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अटल बिहार वाजपेयी : एक कवि-ह्रदय राजनेता

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के शिंके का बाड़ा मुहल्ले में हुआ था। उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापन का कार्य करते थे और माता कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं। अटलजी अपने माता-पिता की सातवीं संतान थे। उनसे बड़े तीन भाई और तीन बहनें थीं। अटलजी के बड़े भाइयों को अवध बिहारी वाजपेयी, सदा बिहारी वाजपेयी तथा प्रेम बिहारी वाजपेयी के नाम

भारतीय राजनीति के ‘राजर्षि’ हैं अटल बिहारी वाजपेयी

आपने वर्णमाला भी अभी पूरी तरह से सीखी नहीं हो और कहा जाय कि निराला के अवदान पर कोई निबंध लिखें; ‘दिनकर’ पर टिप्पणी आपको तब लिखने को कहा जाय जब आपने विद्यालय जाना शुरू ही किया हो, इतना ही कठिन है राजनीति के अपने जैसे किसी शिशु अध्येता के लिए अटल जी पर कुछ लिखना। और अगर साहित्य के साधक ऋषि का ‘राजर्षि’ में रूपांतरण या साहित्य और राजनीति दोनों को दूध और

मोदी सरकार को अर्थनीति सिखाने से पहले ज़रा अपनी गिरेबान में तो झाँक लीजिये, मनमोहन सिंह जी!

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी, संसद में आपकी इस तकरीर कि नोटबंदी संगठित और कानूनी लूट-खसोट है और इस फैसले से देश के किसानों और उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, ने कुल मिलाकर देश को हंसते-हंसते लोटपोट हो जाने का ही मौका दिया है। आपका यह प्रवचन ठीक उसी प्रकार है, जैसे कोई रोगी वैद्य किसी मरीज को बेहतर दवाओं का नुस्खा बताता है। आपको भान होना चाहिए कि स्वयं

प्रधानमंत्री के सवालों का जवाब दें नोटबंदी का विरोध कर रहे विपक्षी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगरा में परिवर्तन रैली को जिस अंदाज में संबोधित किया है, उसे दो तरह से देखा जा सकता है। एक, उन्होंने विपक्ष पर करारा हमला बोला है। दो, नोटबंदी पर सरकार और प्रधानमंत्री को घेरने के लिए हाथ-पैर मार रहे विपक्ष से प्रधानमंत्री ने सख्त सवाल पूछ लिया है। ऐसा सवाल जिसका सीधा उत्तर विपक्ष दे नहीं सकता। नोटबंदी का विरोध कर रहे नेताओं की ओर प्रधानमंत्री मोदी ने

वर्तमान समय में देश की जरूरत हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

मोदी इस देश की वक्ती ज़रूरत हैं। आपने उनका गोवा में दिया गया भाषण सुना क्या ? उनकी शारीरिक भाषा देखी, आंखें देखीं और शब्दों के परे जो कुछ भी वह बयान कर रहे थे, वह देख पाए क्या ? क्या वह किसी थके आदमी की भाषा हो सकती है, किसी हारे हुए इंसान की बॉडी-लैंग्वेज लग रही है क्या, किसी चिंतित, गुस्साए, खीझे आदमी का भाषण वैसा हो सकता है क्या ? इन सब का जवाब एक शब्द में है- नहीं।

मोदी सरकार के इन कदमों से खेती बनेगी मुनाफे का सौदा, किसानों के आएंगे अच्छे दिन!

भारतीय खेती की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि कुदरत का प्रकोप हो या मेहरबानी दोनों ही दशाओं में किसान बदहाल रहता है। लेकिन अब यह स्‍थिति ज्‍यादा दिन रहने वाली नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फसल बीमा से लेकर उपज की बिक्री तक का मुकम्‍मल उपाय करने में जुट गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का फर्जी गौरक्षकों को कड़ा सन्देश, तथाकथित सेकुलरों की भी बोलती हुई बंद!

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को टाउनहॉल में जनता से रूबरू होते हुए सवालों का…

‘मन की बात’ से बढ़ी रियो ओलंपिक में पदक जीतने की उम्मीद  

विगत कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब ‘मन की बात’ में भारतीय खेलों को बेहतर बनाने की बात कही तो भारतीय खेल और खिलाड़ियों के साथ-साथ  देशवासियों को उम्मीद की एक नयी किरण दिखाई दी। दरअसल यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पूरे देश को मिलकर विचार करना पड़ेगा यह केवल अकेले सरकार का मसला नहीं है। हर बार जब देश के खिलाड़ी पदक जितने में कामयाब नहीं होते हैं अथवा इक्के-दुक्के होते हैं तो देश भर में एक चर्चा आम हो जाती है कि आखिर इतनी बड़ी आबादी में से नाम मात्र के खीलाड़ी ही पदक क्यों जीतते हैं?। लेकिन कभी भी किसी भी स्तर पर इसके समाधान के बारे नहीं सोचा गया।