मोदी के नेतृत्व में लोक-लुभावन योजनाओं से लोक-कल्याणकारी योजनाओं की ओर बढ़ता देश

समाजवादी पार्टी को उत्तरप्रदेश में संपन्न हुई ताजा विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा तो इसके पीछे एक अहम् कारण उसकी लोक-लुभावन और हवा-हवाई योजनाओं की राजनीति भी है। आम आदमी और कांग्रेस पार्टी की लगातार दुर्गति के लिए भी ऐसी योजनाएं काफी हद तक जिम्मेदार हैं। साथ ही, लोक-लुभावन योजनाओं से लोगों को थोड़ा लाभ दिया जा सकता है, मगर देश का समग्र विकास इससे संभव नहीं है। लिहाजा, मोदी सरकार लोक-कल्याणकारी योजनाओं की मदद से आम लोगों का भरोसा जीतना चाहती है, जिसमें वह सफल भी हो रही है।

लोक-लुभावन योजनाएँ अमूमन सत्ता में बने रहने के लिये लागू की जाती हैं। कांग्रेस सरकारों द्वारा लोगों को अनियंत्रित सब्सिडी देना या फिर आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली में आधे बिजली बिल माफ करना आदि को इस श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसी योजनाओं का उद्देश्य लोगों का भला करना कदापि नहीं होता है, जिसके कारण इनका असर अल्पकालिक होता है। इस तथ्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बखूबी वाकिफ हैं। इसलिए, सत्ता में आने के बाद से ही वे लोक-लुभावन योजनाओं की बजाय लोक-कल्याणकारी योजनाओं की एक लंबी शृंखला लेकर हमारे सामने आये। मोदी सरकार में लोक-कल्याण और देश के विकास को गति देने वाली योजनाओं को अधिक महत्व मिला है।

ताजपोशी के कुछ ही दिनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त, 2014 में “डिजिटल इंडिया” की संकल्पना को अमलीजामा पहनाया, जिसे 2019 तक पूरा किया जाना है। योजना का उद्देश्य था सभी सरकारी तंत्रों एवं उनसे सीधे तौर पर जुड़े आमजन को आपस में डिजिटली कनेक्ट करना, ताकि सरकारी तंत्रों के काम-काज में पारदर्शिता आये और वे सुचारु तरीके से अपना काम कर सकें। साथ ही, आम जनता भी आसानी से अपनी बात उनके समक्ष रख सके। विमुद्रीकरण के बाद डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। डिजिटलीकरण का सबसे बड़ा फायदा भ्रष्टाचार में कमी और कार्यों के निष्पादन में तेजी आना है।

साभार : गूगल

वर्ष 2014 के स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर “प्रधानमंत्री जनधन योजना” का आगाज किया गया। 25 मई, 2016 तक इस योजना के तहत केवल सरकारी बैंकों द्वारा 17 करोड़ 23 लाख खाते खोले जा चुके थे। वित्तीय समावेशन की संकल्पना को साकार करने की दिशा में उठाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा कदम है। हर परिवार की बैंक तक पहुँच हो जाने के बाद कल्याणकारी योजनाओं का फायदा सरकार सीधे लाभार्थियों के खातों में अंतरित करा सकेगी। इस योजना के तहत खातेधारकों को बीमा और ओवरड्राफ्ट की सुविधा देने का भी प्रावधान है।

वर्ष 2014 में आई “स्वच्छ भारत योजना” की संकल्पना भारत में नई नहीं है। इसके पहले “निर्मल भारत” के नाम से एक योजना चल रही थी, लेकिन उसके अपेक्षित परिणाम नहीं निकल सके। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस योजना से सीधे तौर पर संबद्ध हैं और देश की कई चर्चित हस्तियाँ भी इससे जुड़ी हैं, जिसके कारण देशभर में स्वच्छता अभियान ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है।

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इस योजना की वजह से ही स्वच्छता के मामले में पहली बार मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल देशभर में क्रमशः पहले व दूसरे स्थान पर आ सके। “मेक इन इंडिया” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि देश की हर वस्तु पर “मेड इन इंडिया” लिखा हो। जब जरूरत की हर वस्तु देश में ही बनने लगेगी तो आयात पर से हमारी निर्भरता कम हो जायेगी और विदेशी मुद्रा रिजर्व में इजाफा, रोजगार सृजन में बढ़ोतरी आदि संभव हो सकेगी।

वर्ष 2014 में शुरू की गई “सांसद आदर्श ग्राम योजना” के तहत हर सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक गाँव को गोद लेकर अपने सांसद निधि से वहाँ की समस्याओं का निष्पादन करना है। वर्ष 2019 तक चलने वाली इस योजना के तहत सरकार चरणबद्ध तरीके से देश के हर गाँव को विकसित करना चाहती है। इस योजना के अंतर्गत अब तक कई गाँवों का कायाकल्प किया जा चुका है। देश की एक बड़ी आबादी आज भी असंगठित क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जिसके कारण उनका भविष्य असुरक्षित है। सभी का बुढ़ापा सुरक्षित करने के  सरकार ने “अटल पेंशन योजना” शुरू की है।

