महाभारत

जन्माष्टमी विशेष : श्रीकृष्ण की धर्म नीति

लोकमंगल के निर्मल-जल में ही धर्म का कमल खिल सकता है। कृष्ण की धर्मदृष्टि इसी दर्शन से अनुप्राणित है। इसीलिए धर्म के संदर्भ में शाश्वत है, सार्वभौमिक है।

राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश

मोहन भागवत ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को लेकर जो कुछ कहा है, उसका उद्देश्य चुनावी राजनीति के संकीर्ण दायरे से कहीं बड़ा और व्यापक है। यह राष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान है।

भारत की विशेषता है अनेकता में एकता

हम एक सांस्कृतिक राष्ट्र हैं, जो आज से नहीं हज़ारों वर्षों से चलते चले आ रहे हैं। भारत दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से इकलौती ऐसी सभ्यता है जो आज भी  मूल रूप में अपने अस्तित्व में है।

जन्माष्टमी विशेष : राजनीति के आदर्श प्रतिमान हैं श्रीकृष्ण

नए निर्माण के पथ में आने वाले प्रत्येक अवरोध को, चाहे वह कितना भी प्रतिष्ठित क्यों न हो; हटाना ही होगा। यही श्रीकृष्ण की राजनीति का मूलमंत्र है।

संघर्ष-पथ के पथिकों के लिए आकाशदीप की तरह है कृष्ण का चरित्र

लोक में कृष्ण की छवि ‘कर्मयोगी’ के रूप में कम और ‘रास-रचैय्या’ के रूप में अधिक है। चीर-हरण जैसी लीलाओं की परिकल्पना द्वारा उनके पवित्र-चरित्र को लांछित किया जाता है। राधा को ब्रज में तड़पने के लिए अकेला छोड़कर स्वयं विलासरत रहने का आरोप तो उन पर है ही, उनकी वीरता पर भी आक्षेप है कि वे मगधराज जरासन्ध से डरकर मथुरा से पलायन कर गए। महाभारत के युद्ध का दायित्व भी उन्हीं पर डाला गया है।

दिल्ली का इतिहास: पांडवों की राजधानी से लेकर भारत की राजधानी तक

देश की राजधानी दिल्ली का इतिहास का सिरा भारतीय महाकाव्य महाभारत के समय…

मनुष्य को मनुष्य की तरह जीने की शिक्षा देने वाले महामानव थे कृष्ण!

जीवन के साथ ही मृत्यु घेरने लगती है और अनवरत हमले करने शुरू करती है। कुछ इस हमले से उबर जाते हैं और कुछ पहले ही झपट्टे में ध्वस्त। यह तय बात है कि जिस किसी ने भी जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। मगर कुछ लोग काल को टाल देते हैं और ऐसे ही लोग कालजयी या कालातीत कहलाते हैं।