मुस्लिम

राम मंदिर : भूमि-पूजन पर विपक्ष का बेमतलब बवाल

राजनीति तोड़ती है, जबकि संस्कृति जोड़ती है। इसमें  किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि राम मंदिर राजनीतिक नहीं, अपितु एक सांस्कृतिक मुद्दा है।

जम्मू-कश्‍मीर का शेष भारत से सही अर्थों में एकीकरण करने में कामयाब रही मोदी सरकार

अनुच्छेद-370 खत्म होने के एक लगभग एक साल पूरे होने पर आज हम देख सकते हैं कि सुरक्षा बलों की मुस्‍तैदी से न केवल आतंकवाद-अलगाववाद में कमी आई है, बल्‍कि आम जनता को राहत मिली है।

ननकाना साहिब की घटना बताती है कि सीएए क्यों जरूरी है!

पिछले सप्‍ताह पाकिस्‍तान में स्थित ननकाना साहिब स्‍थल पर पथराव किए जाने की घटना सामने आई। यहां सिखों के इस पवित्र धर्मस्‍थल पर एक स्‍थानीय परिवार के साथ मिलकर भीड़ ने पत्‍थर फेंके, जिसके बाद माहौल में तनाव व्‍याप्‍त हो गया। मामला धर्मस्‍थल के प्रमुख की पुत्री के अपहरण व धर्मांतरण से जुड़ा था, ऐसे में बात बढ़ गई और इसने हिंसा का रूप ले लिया। जिस

मोदी राज में मुसलमानों के सशक्तिकरण से घबड़ाई कांग्रेस

मोदी सरकार का सर्वाधिक बल मुसलमानों का शैक्षिक पिछड़ापन दूर करने पर है। इसके लिए सरकार मदरसों को आधुनिक बनाने के लिए  थ्री-टी योजना अर्थात टायलेट, टिफिन और टीचर पर काम कर रही है। इसके तहत देश भर के मदरसों में एक लाख शौचालय बनवाने का लक्ष्‍य रखा गया है

नागरिकता संशोधन क़ानून के इस हिंसक विरोध का आधार क्या है?

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस विधेयक से हिंदुस्तान के किसी भी मुस्लिम को डरने की जरूरत नहीं है। वह (मुसलमान) नागरिक हैं और रहेंगे। इसके बाद भी देशभर में नागरिकता कानून के विरोध में  हिंसा फैलाने वाले लोगों की मंशा क्या है?

ये आंकड़े बताते हैं कि क्यों जरूरी है नागरिकता संशोधन विधेयक?

तीन तलाक पर क़ानून बनाकर, कश्मीर से धारा 370 हटाकर, राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब नागरिकता संशोधन बिल को लोकसभा से पारित कराकर मोदी सरकार ने अपनी नीतियां बिलकुल साफ़ कर दी हैं। इस सरकार की खासियत ही कही जाएगी कि एक के बाद एक महत्वपूर्ण और युगांतरकारी परिवर्तन की नींव रखने में कामयाब हो रही है।

कई अर्थों में ऐतिहासिक साबित हुई नौ नवम्बर की तारीख

देश के बहुचर्चित रामजन्‍मभूमि  मामले में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ चुका है। यह निर्णय वास्‍तव में राष्‍ट्र के हित में आया है, राष्‍ट्र की एकता व अखंडता, सामाजिक सौहार्द्र के पक्ष में आया है। कानूनी निष्‍कर्ष की बात करें तो विवादित भूमि रामलला को दिए जाने और मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को पृथक से निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि दिए

तीन तलाक बिल : यह आस्था नहीं, अधिकारों की लड़ाई है!

यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है। अपनी वोटबैंक की राजनीति की एकतरफा सोच में  विपक्षी दल इतने अंधे हो गए हैं कि  यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके इस रवैये से उनका दोहरा आचरण ही देश के सामने आ रहा है।

रमजान में मतदान पर विपक्षी नेताओं की व्यर्थ सियासत

जो लोग रमजान की तीन तारीखों पर मतदान का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुस्लिम समाज की जमीनी जानकारी नहीं है, या वह किसी अन्य उद्देश्य से विरोध कर रहे हैं। यह अच्छा है कि अनेक मुसलमान ऐसे विरोध को अनुचित बता रहे हैं।

लोकसभा में तीन तलाक पर कांग्रेस के रुख ने उसके मुस्लिम हितैषी होने के ढोंग की पोल खोल दी है!

गत 27 दिसंबर की तारीख देश के लिए ऐतिहासिक महत्‍व की रही। केंद्र सरकार ने तीन तलाक विधेयक को एकबार फिर लोकसभा में पारित करवा लिया। इसके साथ ही देश में मुस्लिम महिलाओं के लिए न्‍याय का एक अभिनव अध्‍याय रचने की दिशा में हम आगे बढ़ गए हैं। तीन तलाक कुप्रथा अब किसी से छुपी नहीं है। इस कुप्रथा के चलते दश में हर साल अनगिनत मुस्लिम महिलाओं का जीवन बरबाद हो जाता है।