बदलते दौर में मोदी की रवांडा यात्रा का मतलब

रवांडा समेत सम्पूर्ण अफ्रीका महाद्वीप में जिस तरह से चीन का निवेश बढ़ रहा है, वो भारत के लिए चिंता का सबब है, क्योंकि इससे कहीं न कहीं भारत के हित प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रवांडा यात्रा अफ़्रीकी देशों में चीनी कूटनीति का जवाब देने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

रवांडा मध्य और पूर्वी अफ्रीका में सबसे छोटे देशों एक संप्रभु राज्य है। विषुवत रेखा रवांडा युगांडा, तंजानिया, बुरुंडी और कांगो के लोकतांत्रिक गणराज्य से घिरा हुआ है। पूर्व में अपने जातीय समुदायों के हिंसक टकराव के कारण विश्व मीडिया की नजरों में आने वाला रवांडा अब अपने तीव्र विकास के लिए जाना जाता है। रवांडा अफ्रीका के सबसे तेज विकास करने वाले देशों में है। मात्र 26,338 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला यह देश केरल से भी छोटा है। इस बदलते परिवेश का ही परिणाम है कि आज भारत, चीन समेत सम्पूर्ण विश्व की निगह इस देश पर केन्द्रित है।

इसी परिप्रेक्ष्य में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 से 27 जुलाई तक रवांडा, युगांडा और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गये। इसमें प्रधानमंत्री अपनी ऐतिहासिक  अफ़्रीकी यात्रा में रवांडा की यात्रा करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी भारतीय विशिष्ट  व्यक्ति ने यहाँ की यात्रा नहीं की है।

भारत की ओर से सर्वप्रथम फरवरी 2017 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने रवांडा की यात्रा की थी और इस दौरान दोनों देशों ने रवांडा की राजधानी किगाली में एक उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित करने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए, रवांडा एयर की उड़ानें भारत से शुरू कीं और राजनयिक व आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा आवश्यकताओं को पारस्परिक रूप से छूट दी।

परन्तु  बदलते वैश्विक परिवेश में भारत के प्रधानमंत्री  मोदी की यह यात्रा बहुत अहम है, जिसने प्रमुख वैश्विक शक्तियों का ध्यान इस ओर केन्द्रित कर दिया है। क्योंकि  रवांडा को  पूर्वी अफ्रीका के प्रवेश-द्वार के रूप में देखा जाता है और इसी के मद्देनजर पिछले  वर्ष जनवरी में ही  भारत ने रवांडा के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत उसे 40 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया और वहां भारत की ओर से प्रशिक्षण छात्रवृति कार्यक्रम भी प्रारभं किये गए हैं।

इस पूर्व अफ्रिकी देश की यात्रा पर जाने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। शायद यही वजह रही कि प्रधानमंत्री मोदी की आगवानी करने रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कगामे स्वयं किगली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे।  रवांडा में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई, और प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति कगामे ने साझा बयान दिया।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत बहुत जल्द रवांडा में अपना दूतावास शुरू करने जा रहा है जो (उच्चायुक्त) दोनो देशों की सरकारों के बीच संपर्क स्थापित करने के अलावा काउंसलर, पासपोर्ट, वीजा और अन्य सेवाएं भी देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत और रवांडा के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। हमारे लिए यह गर्व का विषय है कि रवांडा के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय विकास यात्रा में भारत आपका विश्वस्त साझेदार रहा है। रवांडा की विकास यात्रा में हमारा योगदान आगे भी बना रहेगा।‘ प्रधानमंत्री मोदी रवांडा का  किगली नरसंहार स्मारक देखने गये साथ ही उन्होंने सामाजिक संरक्षण से जुड़े एक कार्यक्रम में भी शिरकत की।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस कारण भी बेहद ख़ास रही कि ऐसा पहली बार हुआ जब पीएम मोदी किसी देश में जाकर विशेष तोहफे के रूप में गाय को उपहार स्वरूप भेंट किये। पीएम मोदी ने यहां के रवेरू मॉडल गांव का दौरा कर 200 गायें उपहार स्वरूप दीं। इन गायों को  रवांडा सरकार की एक कल्याणकारी योजना ‘गिरिंका कार्यक्रम’ के तहत दिया गया। इस योजना का प्रारंभ  रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे ने गरीब परिवारों की मदद के उद्देश्य  से राष्ट्रीय सामाजिक संरक्षण प्रोग्राम  के माध्यम से किया था, जिसके तहत  रवांडा के प्रत्येक  गरीब परिवार को एक गाय दी जाती  है। 

इस यात्रा के दौरान भारत और रवांडा  के बीच अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशो ने चमड़ा एवं इससे संबंधित क्षेत्रों  उद्योग, डेयरी उत्पाद, कृषि उत्पादन के क्षेत्र में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के दौरान भारत ने किगाली  में विशेष आर्थिक क्षेत्र और तीन कृषि परियोजनाओं के लिए 20 करोड़ डॉलर देने की पेशकश की।  भारत रवांडा में कई  औद्योगिक विकास पार्क और किगली में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसइजेड)  के लिए 10  करोड़ डॉलर तथा कृषि क्षेत्र के लिए 10 करोड़ डॉलर का कर्ज देगा।

भारत और रवांडा के बीच संबंधो को मधुर बनाने में दोनों देश के बीच आर्थिक सामंजस्य ने बड़ी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने किंगली में भारत-रवांडा बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि हम भारत और रवांडा के बीच आर्थिक संबंध बेहतर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, दोनों देश  साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। ग्रामीण विकास और छोटे स्तर के उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं।  

भारत और रवांडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2005 की अवधि में 92 मिलियन डॉलर था और जो 2010 में 350 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है  भारत द्वारा 200 पंजीकृत योजनाएं  रवांडा में  चलाई  जा रही हैं, जिसमें कि 1 अरब अमेरिकी डॉलर की पाइपलाइन परियोजना अहम है।

मोदी की रवांडा यात्रा को प्रमुखता इसलिए दी जा रही है, क्योंकि पीएम मोदी की यात्रा से ठीक पहले चीन के राष्ट्र्पति ने भी रवांडा की यात्रा की थी।  शी जिनपिंग  ने यात्रा के दौरान वहां भारी भरकम निवेश का ऐलान किया। जिनपिंग ने एक बयान में कहा कि इस मुल्क से हमारा कूटनीतिक संबंध है। चीन के राजदूत ने  कहा कि पिछले 12 साल से 361 प्रोजेक्ट पर वह काम कर रहा है जिसमें 400000 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है।

रवांडा समेत सम्पूर्ण अफ्रीका महाद्वीप में जिस तरह से चीन का निवेश बढ़ रहा है वो भारत के लिए चिंता का सबब है, क्योंकि इससे कहीं न कहीं भारत के हित प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रवांडा यात्रा चीनी कूटनीति का जवाब देने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के अफ़्रीकी अध्ययन विभाग में शोधार्थी हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)