राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

हेमू कालाणी : जिन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में मां भारती के श्रीचरणों में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था!

हेमू कालाणी ने ‘इंकलाब-जिंदाबाद’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए खुद अपने हाथों से फांसी का फंदा अपने गले में डाला, मानो फूलों की माला पहन रहे हों।

युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत कर रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

भारत में पिछले 96 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के नागरिकों में देशप्रेम की भावना का संचार करने का लगातार प्रयास कर रहा है।

एक ऐसा स्मारक जिसने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवंत रखा!

विवेकानंद शिला स्मारक ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का एक जीता जागता उदाहरण है, जिसके निर्माण के दौरान अर्थिक दिक्कत पड़ने पर पूरे राष्ट्र ने आर्थिक योगदान दिया।

देश की युवा-शक्ति के विषय में गुरूजी गोलवलकर के विचार

गुरूजी युवाओं द्वारा पूछे गए अनेक महत्वपूर्ण और सूक्ष्म प्रश्नों का बहुत ही सरलता से जवाब देते हुए अनेको बार उनका मार्ग प्रशस्त किया करते थे ।

गुरूजी का संगठन मंत्र और तंत्र आज भी प्रासंगिक

गुरूजी को यह कदापि पसन्द नहीं था कि कोई भी सेवा-कार्य जनता पर उपकार की भावना से किया जाए।  उनके अनुसार ” सेवा हिन्दू जीवन – दर्शन की प्रमुख विशेषता है।

राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश

मोहन भागवत ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को लेकर जो कुछ कहा है, उसका उद्देश्य चुनावी राजनीति के संकीर्ण दायरे से कहीं बड़ा और व्यापक है। यह राष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान है।

एकनाथ रानडे : जो प्रत्येक व्यक्ति में भारतीयता के भाव को जागृत करना चाहते थे

एकनाथ जी रानडे कहते हैं कि – ”यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरे जीवन में न आता, तो मेरा जीवन दिशाहीन ऊर्जा का प्रवाह मात्र बनकर रह जाता।“

राम मंदिर हमें भान कराता रहेगा कि सत्य को कितना भी दबाया जाए, वो असत्य को मिटा ही देता है

राम देश के राष्ट्र पुरुष हैं। जाहिर है उनका मंदिर राष्ट्र मंदिर होगा जो देश में समरसता, आस्था, मर्यादा का भाव जागृत करता रहेगा।

लाल जी टंडन : राजनीति में सक्रिय लोगों को उनकी वैचारिक निष्ठा प्रेरणा देती रहेगी

लाल जी टंडन जैसे नेता कम ही होते हैं। उनका जीवन राजनीति में वैचारिक निष्ठा के प्रति समर्पित लोगों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

संघ प्रमुख के उद्बोधन के निहितार्थ बहुत गहरे हैं

देश में कभी भी कोई बड़ा मामला आता है अथवा कोई विमर्श खड़ा होता है, तो देश का एक बड़ा तबका यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्या राय है। आज भी यह प्रश्न उठ रहा है कि मौजूदा कोरोना के महासंकट से बाहर आने एवं वर्तमान में कोरोना वायरस से उपजी चुनौतियों से निपटने की दिशा में आरएसएस किस भूमिका का निर्वहन कर रहा है?