निखिल यादव

एकनाथ रानडे : जो प्रत्येक व्यक्ति में भारतीयता के भाव को जागृत करना चाहते थे

एकनाथ जी रानडे कहते हैं कि – ”यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरे जीवन में न आता, तो मेरा जीवन दिशाहीन ऊर्जा का प्रवाह मात्र बनकर रह जाता।“

युवाओं के लिए प्रेरणा का माध्यम बनेगी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा

स्वामी विवेकानंद की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रतिमा के होने का मतलब है इस विश्वविद्यालय के हर छात्र का भारतीयता के रंग में रंग जाना,

भारत की विशेषता है अनेकता में एकता

हम एक सांस्कृतिक राष्ट्र हैं, जो आज से नहीं हज़ारों वर्षों से चलते चले आ रहे हैं। भारत दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से इकलौती ऐसी सभ्यता है जो आज भी  मूल रूप में अपने अस्तित्व में है।

भगिनी निवेदिता : ‘वह भारत में भले न पैदा हुई हों, लेकिन भारत के लिए पैदा हुई थीं’

भगिनी निवेदिता ने सेवा का कार्य निस्वार्थ भाव से किया,  ना कोई इच्छा-अनिच्छा, ना कोई धर्मांतरण का छलावा, वह भारत में आकर भारतीयता के रंग में रंग ही गईं।

राजनीतिक-वैचारिक भेदों से परे हैं विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानंद ने पूरा जीवन निस्वार्थ  भाव से भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया।  वह जीवन भर मनुष्य निर्माण के कार्य में लगे रहे।

नरेंद्र मोदी : विशाल जनसमर्थन से युक्त नेतृत्व के बीस वर्ष

13 सितम्बर 2013 को नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री के तौर पर भाजपा ने घोषित किया था। मोदी ने प्रधानमंत्री के उम्मीदवार बनते ही सबसे पहले  नारा दिया  272 प्लस

भगिनी निवेदिता : मार्गरेट नोबल से निवेदिता तक की यात्रा

स्वामीजी द्वारा बताई गयी सब चुनौतियों को स्वीकार करते हुए मार्गरेट नोबेल 28 जनवरी,1898 को अपना परिवार, देश, नाम, यश छोड़कर भारत आती हैंI

स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व का संदेश

जब स्वामी विवेकानंद स्वागत का उत्तर देने के लिए खड़े होते हैं और “अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों” से अपना वक्तव्य शुरू करते हैं और सामने बैठे विश्वभर से आये हुए लगभग 7 हज़ार लोग दो मिनट से ज्यादा समय तक तालियाँ बजाते रहते हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करने की दिशा में अग्रसर मोदी सरकार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में जो सरकार के आधारभूत लक्ष्य होने चाहिए तथा जिनसे हर भारतीय स्वावलम्बी बनेगा, वही आज की मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

भारत के रोम रोम में बसते हैं श्रीराम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या जाकर भव्य-दिव्य राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे और करोड़ों भारतीयों का सपना साकार करेंगे।