एमएसएमई

फिनटेक से हो रहा है बैंकों को लाभ

रिजर्व बैंक यह भी चाहता है कि फिनटेक कंपनियों की क्षमता का समुचित दोहन करने के लिये इस क्षेत्र में निवेश के प्रवाह को हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाये।

‘वोकल फॉर लोकल’ से खुलेगी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली तथा उसके आगे के त्योहारों के लिए लोगों से स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करके ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

पहली तिमाही में जीडीपी में हुई रिकॉर्ड वृद्धि अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को ही दर्शाती है

वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में जीडीपी में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। तिमाही आधार पर भी पिछले वर्ष की दिसंबर तिमाही से जीडीपी में लगातार वृद्धि होना विकास में तेजी आने का द्योतक है।

थोक एवं खुदरा व्यापारियों को एमएसएमई के दायरे में लाना केंद्र सरकार की एक बड़ी सौगात

खुदरा एवं थोक व्यापारियों को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में विकसित करने हेतु कटिबद्ध है।

कोरोना संकट में आमजन और अर्थव्यवस्था दोनों को राहत देने में जुटी है सरकार

कोरोना काल में एमएसएमई, मजदूरों और किसानों को सबसे ज्यादा राहत देने की जरुरत है। इसी को दृष्टिगत करके सरकार ने एमएसएमई, मजदूरों और किसानों के लिये कुछ उपाय किये हैं।

विकास का वाहक बनता एमएसएमई क्षेत्र

एमएसएमई क्षेत्र में लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अगर एक परिवार की संख्या 4 मानें तो ये 11 करोड़ लोग 33 करोड़ अन्य लोगों का जीवनयापन कर रहे हैं।

आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला बजट

बजट में आधारभूत संरचना खास करके ग्रामीण आधारभूत संरचना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बैंकिंग क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र आदि को मजबूत बनाने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।

‘कोरोना से लड़ाई में सरकार ने जो फाइटिंग-स्पिरिट दिखाई है, वो खुद में एक मिसाल है’

केंद्र सरकार ने इस आपदा-काल में योजनाओं और नीतियों के समन्वय और जनता से मिले सहयोग से एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि हम कोरोना जैसी आपदा से कैसे लड़ें।

श्रमिकों के लिए भी आपदा को अवसर बनाने में जुटी सरकार

सरकार अब श्रमिकों को उनके हुनर, दक्षता और जानकारी के आधार पर स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया करा रही है। यह श्रमिकों के लिए आपदा में अवसर की तरह ही है।

एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती से निकलेगा आत्मनिर्भर भारत का रास्ता

कृषि क्षेत्र के बाद, एमएसएमई क्षेत्र में रोज़गार के सबसे अधिक अवसर निर्मित होते हैं। 73वें राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण के अनुसार, देश में  एमएसएमई क्षेत्र में 6.34 करोड़ इकाईयाँ कार्यरत थीं, ज़िनके माध्यम से 11.1 करोड़ व्यक्तियों (4.98 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में एवं 6.12 करोड़ शहरी क्षेत्रों में) को रोज़गार उपलब्ध कराया जा रहा था।