मोदी सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर हैं चुनावी नतीजे

बिहार के साथ-साथ इन उपचुनावों को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल की नीतियों, उपलब्‍धियों पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन, बेरोजगारी, खस्‍ताहाल अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ नए किसान कानून और चीनी सेना के लद्दाख में घुस आने के मुद्दों पर जनता की राय सामने आई है।

एग्जिट पोल के तमाम निष्‍कर्षों को नकारते हुए बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनपा पार्टी-जनता दल (यूनाइटेड) गठबंधन बहुमत पाने में कामयाब रहा। इसके साथ-साथ 11 राज्‍यों की 58 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 40 सीटों पर जीत हासिल हुई है। 

साभार : IndiaTV News

बिहार के साथ-साथ इन उपचुनावों को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल की नीतियों, उपलब्‍धियों पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन, बेरोजगारी, खस्‍ताहाल अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ नए किसान कानून और चीनी सेना के लद्दाख में घुस आने के मुद्दों पर जनता की राय सामने आई है। 

इस दौरान जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाना, वहां जमीन लेने का अधिकार सभी भारतीय को देना, राम मंदिर का भूमिपूजन भी कुछ ऐसे मु्दे हैं जिन पर वोटरों ने मुहर लगाई है। 

देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी को मिल रही कामयाबी में केंद्र सरकार की भ्रष्‍टाचार रहित और पारदर्शी नीतियों की अहम भूमिका है। बिहार में भाजपा–जद (यू) गठबंधन में भाजपा को मिली सफलता को इसी संदर्भ में परखना होगा। बिहार में कोरोना संकट के चलते प्रवासियों में गुस्‍सा जैसे कारणों से चुनावी विश्‍लेषक भाजपा-जदयू गठबंधन की पराजय की भविष्‍यवाणी कर रहे थे। 

महागठबंधन के सबसे बड़े भागीदार राष्‍ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्‍वी यादव की चुनावी सभाओं की  भीड़ ने भी चुनावी विश्‍लेषकों को चौका दिया था। इस माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी प्रचार की कमान संभालते ही चुनावी परिदृश्‍य बदल गया। इससे जनता ने मोदी सरकार की भ्रष्‍टाचार रहित व बिचौलिया विहीन शासन व्‍यवस्‍था को आधार मानकर मतदान किया। 

साभार : Business Insider India

भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्‍यादा समर्थन गरीबों विशेषकर महिलाओं का मिला। उल्‍लेखनीय है कि मोदी सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं से देश भर की महिलाओं को लाभ पहुंचा है। इनमें प्रमुख हैं उज्‍ज्‍वला योजना, पक्‍का घर, मुफ्त राशन, शौचालय, बिजली, महिलाओं के बैंक खातों में सीधे धन का हस्‍तांतरण। इसी का नतीजा रहा कि जहां जनता दल (यू) को 43 सीटों पर विजय मिली वहीं भारतीय जनता पार्टी 74 सीट जीतने में कामयाब रही।

2015 से 2019 तक केंद्र सरकार ने प्रत्‍यक्ष नकदी हस्‍तांतरण योजना के तहत नौ लाख करोड़ रूपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा। इस समय 450 योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है। इनमें रसोई गैस सब्‍सिडी, मनरेगा, आयुष्‍मान योजना, उर्वरक सब्‍सिडी प्रमुख हैं। 

प्रत्‍यक्ष नकदी हस्‍तांतरण से नौ लाख करोड़ रूपयों में से 1.7 लाख करोड़ रूपये गलत हाथों में जाने से बचे गए जिसका लाभ आम आदमी को मिला। यदि भ्रष्‍टाचार पर पूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय राजीव गांधी की 15 प्रतिशत वाली  स्‍वीकारोक्‍ति को देखें तो इन नौ लाख करोड़ रूपयों में से 1.35 लाख करोड़ रूपये ही गरीबों तक पहुंच पाते शेष 7.65 लाख करोड़ रूपये बिचौलिए बैठे-बैठाए हड़प लेते।  

समग्रत: पहली कैबिनेट की पहली बैठक के पहले हस्‍ताक्षर से 10 लाख सरकारी नौकरियां देने जैसे तमाम चुनावी वादों के बजाए जनता ने मोदी सरकार के कामकाज को समर्थन दिया तो इसके पीछे गहरे निहितार्थ हैं। जब तक विरोधी दल इस निहितार्थ को नहीं समझेंगे तब तक उनकी पराजय होती रहेगी।

(लेखक केन्द्रीय सचिवालय में अधिकारी हैं। वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं। प्रस्तुत विचार उनके निजी हैं।)