इक्कीसवीं सदी के 16 साल गुजर जाने के बाद भी देश का एक बड़ा तबका घर की सुविधा से महरूम है। सभी का खुद का घर हो, इसके लिये सरकार ने “प्रधानमंत्री आवास योजना” की शुरुआत की, जिसके तहत सरकार ने 2022 तक 2 करोड़ घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। यह घर उन्हें मुहैया कराया जायेगा, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इस योजना के तहत लोन लेने पर सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा देने एवं लाभार्थी के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति होने होने पर उन्हें प्राथमिकता देने का प्रावधान है। देखा जा सकता है कि मोदी सरकार अगर यहाँ सब्सिडी दे रही है, तो इसके पीछे एक ठोस लक्ष्य है।

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कब किसकी मृत्यु होगी से हम सभी अंजान हैं। इसी संभावना को दृष्टिगत करके सरकार ने “प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना” को शुरू किया है, जिसके तहत 18 से 50 वर्ष का व्यक्ति 330 रूपये की वार्षिक किस्त जमाकर इस योजना का लाभ उठा सकता है। इसके लिये सिर्फ उस व्यक्ति के पास सक्रिय बचत खाता होना चाहिए। दुर्घटना में मृत्यु, अपंग या गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें राहत देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना” की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत महज 12 रूपये की किस्त सालाना जमा करके 2 लाख रूपये तक बीमा का लाभ लिया जा सकता है। इन दोनों योजनाओं की सबसे खास बात बीमा दावा करने में कम दस्तावेजों की दरकार का होना है।

भारत मूल रूप से कृषि प्रधान देश है। फिर भी देश में कृषि योग्य भूमि का 45 प्रतिशत हिस्सा अभी भी सिंचाई से महरूम है और 55 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि की निर्भरता मानसून पर बदस्तूर बनी हुई है। इसी वस्तुस्थिति को ध्यान में रखकर सरकार ने “कृषि सिंचाई योजना” का शुभारंभ किया है, जिसके तहत सिंचाई को संभव बनाने के लिये किसानों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

देश में एक बहुत बड़ा वर्ग बेरोजगार है। चूँकि, संसाधनों के अभाव में सभी के लिये रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं है। इसलिए, उन्हें स्व-रोजगारी बनाने के लिये सरकार ने “कौशल विकास योजना” को शुरू किया है। इस योजना के तहत सभी को कौशलयुक्त बनाया जायेगा, ताकि वे खुद का कारोबार शुरू करने में समर्थ हो सकें।

इसी आलोक में “प्रधानमंत्री मुद्रा योजना” को शुरू किया गया है, जिसके तहत असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को बैंकों द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। बैंकों ने वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार द्वारा दिये गये ऋण वितरण के लक्ष्य को हासिल कर लिया था, जो इस बात का सूचक है कि खुद का कारोबार शुरू करने में बेरोजगारों या अर्द्ध बेरोजगारों को मदद मिल रही है। मोदी सरकार “गरीब कल्याण योजना” भी चला रही है, जिसका मकसद सूक्ष्म कारोबारी कंपनियों की मदद से गरीबों को आर्थिक सहायता पहुंचाना है।

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हमारे देश में अभी भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। अस्तु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “सुकन्या समृद्धि योजना” की शुरुआत की, ताकि बेटियों को शिक्षित करने या उनकी शादी करने में पैसों की कमी आड़े नहीं आये। इस योजना के तहत 10 साल से कम उम्र की कन्या का खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जायेगा, जिसे 21 साल की उम्र होने तक चलाने का प्रावधान है। परिपक्वता पर राशि का इस्तेमाल लड़की की शादी या उसके उच्च शिक्षा पर किया जा सकता है। लाभार्थी को अधिकतम फायदा मिले इसके लिये इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को आयकर से मुक्त रखा गया है।

इनके अलावा “डिजी लॉकर योजना”, “ई-बस्ता योजना”, “पहल योजना”’, “सागर माला योजना”, “स्मार्ट सिटी”, “स्कूल नर्सरी योजना”, “नई मंजिल योजना”, “गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम”, “स्टैंड अप इंडिया योजना”, उज्ज्वला योजना” आदि भी मोदी सरकार की महत्वपूर्ण लोक-कल्याणकारी योजनाएँ हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छी तरह से जानते हैं कि लोकलुभावन योजनाओं की मदद से सत्ता में एक लंबी पारी नहीं खेली जा सकती है।  समाजवादी पार्टी को उत्तरप्रदेश में संपन्न हुई ताजा विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा तो इसके पीछे एक अहम् कारण उसकी लोक-लुभावन और हवा-हवाई योजनाओं की राजनीति भी है। आम आदमी और कांग्रेस पार्टी की लगातार दुर्गति के लिए भी ऐसी योजनाएं काफी हद तक जिम्मेदार हैं। साथ ही, लोक-लुभावन योजनाओं से लोगों को थोड़ा लाभ दिया जा सकता है, मगर देश का समग्र विकास इससे संभव नहीं है। लिहाजा, मोदी सरकार लोक-कल्याणकारी योजनाओं की मदद से आम लोगों का भरोसा जीतना चाहती है, जिसमें वह सफल भी हो रही है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र, मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में मुख्य प्रबंधक हैं। स्तंभकार हैं। ये विचार उनके निजी हैं।)