नजरिया

गुलामी के प्रतीकों को मिटाने में जुटी मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्‍त भारत का सपना देख रहे हैं और धीरे-धीरे वह सपना हकीकत में बदल रहा है।

स्वामी विवेकानंद के ‘विश्व-बंधुत्व’ के संदेश की प्रासंगिकता

आज हमें स्वामी विवेकानंद के 128 वर्ष पूर्व दिए उस सन्देश को याद करने की आवश्यकता है जो संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति, दोनों की शिक्षा देता है।

आईएनएस विक्रांत : आत्मनिर्भर भारत की शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक

आईएनएस विक्रांत स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है। खास बात यह है कि इसके एयरबेस में जो स्टील लगा है, वो स्टील भी स्वदेशी है।

एक ऐसा स्मारक जिसने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवंत रखा!

विवेकानंद शिला स्मारक ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का एक जीता जागता उदाहरण है, जिसके निर्माण के दौरान अर्थिक दिक्कत पड़ने पर पूरे राष्ट्र ने आर्थिक योगदान दिया।

वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होते मोदी

राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे मोदी के कार्यों को तो दुनिया देख-परख रही ही है, बीते आठ सालों में विश्व पटल पर भी मोदी का नेतृत्व-कौशल उभरकर सामने आया है।

जन्माष्टमी विशेष : श्रीकृष्ण की धर्म नीति

लोकमंगल के निर्मल-जल में ही धर्म का कमल खिल सकता है। कृष्ण की धर्मदृष्टि इसी दर्शन से अनुप्राणित है। इसीलिए धर्म के संदर्भ में शाश्वत है, सार्वभौमिक है।

मोदी सरकार के प्रयासों से शिक्षा क्षेत्र में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर भारत

आज केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र के लिए न केवल नीतियां बना रही है अपितु इन नीतियों का क्रियान्वयन सफलता पूर्वक हो, इसका भी पूरा पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

मोदी सरकार के प्रयासों से खत्म हो रहा है नक्सलवाद

पिछले तीन साल में सुरक्षा बलों के 40 नए कैंप खोले गए हैं और 15 खोले जाने हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ाई गई है।

सांस्कृतिक अस्मिता को राजनीति के केंद्र में स्थापित करने वाले जननेता थे कल्याण सिंह

कल्याण सिंह का देहावसान राजनीति के एक युग का अंत व अवसान है। वे भारतीय राजनीति के शिखर-पुरुष के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।

अपनी जड़ों से जुड़कर मानसिक दासता से मुक्त होगा भारत!

भारत अपनी जड़ों से जितना अधिक जुड़ेगा, उतना ही उसमें आत्मगौरव और आत्मविश्वास की भावना का विकास होगा तथा मानसिक दासता से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।