केजरीवाल

ईमानदार राजनीति की निकली हवा, दिल्ली सरकार के पदों की बंदरबाँट करने में डूबे केजरीवाल!

अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन का सहारा लेकर अरविन्द केजरीवाल व उनकी टीम ने मौका देख धीरे-से पूरे आंदोलन को एक-तरफ़ कर अपना नया राजनीतिक एजेंडा आम आदमी पार्टी के रूप में देश में लांच किया।

कोर्ट के फैसले के बाद अब रार छोड़ें और दिल्ली में कुछ काम भी करें केजरीवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार की अपील पर जो फैसला सुनाया है, वह उसके लिए झटका भी है और बचाव का रास्ता भी। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के असल प्रशासक दिल्ली के उपराज्यपाल ही है। जिस 69वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत दिल्ली में विधानसभा है और सरकार बनी है, उसके मुताबिक दिल्ली का उपराज्यपाल ही दिल्ली का असल प्रशासक है और वह केंद्रीय गृहमंत्रालय के अधीन प्रशासन चलाता है। रही बात विधानसभा की तो उसकी वह हैसियत नहीं है, जो हैसियत संघ के दूसरे राज्यों की है।

अराजकता का ध्वस्त होता अधिकारवाद, केजरीवाल को कोर्ट का तमाचा

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को संवैधानिक मर्यादाओं के विधिक विवेचन और स्थापन के बीच अधिकारों की ‘जंग’ में दिल्ली हाईकोर्ट से वाजिब सबक मिलने के साथ ही बड़ा सियासी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज केजरीवाल सरकार की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के संवैधानिक प्रमुख हैं और वह कैबिनेट की सलाह मानने को बाध्य नहीं हैं। दरअसल आज दिल्ली हाईकोर्ट के सामने प्रश्न था कि दिल्ली पर किसका कितना अधिकार है यानी दिल्ली सरकार का या फिर उपराज्यपाल का।

मोदी और बीजेपी पर आरोप की राजनीति के अलावे अब किसी काम के नहीं रहे केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जनता ने सत्ता विकास के कार्यों और दिल्ली के भले के लिए सौंपी थी। लेकिन शायद दिल्ली की केजरीवाल सरकार काम करने के मूड में नहीं है। बल्कि केजरीवाल सरकार का पूरा ध्यान अपने काम पर कम और मोदी सरकार पर ज्यादा रहता है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को सत्ता संभाले लगभग डेढ़ वर्ष हो चुके हैं। लेकिन जनता के हितों के कार्यों को छोड़कर केजरीवाल

संविधान का उल्लंघन केजरीवाल की रणनीति का हिस्सा है

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के नेता खुद को संविधान से उपर समझने लगे। वे हर उस संवौधानिक प्रक्रिया को तुच्छ समझने लगे जिसका समर्थन भारतीय संविधान करता है। केजरीवाल ने संविधान के इतर जाकर ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी जिसको बाद में माननीय न्यायलय द्वारा असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। इस वाकया से सबक लेने और संवैधानिक प्रक्रियाओं का एक फिर से उल्लंघन किया और दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए जनमत संग्रह कराने का राग अलापने लगे।

कुर्सी से चिपकने की राजनीति में पीएचडी है केजरीवाल की पार्टी: अन्ना हजारे

भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में अन्ना हजारे के सहयोगी रहे अरविन्द केजरीवाल के संबध में सवाल पूछने पर अन्ना कहते हैं कि केजरीवाल ने राजनीति में जाकर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया। मैंने पहले ही कहा था कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए होगा, राजनीति के लिए नहीं। मैंने राजनीतिक दल बनाने के लिए अरविंद को रोका था।