आदर्श तिवारी

दो मामले जिन्होंने वामपंथी और सेक्युलर गिरोह के पाखण्ड की कलई खोल दी है!

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का अराजक स्वरूप जिस तरह सामने  आया है, वह हैरान करने वाला है। ऐसा कानून जिससे देश के नागरिकों का कोई संबंध ना हो, उसपर इस तरह का वातवरण खड़ा करना, मानो एक खास समूह का सब कुछ लूट गया हो, हैरतअंगेज लगता है। समूचे देश ने देखा कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर कैसे सुनियोजित हिंसा फैलाई गई, आगजनी की गई, बसों को आग के हवाले कर दिया गया, देश को तोड़ने की बात कही गई। यहाँ

आभार रैली : नागरिकता क़ानून पर विपक्ष की अफवाहों को प्रधानमंत्री मोदी ने किया बेनकाब

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश भर में मचे उपद्रव के बीच पूरा देश प्रधानमंत्री की तरफ देख रहा था कि उनपर पर हो रहे राजनीतिक हमलों एवं नागरिकता कानून को लेकर फैलाए जा रहे झूठ पर वे क्या जवाब देते हैं। 1731 अवैध कालोनियों को केंद्र सरकार द्वारा नियमित कराए जाने के बाद रविवार को देश की राजधानी दिल्ली के चर्चित रामलीला मैदान में दिल्ली प्रदेश

नागरिकता संशोधन क़ानून के इस हिंसक विरोध का आधार क्या है?

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस विधेयक से हिंदुस्तान के किसी भी मुस्लिम को डरने की जरूरत नहीं है। वह (मुसलमान) नागरिक हैं और रहेंगे। इसके बाद भी देशभर में नागरिकता कानून के विरोध में  हिंसा फैलाने वाले लोगों की मंशा क्या है?

वैचारिक प्रतिबद्धताओं को अमल में लाती मोदी सरकार

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में संसद किसी एक व्यक्ति पर केन्द्रित रही है, तो वह गृह मंत्री अमित शाह हैं। एनआईए संशोधन बिल से लेकर अनुच्छेद 370 हटाने तक का ऐतिहासिक निर्णय हो, गृहमंत्री ने अपने भाषण और अपनी कार्यशैली से अपने आलोचकों को भी प्रभावित किया है। संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने के ठीक पहले नागरिकता संशोधन विधेयक  सदन में पारित हो गया।

कांग्रेस ने गांधी के नामपर केवल राजनीति की, मोदी उनके सपनों को पूरा कर रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल से अभी तक की यात्रा को देखें तो गांधी के विचारों एवं सिद्धांतों को जन-जन से जोड़ने के लिए उनकी सरकार ने सांकेतिक से लेकर व्यावहारिक तक प्रत्येक स्तर पर ठोस काम किया है। इसका सबसे बड़ा उदारहण स्वच्छ भारत अभियान है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गांधी ने देखा था, लेकिन आजादी के बाद

ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही हार मान ली है!

देश के दो अहम राज्य महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया अपने मध्यान्ह पर है। यहाँ के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने सियासत के समीकरणों को साधने के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की प्रक्रिया को भी लगभग पूरा कर लिया है। गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को एक ही चरण में दोनों राज्यों में मतदान होगा और 24 अक्टूबर को परिणाम हमारे सामने होंगे। ऐसे में अब चुनाव प्रचार के लिए 15 दिन का समय शेष रह गया है।

हिंदू धर्म को बदनाम करने वाले बयानों के लिए दिग्विजय पर कार्रवाई क्यों नहीं करती कांग्रेस?

अपने बड़बोले बयानों से अक्सर नकारात्मक चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को भारतीय राजनीति के उस धड़े के मुखिया के तौर पर देखा जाना चाहिए, जिन्हें बगैर कोई विवादित टिप्पणी किये चैन की नींद नहीं आती। यह सर्वविदित है कि अपने बयानों से दिग्विजय सिंह प्राय: अपनी और पार्टी की फजीहत कराते रहते हैं, किन्तु ताज्जुब इस बात का है कि कांग्रेस घोर विवादित बयानों के बाद भी उनपर कोई कार्यवाही नहीं करती है।

डूसू चुनाव : सावरकर का अपमान करने वालों के मुंह पर तमाचा है एबीवीपी की जीत

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में इसबार भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को भव्य विजय प्राप्त हुई है। इस चुनाव में चार पदों में से तीन पदों पर एबीवीपी ने विजय प्राप्त की है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव का पद परिषद के खाते में गया, तो कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई को महज एक सचिव पद से ही संतोष करना पड़ा।

भारतीय राजनीति में सबके लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे अरुण जेटली

देश की राजनीति में अगस्त, 2019 का महीना भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी गहरे आघात-सा साबित हो रहा है। सुषमा स्वराज को गए अभी एक पखवारा ही बीता था कि लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे अरुण जेटली का भी असमय ही निधन हो गया। अरुण जेटली का निधन देश की राजनीति में एक रिक्तता पैदा करने वाला है। जेटली एक विराट व्यक्तित्व के धनी राजनेता थे। 

रामलाल : भारतीय राजनीति में सादगी, सहजता और समन्वय की मिसाल

राजनीति के शिखर पर रहते हुए रामलाल ने बेहद सादगी और सहजता से कार्य किया है। उनके तेरह वर्ष के लंबे कार्यकाल के दौरान कभी कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया, जिससे भाजपा अथवा संघ रामलाल से अहसज हुआ हो। पर्दे के पीछे रहकर संघ तथा भाजपा के बीच संतुलन साधने के साथ–साथ रामलाल ने बड़ी चतुराई के साथ पार्टी को गुटबाजी से भी बचाए रखा।