे पटियाला हाऊस कोर्ट में पेश किया गया जहां से कोर्ट ने उसे 5 दिनी सीबीआई हिरासत में भेजा है। माना जा रहा है कि मिशेल से अगस्‍ता वेस्‍टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर मामले में घूस की राशि के बंटवारे और सौदे से संबंधित कागजों की पहचान को लेकर जो पूछताछ की गई है उससे कुछ अहम बातें निकलकर सामने आ सकती हैं।

असल में सीबीआई जानना चाहेगी कि फिनमैक्‍केनिका और अगस्‍ता वेस्‍टलैंड से उसकी कंपनियों को जो करोड़ों की राशि मिली थी, उसे उसने किस प्रकार से वितरित किया। सीबीआई ने इस प्रकरण को बड़ी तेजी से हैंडल किया है। पिछले साल सितंबर में सीबीआई ने मिशेल के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। सीबीआई की स्‍पेशल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था जिसके बाद इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी करते हुए फरवरी 2017 में उसे दुबई में जा धरा था। उसके बाद से ही मिशेल हिरासत में था, जिसे अब सीबीआई भारत ले आई है।

देखा जाए तो मिशेल के प्रत्‍यर्पण के बाद से ही कांग्रेसी खेमा बौखलाया हुआ है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार किसीसे डरता नहीं है। सलमान खुर्शीद ने सीबीआई पर ही सवाल खड़े कर दिए। सवाल है कि अभी तो मिशेल ने कोई खुलासा भी नहीं किया है, फिर कांग्रेस अभी से इतनी बौखलाई क्यों है? कहीं इस बौखलाहट के पीछे ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाली बात तो नहीं?

बहरहाल, इन्हीं सबके बीच खबर आई कि इण्डियन यूथ कांग्रेस का नेता एल्जो जोसेफ जो वकील भी है, मिशेल का केस लड़ रहा है। हालांकि खबर है कि फजीहत होने पर एल्जो जोसेफ को यूथ कांग्रेस से निकाल दिया गया।  यदि तटस्‍थ भाव से देखा जाए तो एक बड़े मामले में भारत सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। ऐसे में एक विपक्ष के नाते तो कांग्रेस को भारत सरकार को बधाई देनी चाहिये, लेकिन कांग्रेस खेमे की बौखलाहट कहीं न कहीं उसका भय ही दिखाती है। 

बात-बात पर राफेल का दुहाई देने वाले और हर मंच पर राफेल का नया मनगढ़ंत दाम बताने वाले राहुल गांधी क्‍या भारत सरकार को बधाई देकर अब एक आदर्श विपक्ष की भूमिका का निर्वाह नहीं करना चाहेंगे? मिशेल ही क्‍यों, भारत सरकार ने तो हर भगोड़े कारोबारी और घोटालेबाज पर देश के भीतर व बाहर समय-समय पर कार्यवाही की है। ईडी ने नीरव मोदी की देश एवं विदेश में अनेकों संपत्तियां जब्‍त कीं हैं। सुब्रत बेनर्जी की संपत्तियां नीलाम हुईं हैं।

लालू प्रसाद यादव की काली कमाई की संपत्तियां जब्‍त की गईं हैं। विजय माल्‍या की संपत्ति फ्रीज हुईं हैं। इसे मिशेल पर हुई कार्यवाही का ही खौफ क्यों न कहा जाए कि इस कार्यवाही के ठीक बाद विजय माल्‍या का बयान सामने आया है कि वह बैंकों का बकाया चुकाने को तैयार है। एनएसए अजीत डोवाल के मार्गदर्शन में की गई यह कार्यवाही कई मामलों में अहम एवं निर्णायक साबित हो सकती है।

निश्‍चित ही प्रधानमंत्री मोदी अपने इस कथन ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का मजबूती से निर्वाह कर रहे हैं, जिसमें काले धन और भ्रष्‍टाचार के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के बाद देश में कालेधन माफिया की कमर तो टूटी ही है, अब बड़े घोटालेबाजों और कारोबारियों पर लगातार कार्यवाही इस बात को और पुख्‍ता करती है कि यह सरकार देश का पैसा लूटने वालों पर किस कदर सख्त है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)