निखिल यादव

स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व का संदेश

जब स्वामी विवेकानंद स्वागत का उत्तर देने के लिए खड़े होते हैं और “अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों” से अपना वक्तव्य शुरू करते हैं और सामने बैठे विश्वभर से आये हुए लगभग 7 हज़ार लोग दो मिनट से ज्यादा समय तक तालियाँ बजाते रहते हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करने की दिशा में अग्रसर मोदी सरकार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में जो सरकार के आधारभूत लक्ष्य होने चाहिए तथा जिनसे हर भारतीय स्वावलम्बी बनेगा, वही आज की मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

भारत के रोम रोम में बसते हैं श्रीराम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या जाकर भव्य-दिव्य राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे और करोड़ों भारतीयों का सपना साकार करेंगे।

स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े पाँच रोचक प्रसंग जो हमें उनके और करीब ले जाते हैं

प्रो. शैलेन्द्रनाथ धर द्वारा लिखी पुस्तक “स्वामी विवेकानंद समग्र जीवन दर्शन” के अनुसार वर्ष 1898 में जब स्वामी जी अल्मोड़ा यात्रा पर थे, उन दिनों अंग्रेज़ उनकी निगरानी करते थे, जब यह सूचना स्वामीजी को पता लगी तो उन्होंने यह बात हंसी में उड़ा दी थी

स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में ‘आत्मनिर्भर भारत’

पश्चिम के अपने प्रथम प्रवास (1893-97) के दौरान स्वामीजी ने पश्चिम का भारत की तरफ देखने का  नजरिया ही बदल दिया। भारत को उस समय सपेरों का, दासों का और अंधविश्वासियो का देश माना जाता था जो सालो से विदेशियों द्वारा गुलाम रहा हो।

कोरोना महामारी के बीच अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर संपूर्ण विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं

योग आपको शारारिक और भौतिक अस्तित्व से ऊपर उठाकर मानव की उच्चतम क्षमता की ओर ले जाता है। और योग द्वारा जो भी कुछ मनुष्य को मिलता है, वो अधिकतर समाज को देने में ही विश्वास करता है।

हेमचन्द्र विक्रमादित्य : जिन्होंने बर्बर मध्यकाल में 22 लड़ाइयाँ जीतीं और दिल्ली के सम्राट भी बने

आज के दिल्ली का कुतुब मीनार क्षेत्र तुग़लकाबाद – 7 अक्टूबर 1556 को हेम चंद्र विक्रमादित्य के नाम से प्रसिद्ध हेमू विक्रमादित्य और तार्दी बेग खान के नेतृत्व में मुगल सम्राट अकबर की सेनाओं के बीच लड़ी गई एक उल्लेखनीय लड़ाई का मेजबान बन गया।

जयंती विशेष: डॉ. हेडगेवार जिन्होंने अपने छोटे-से कमरे में दुनिया के सबसे बड़े संगठन की नींव रखी

1 अप्रैल 1889 को नागपुर में जन्मे डॉ. हेडगेवार में अपनी माटी और देश से प्रेम-भाव उत्पन्न होने में समय न लगा, उनको अपने समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता थी। जो इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के 60 वर्ष पूर्ण होने पर बाँटी गयी मिठाई को स्वीकार ना करने से ही स्पष्ट पता लग जाता है, उन्होंने  विद्यालय में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वन्दे मातरम

कोरोना संकट : ‘आज घर में रहना ही राष्ट्र सेवा और सावधानी ही दवा है’

आज 21वी सदी का अबतक का सबसे बड़ा संकट कोरोनावायरस – कोविड -19 हमारे सामने है। अपने आप को महाशक्ति कहने और कहलवाने वाले देशों ने भी अपने घुटने टेक दिए हैं। चीन के वुहान से निकला यह वायरस अब दुनिया भर को अपने चपेट में ले चुका है। अगर शुरू में ही चीन सच्चाई से नहीं भागता और सूचनाएं ना छुपाता तो शायद दुनिया आज इस वैश्विक

कोरोना की आपदा के इस दौर में स्वामी विवेकानंद के ‘प्लेग मेनिफेस्टो’ की प्रासंगिकता

कोरोनावायरस विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा महामारी घोषित हो गया है, इस संक्रमण से लगभग  4,720 लोगों की मृत्यु हो गयी और 128,343 से अधिक लोगों में इसकी पुष्टि की गई है। चीन के वुहान प्रान्त  से उत्पन्न यह आपदा वास्तविक और आभासी दुनिया के समाचार, रिपोर्ट, गपशप और हर एक के लिए विचार-विमर्श का केंद्र बिंदु बन गया है।