गुजरात

गुजरात में अपने ही बुने जाल में खुद फंस गयी कांग्रेस

गुजरात में कांग्रेस का दांव उल्टा पड़ गया है। उसने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर हमले से राज्य सरकार को घेरने की योजना बनाई थी, लेकिन भद्द उसीकी पिट रही है। एक आपराधिक घटना को ये ऐसा रूप देने में लगे थे, जिसकी गूंज उत्तर भारत तक सुनाई देने लगी थी। लेकिन सच्चाई जल्दी ही सामने आ गई।

गुजरात : क्यों लग रहा कि ‘ठाकोर सेना’ की हिंसा को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है?

कांग्रेस पार्टी दो दशक से अधिक समय से गुजरात की सत्ता से बाहर है। जाहिर  है, वहां की जनता का उसपर से विश्वास उठ चुका है। गुजरातवासियों को वर्तमान में विकास के मुद्दे को लेकर कांग्रेस से रत्ती भर भी उम्मीद नहीं है। अब यही बात कांग्रेस को हजम हो नहीं रही है और सत्ता के प्रति अपनी लालसा के कारण अब कांग्रेस गुजरात जैसे समृद्ध राज्य में अशांति फैलाकर अपनी

दंगों की राजनीति में माहिर रही है कांग्रेस

जो कांग्रेस पार्टी पिछले पंद्रह वर्षों से देश भर में होने वाले चुनावों में गुजरात दंगों की माला जपती रही है, वही कांग्रेस गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में गुजरात दंगों का भूलकर भी नाम नहीं ले रही है। क्योंकि गुजरात में ये दाँव उसे ही नुकसान पहुंचाएगा। एक ओर कांग्रेसी नेता केरल में सरेआम गाय काटकर उसका मांस परोस रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी गुजरात में मंदिरों, मठों में माथा टेक

गुजरात में किसानों का मुद्दा उठाने से पहले वहाँ की ‘कृषि क्रांति’ के बारे में तो जान लें, राहुल गांधी !

गुजरात में कांग्रेस की खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी गुजरात का ताबड़तोड़ दौरा कर रहे हैं। चूंकि मोदी को सांप्रदायिक ठहराने की 2014 की कांग्रेसी मुहिम उल्‍टा असर दिखा चुकी है, इसलिए कांग्रेस इस बार विकास को मुद्दा बना रही है। राहुल गांधी कभी नोटबंदी तो कभी जीएसटी के बहाने बेरोजगारी का मुद्दा उठा रहे हैं।

राहुल गांधी की कार पर चले पत्थर को मुद्दा बनाकर खुद फँस गयी है कांग्रेस !

प्रजातंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। गुजरात में राहुल गांधी की कार पर पत्थर फेंकना निंदनीय व आपराधिक कृत्य है। गुजरात सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। पत्थर फेंकने वाले को जेल भेजा। अब कानून अपना कार्य करेगा। लेकिन इस प्रकरण ने कुछ प्रश्न भी उठाए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर एक पत्थर क्या फेंका गया कि लोकतंत्र खतरे में पड़ गया। एक साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय

अमित शाह के प्रवास कार्यक्रमों से घबराया हुआ है विपक्ष !

अमित शाह की सक्रियता भाजपा के लिये प्रेरणा बन रही है, लेकिन विपक्ष के लिये यह परेशानी का सबब है। अमित शाह, संगठन को मजबूत बनाने के लिये सभी प्रदेशों में प्रवास कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा विरोधियों की धड़कने बढ़ा देती है। वह अपनी पार्टी की आंतरिक हलचल के लिये भी अमित शाह को दोषी बता रहे हैं

डेयरी क्षेत्र के विकास से यूपी के किसानों को मजबूती देने में जुटी योगी सरकार

योगी सरकार की ओर से किसानों को चार-पांच दुधारू मवेशी खरीदने के लिए सब्‍सिडी देने का फैसला किया गया है। सरकार जानती है कि दुग्‍ध प्रसंस्‍करण क्षमता में ढाई गुना की बढ़ोत्‍तरी आसान नहीं है। इसीलिए वह गुजरात की भांति चारागाह विकास, दूध की खरीद-बिक्री, भंडारण, प्रशीतन, प्रसंस्‍करण, पैकेजिंग संबंधी बुनियादी ढांचा भी बना रही है। इन कोशिशों के कामयाब होते ही डेयरी

मोदी के नेतृत्व में सूखे गुजरात में हुई थी कृषि क्रांति, अब देश की बारी है!

गुजरात के जामनगर में अजी बांध पर स्‍थित एसएयूएनआई परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह ऐसी पहल है, जिस पर हर गुजराती गर्व महसूस करेगा। गौरतलब है कि एसएयूएनआई परियोजना से सौराष्‍ट्र के 116 छोटे-बड़े जलाशयों को भरा जाएगा, जिससे सौराष्‍ट्र में पानी की समस्‍या दूर हो जाएगी।

दंगों के दम पर ही शासन करती रही है कांग्रेस, यही है उसकी राजनीति का असल चरित्र!

भारत में सांप्रदायिक दंगों का लंबा इतिहास रहा है। अंग्रेजों ने अपनी “बांटों व राज करो” नीति को कामयाब बनाने के लिए जिस सांप्रदायिकता का बीज बोया था उसे आजाद भारत के कांग्रेसी व वामपंथी नेताओं ने खाद-पानी देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।

कौन रच रहा दलित राजनीति के बहाने अशांति फैलाने की साजिश ?

इसमें कोई शक नहीं कि आज भी हमारे समाज में तमाम समस्याएं और कुरीतियाँ बनी हुईं हैं। समाज में अभी भी व्यापक सुधारों की जरूरत है। अभी हाल में गुजरात के ऊना तहसील स्थित समयीयाड़ा गाँव में दलित समुदाय के कुछ लोगों की पिटाई का मामला सामने आया, जिसके बाद वहां विरोध प्रदर्शन आदि हुए।