एनपीए

बेहतर होता बैंकों का प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत

बैंकों का सकल एनपीए और शुद्ध एनपीए महामारी के पहले के स्तर से बेहतर हुआ है। अब ऋण खाते फिसलकर एनपीए में कम तब्दील हो रहे हैं।

अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी है बैंकों का निजीकरण

केंद्र सरकार संसद के इस शीतकालीन सत्र में निजीकरण से जुड़े विधेयक को पारित कर सकती है। इस सत्र में सरकार ने कुल 26 विधेयकों को संसद में पारित करने..

ये तथ्य बताते हैं कि आर्थिक सुधारों के कारण मजबूती की ओर बढ़ रहे भारतीय बैंक

कोरोना महामारी के बावजूद भी देश में सरकारी बैंकों के प्रदर्शन में सुधार आया है, जो बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती की ओर इशारा करता है।

बैड बैंक से फँसे कर्ज की वसूली की राह होगी आसान

एक अनुमान के अनुसार बैड बैंक 5 लाख करोड़ से अधिक के फंसे कर्ज के समाधान में कारगर हो सकती है। साथ ही, इसके दूसरे भी फ़ायदे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रिज़र्व बैंक की कवायद

कोरोना महामारी से निपटने के लिये सरकार और रिजर्व बैंक ने कुछ उपाये किये हैं। आगे आवश्यकता को देखते हुए और उपाय भी किए जा सकते हैं।

बैड बैंक से होगा फंसे कर्ज का इलाज, मिलेगी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती

बैड बैंक में सरकार कोई निवेश नहीं करेगी और न ही इसमें सरकार की शेयरहोल्डिंग होगी। बैड बैंक बाजार भाव पर बैंकों से उनका डूबा कर्ज खरीदेगा, जिससे अधिक एनपीए वाले बैकों की बैलेंसशीट अच्छी हो जायेगी

केंद्र सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रहे भारतीय बैंक

सरकार के प्रयासों से बैंकों के एनपीए में कमी दृष्टिगोचर हो रही है। पिछले 6 वर्षों के दौरान सरकार ने लगातार बैंकों की हर तरह की समस्याओं के समाधान हेतु प्रयास किए हैं।

दिखने लगे हैं आईबीसी क़ानून के सकारात्मक परिणाम

ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं,  हालाँकि, इसका सफर मुश्किलों भरा रहा है। लंबे समय की रणनीति और निरंतर सुधार की परिणति है यह। दूसरे देशों में भी इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन हेतु आईबीसी को लाने में लंबा समय लगा है।

सरकार के प्रयासों से सुधर रही बैंकों की हालत, कम हो रहा एनपीए

सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप कई कॉरपोरेट ऋणदाताओं ने दिसंबर, 2018 की तीसरी तिमाही में अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया है, जिससे बैंकों के एनपीए में कमी आई है। एनपीए में कमी आने और वसूली में तेजी आने से आने वाले दिनों में बैंकों की वित्तीय स्थिति में और भी सुधार आने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2019 की तीसरी

मोदी सरकार ले आई कड़ा क़ानून, अब बैंकों का कर्ज डकारने वालों की खैर नहीं!

संसद का मानसूत्र सत्र कई मायनों में बेहद अहम रहा है। इस सत्र में कई ऐसे विधेयक पास हुए हैं, जो सालों से लंबित थे। इसी कड़ी में मोदी सरकार ने बैंकों की एनपीए के खिलाफ एक महत्वपूर्ण और सार्थक कानून पास किया है। इस विधेयक को सरकार ने लंबी चर्चा के उपरांत आखिरकार पास करा लिया। ‘द इंफोर्समेंट ऑफ़ सिक्यूरिटी इंटरेस्ट एंड रिकवरी ऑफ़ डेबिट्स लॉस एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स’ नामक यह विधेयक अगस्त के दूसरे हफ्ते में संसद के दोनों सदनों द्वारा पास हो गया।