महंगाई दर में कमी आने से कर्ज सस्ता होने के आसार

बाढ़ से निजात मिलने के बाद खुदरा महँगाई में और भी कमी आने की संभावना है। साथ ही, आगामी महीनों में वैश्विक स्तर पर कारोबारी तनाव खत्म होने के भी आसार हैं। ऐसे सकारात्मक माहौल में आगामी मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जिससे निश्चित तौर पर कर्ज सस्ते होंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी साथ ही साथ विकास दर में भी इजाफा होगा।

प्रमुखतः ईंधन की कीमत में गिरावट की वजह से जुलाई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) दर कम होकर 3.15 प्रतिशत हो गई, जो जून महीने में 3.18 प्रतिशत थी। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को पहले से अंदाजा था कि सीपीआई या खुदरा महँगाई दर में कमी आयेगी। इसीलिए, केंद्रीय बैंक ने हालिया मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में कटौती की। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में भी सीपीआई निचले स्तर पर बनी रहेगी। हालाँकि, सीपीआई इस अवधि में 2.25 प्रतिशत से बढ़कर 2.36 प्रतिशत हुई है, लेकिन समग्र रूप से सीपीआई में गिरावट दर्ज की गई है। 

सब्जियों की महंगाई दर 4.66 प्रतिशत से कम हो कर 3.82 प्रतिशत रह गई है। अंडे की कीमत 1.62 प्रतिशत से घटकर 0.57 प्रतिशत हो गई है। मांसाहारी खाद्य पदार्थों जैसे, मांस और मछली की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 9.01 प्रतिशत से बढ़कर 9.05 प्रतिशत हो गई है। कुछ राज्यों में आई बाढ़ के कारण सब्जियों की कीमत बढ़ी हुई है। हालाँकि, यह तात्कालिक कारण है, जो आगामी महीनों में दूर हो सकता है।   

खाद्य महंगाई दर में कमी (सांकेतिक चित्र_

जुलाई महीने में ईंधन की कीमत जून महीने के 2.32 प्रतिशत से कम होकर 0.36 प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य महंगाई में हाल के समय में कमी आई है। यह जुलाई महीने में 8.22 प्रतिशत से कम होकर 7.88 प्रतिशत हो गई है। शिक्षा महंगाई भी 6.79 प्रतिशत से कम होकर 6.36 प्रतिशत हो गई है। हालाँकि, मकान का किराया 4.84 प्रतिशत से बढ़कर 4.87 प्रतिशत हो गया है। 

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) भी जुलाई महीने में 25 माह के निचले स्तर 1.08 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो जून महीने में 2.02 प्रतिशत थी। थोक महँगाई कम होने की एक वजह सूचकांक में शामिल वस्तुएं भी हैं। सीपीआई में खाद्य वस्तुएं अहम भूमिका निभाती हैं, जिनका अधिभार 45 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि डब्ल्यूपीआई में इनका अधिभार 15 प्रतिशत है। विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई में कम होकर 0.34 प्रतिशत रह गई, जो जून के महीने में 0.94 प्रतिशत थी। 

खाद्य पदार्थों की महंगाई दर  जुलाई में कम होकर 6.15 प्रतिशत रह गई है, जो जून महीने में 6.98 प्रतिशत थी। सब्जियों की महंगाई दर 24.76 प्रतिशत से कम होकर 10.67 प्रतिशत हो गई है। ईंधन और बिजली की कीमत में गिरावट का प्रतिशत 2.2 से बढ़कर 3.64 हो गया है। पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 

वैश्विक वृद्धि के सुस्त रहने और अमेरिका और चीन के बीच चल रहे कारोबारी जंग के नहीं थमने से विश्व के देशों में कारोबारी जोखिम बने हुए हैं। इस वजह से विविध उत्पादों की कीमतें स्थिर हैं। प्राथमिक वस्तुएं, जैसे ईंधन और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अन्य संबंधित वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई 2019 में गिरकर 33 महीने के निचले स्तर 0.2 प्रतिशत पर आ गई है। 

कहा जा सकता है कि सीपीआई और डब्ल्यूपीआई में आई गिरावट की वजह से केंद्रीय बैंक को अक्तूबर महीने में होने वाली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर में कटौती करने की गुंजाइश मिल सकती है। रिजर्व बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भी महँगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी रहेगी। 

इधर, बाढ़ से निजात मिलने के बाद खुदरा महँगाई में और भी कमी आने की संभावना है। साथ ही, आगामी महीनों में वैश्विक स्तर पर कारोबारी तनाव खत्म होने के भी आसार हैं। ऐसे सकारात्मक माहौल में आगामी मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जिससे निश्चित तौर पर कर्ज सस्ते होंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी साथ ही साथ विकास दर में भी इजाफा होगा।