निधन

‘सुषमा स्वराज का निधन भारतीय राजनीति की वो क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती’

सुषमा स्‍वराज अब हमारे बीच नहीं हैं। उनके जाने से राजनीति ही नहीं, बल्कि देश व दुनिया के समाज को भी क्षति पहुंची है। उनके जैसी महिलाएं राजनीति के क्षेत्र से आती हैं, तो समूचा समाज उनसे प्रभावित होता है, उनका लोहा मानता है। भाजपा की कद्दावर नेता और पूर्व विदेश मंत्री होने के अलावा भी वे बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व की धनी थीं।

सदैव प्रेरणा देता रहेगा मनोहर पर्रिकर का जीवन

मनोहर पर्रिकर ने ज्यों की त्यों धर दीन्ही चदरिया को चरितार्थ किया। सत्ता को काजल की कोठरी कहा जाता है। लेकिन वह आजीवन बेदाग रहे और इसी रूप में वह सदैव देश की स्मृतियों में रहेंगे। उनका जीवन प्रेरणादायक था। जनसेवा के नाम पर परिवारवाद, भ्रष्टाचार,जातिवाद में जकड़े नेताओं को खासतौर पर उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

भारतीय राजनीति के सूर्य का अस्ताचलगामी हो जाना!

1985 के शुरुआत की बात है। श्रीमती इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में नवोदित भाजपा मात्र दो सीटों तक सिमट कर रह गयी थी। तब ऐसा लगा था मानो पार्टी का अस्तित्व शुरू होते ही ख़त्म हो गया हो। सर मुड़ाते ही ओले पड़े हों जैसे। ऐसे नैराश्य के समय में एक दिन पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक शांता कुमार, अटल जी के यहां किसी कार्यक्रम का