सिख दंगा

सैम पित्रोदा के बयान से एकबार फिर उजागर हुआ कांग्रेस का असली राजनीतिक चरित्र

तकनीकविद से राजनीतिज्ञ बने सैम पित्रोदा ने एक बार फिर कांग्रेस के असली चरित्र को उजागर करने का काम किया। 1984 के कांग्रेस प्रायोजित सिख विरोधी दंगों पर टिप्‍पणी करते हुए कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु ने कहा “1984 में दंगा हुआ तो हुआ।” इस प्रकार उन्‍होंने कांग्रेस प्रायोजित दंगे को छिटपुट घटना करार दिया। सिख विरोधी दंगों पर कांग्रेस पार्टी की

अनगिनत बेगुनाहों के खून से सना है कांग्रेसी पंजा!

कहा जाता है कि देर से मिला न्‍याय अन्‍याय के बराबर होता हे। दुर्भाग्‍यवश हिंदुस्‍तान में यह कहावत अक्‍सर चरितार्थ होती रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिन सरकारों पर दोषियों को सजा दिलवाने का दायित्‍व था, वे सरकारें ही दोषियों को बचाने की जी तोड़ कोशिश करती रहीं।

84 दंगा : नानावती आयोग से एसआईटी तक भाजपा सरकारों की कोशिशों से सिखों को मिलने लगा न्याय!

गत दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस मुरलीधर राव और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ सिख विरोधी दंगे में फैसला सुनाते एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कि 1947 में बंटवारे के वक्त कई लोगों का कत्लेआम किया गया था, 37 साल बाद देश की राजधानी  दिल्ली ऐसी ही त्रासदी की गवाह बनी। आरोपी राजनीतिक संरक्षण का