8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना भारत!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर को दहाई अंकों में ले जाने वाले बयान के कुछ दिनों के बाद ही विनिर्माण क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन की बदौलत जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 9 तिमाहियों में सबसे ज्यादा 8.2 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही थी। इस तरह चालू वित्त वर्ष की पहली  तिमाही में भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला अर्थव्यवस्था बन गया।

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की श्रेणी में ले जाने के लिये जब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वार्षिक वृद्धि दर को दहाई अंकों में ले जाने की बात कही, तो लोगों को यह बात कोरी कल्पना लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार देश में कारोबार करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये विगत 4 सालों में अनेक कदम उठाये गये हैं। साथ ही, चालू खाते घाटे जैसे वृहद आर्थिक संकेतकों को भी काबू में रखा गया है। लिहाजा, ऐसे सकारात्मक परिदृश्य में जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर जल्द ही दो अंकों में पहुँच सकती है।   

साभार : जी न्यूज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल का घरेलू उत्पादन एवं घरेलू विनिर्माण को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया। वे चाहते हैं कि उनकी सरकार वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी दोगुना करके 3.4 प्रतिशत पर ले जाये। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली से व्यापार करना सुगम हुआ है। इससे करदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। नई प्रणाली के तहत 54 लाख नये करदाताओं ने पंजीकरण कराया है। अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या भी एक करोड़ से अधिक हो गई है। देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार भी अच्छी स्थिति में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर को दहाई अंकों में ले जाने वाले बयान के कुछ दिनों के बाद ही विनिर्माण क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन की बदौलत जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 9 तिमाहियों में सबसे ज्यादा 8.2 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही थी।

इस तरह चालू वित्त वर्ष की पहली  तिमाही में भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला अर्थव्यवस्था बन गया। चीन की वृद्धि दर पहली तिमाही में घटकर 6.7 प्रतिशत रह गई है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 9 तिमाहियों में सबसे अधिक 13.5 प्रतिशत रही है। कम आधार प्रभाव के कारण भी वृद्धि दर में तेज इजाफा हुआ है, लेकिन इसका प्रतिशत न्यून रहा है।  

साभार : One India

वित्त सचिव के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर से साफ हो जाता है कि जीएसटी सहित दूसरे आर्थिक सुधारों का प्रतिफल परिलक्षित होने लगा है। विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि मांग में सुधार को दर्शाती है। विगत साल जीएसटी और नोटबंदी के कारण वृद्धि दर प्रभावित हुई थी। वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में विनिर्माण गतिविधियों में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। हालाँकि, निर्माण गतिविधियों की वृद्धि वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में 1.8 प्रतिशत रही थी, जो चालृ वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 8.7 प्रतिशत रही।

कृषि और सहायक क्षेत्र में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र की रफ्तार 7.3 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान यह 7.7 प्रतिशत रही थी। प्रशासन, रक्षा और दूसरी सेवाओं में विकास की गति धीमी रही। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो सरकारी खर्च को दर्शाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि सरकार अनावश्यक खर्च में कटौती कर रही है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसकी गति 9.9 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 13.3 प्रतिशत रही थी। निजी उपभोग व्यय द्वारा मापे जाना वाली घरेलू मांग वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में 8.6 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही में 6.7 प्रतिशत थी। राज्यों में वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने और आवास भत्ते में संशोधन से भी खपत मांग में तेजी आई है।

कहा जा सकता है विकास के विविध मानक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के सुधारात्मक उपायों से इसमें और भी बेहतरी आने की आशा है। सुधार प्रक्रिया जारी है। इस आधार पर कयास लगाये जा रहे हैं कि आगामी तिमाहियों में भी जीडीपी दर में बढ़ोतरी होगी।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)