पाक को आग में झोंकता एक और कट्टरपंथी मुल्ला !

हालांकि अभी तक रिजवी की तरफ से कोई भारत विरोधी बयान तो नहीं आया है, पर वो भारत का मित्र नहीं हो सकता। पाकिस्तान में भारत के मित्रों के लिए स्पेस खत्म हो चुका है। पाकिस्तान में निर्वाचित सरकार पर कट्टरपंथी मुल्लों और सेना का दबाव अपने आप में गंभीर मसला है। इससे वहां अस्थिरता और बढ़ेगी। ये स्थिति भारत के लिए सुखद नहीं है। भारत का ये दुर्भाग्य ही है कि पाकिस्तान जैसा धूर्त देश हमारा पड़ोसी है। इससे तमाम मोर्चो पर डील करना अपने आप में चुनौती तो है ही।

पाकिस्तान को एक और कट्टर मुल्ला मिल गया है। नाम है खादिम हुसैन रिजवी। उर्दू और पंजाबी में तकरीरें करना वाला रिजवी गैर-मुसलमानों और अपने विरोधियों को गालियां बकने से भी परहेज नहीं करता। ये ही वहां पर लगातार जारी बंद और धरने का नेतृत्व कर रहा था। इसके ही नेतृत्व में देश के विधि मंत्री जाहिद हामिद के इस्तीफे की मांग हो रही थी। इसका आरोप है कि जाहिद हामिद ने ईशनिंदा की है, उन्हें कैबिनेट से निकाला जाए और फिर उन पर कार्रवाई हो। आखिर जाहिद हामिद ने इस्तीफा भी दे दिया अपने पद से।

कुछ साल पहले तक इस कट्टरपंथी मुल्ले का किसी को कोई पता नहीं था। इन दिनों रिजवी के ज्ञान देने वाले वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत वायरल भी हो रहे हैं। वो जिस तरह से अपने शिष्यों को संबोधित करता है, उसे देखकर इसके धार्मिक नेता होने पर संदेह अवश्य होता है। रिजवी का संबंध बरेलवी धारा से है। उसने देखते ही देखते अपनी छवि कठोर कट्टर मुल्ले वाली बना ली है। रिजवी के इशारे पर बीते दिनों कई दिनों तक कट्टरपंथी लाहौर, कराची, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, पेशावर, शेखुपुरा समेत पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में तोड़-फोड़ करते रहे थे। रिजवी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का नेता है।

खादिम हुसैन रिजवी

तो मौलाना अजहर मसूद और हाफिज सईद के बाद पाकिस्तान को रिजवी के रूप में एक और कठमुल्ला मिल गया है। पाकिस्तानी सेना जिस तरह से रिजवी पर एक्शन लेने से बचती रही, उससे साफ है कि उसे सेना से खाद-पानी मिलता रहेगा। सेना मौलाना अजहर महमूद और हाफिज सईद पर भी हाथ नहीं डालती।

जैश और आईएसआई

कौन नहीं जानता कि मौलाना अजहर और उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद को पाक सेना के इशारों पर काम करने वाली खुफिया एजेंसी आईएसआई से मदद मिलती है? जैश भारत का जानी दुशमन रहा है। जैश सरीखे संगठनों को हमारे पंजाब में आतंकवाद के दौर के बचे हुए गुटों को फिर से खड़ा करने का जिम्मा सौपा गया है। आईएसआई की ख्वाहिश है कि जैश के आतंकी गुरदासपुर-पठानकोट-जम्मू सेक्टर में अपना खूनी खेल बढ़ाएं।

दरअसल आईएसआई आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते जैश को नए हथियार के रुप में फिर से खड़ा कर रहा है। जैश-ए-मोहम्मद लश्कर-ए-तैयबा से ज्यादा खतरनाक और जिद्दी संगठन है। आईएसआई की ओर से जैश में नयी जान फूंकना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए नयी चुनौती होगा। इसका एकमात्र मकसद भारत को हर लिहाज से नुकसान पहुंचाना है। कभी-कभी लगता है कि पाकिस्तान में कठमुल्ला खुले तौर पर भारत का विरोध करते हैं, जबकि सेना नेपथ्य में रहकर।

आइएसआइएस (सांकेतिक चित्र)

भारत विरोधी कट्टरपंथी मुल्ले

ये सभी कट्टरपंथी मुल्ले पंजाबी मूल के हैं। हालांकि अभी तक रिजवी की तरफ से कोई भारत विरोधी बयान तो नहीं आया है, पर वो भारत का मित्र नहीं हो सकता। पाकिस्तान में भारत के मित्रों के लिए स्पेस खत्म हो चुका है। पाकिस्तान में निर्वाचित सरकार पर कट्टरपंथी मुल्लों और सेना का दबाव अपने आप में गंभीर मसला है। इससे वहां अस्थिरता और बढ़ेगी। ये स्थिति भारत के लिए सुखद नहीं है। आपके पड़ोस में अराजकता का होना सही नहीं माना जा सकता। इससे आप भी परेशान ही रहेंगे। भारत का ये दुर्भाग्य ही है कि पाकिस्तान जैसा धूर्त देश हमारा पड़ोसी है। इससे तमाम मोर्चो पर डील करना अपने आप में चुनौती तो है ही।

अयूब से शरीफ

दुर्भाग्यवश कठमुल्लों के साथ-साथ सरहद पार जनरल अयूब खान से लेकर जनरल राहील शरीफ तक सभी के सभी घोर भारत विरोधी रहे हैं। पाकिस्तान की सेना में पंजाबियों का वर्चस्व साफ है। उसमें 80 फीसद से ज्यादा पंजाबी हैं। ये  भारत से नफरत करते हैं। इस भावना के मूल में पंजाब में देश के विभाजन के समय हुए खून-खराबे को देखा जा सकता है। पाकिस्तान का पंजाब इस्लामिक कट्टरपंथ की प्रयोगशाला है। वहां पर हर इंसान अपने को दूसरे से बड़ा कट्टर मुसलमान साबित करने की होड़ में लगा रहता है। पंजाब के अलावा पाकिस्तान के बाकी भागों में भारत विरोधी माहौल इतना मुखर नहीं है।

पाकिस्तानी सेना ने साल 69-71 में अपने ही मुल्क के बंगाली भाषी लोगों पर जुल्म ढाहना शुरू किया। इस कार्रवाई को पाकिस्तानी सेना ने आपरेशन सर्च लाइट का नाम दिया। यह जुल्म ऐसा-वैसा नहीं था। लाखों लोगों की बेरहमी से हत्या, हजारों युवतियों से सरेआम बलात्कार, तरह-तरह की अमानवीय यातनाएं। पाकिस्तानी सेना के दमन में मारे जाने वालों की तादाद 30 लाख थी। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी फौजी दरिंदों ने दो लाख महिलाओं से बलात्कार किया था। बहरहाल, मानकर चलिए कि रिजवी के बढ़ते असर और ताकत से भारत सरकार अनभिज्ञ नहीं होगी। वो कब भारत विरोधी तकरीरें शुरू कर दे इस संबंध में कोई पुख्ता तरीके से नहीं कह सकता। लेकिन इतना तय है कि अपने कट्टरपंथी रवैये से वो पाकिस्तान को स्वाहा तो कर ही देगा।

(लेखक यूएई दूतावास में सूचनाधिकारी रहे हैं। वरिष्ठ स्तंभकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)