टैक्स की प्रक्रिया सरल और व्यापार की गति तेज, यही है जीएसटी का मूल: भूपेन्द्र यादव

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। केंद्र की मोदी सरकार के लिहाज से यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सत्र में कई लम्बित विधेयकों पर न सिर्फ चर्चा हुई है, बल्कि उन विधेयकों को कानूनी जामा पहनाने की दिशा में सरकार को सफलता भी मिली है। जीएसटी से जुड़ा 122वां संशोधन हो या कैम्पा बिल अथवा कई अन्य मसाले, सभी पर सरकार दोनों सदनों में सफलता पूर्वक आगे की तरफ बढ़ी है। जीएसटी एवं कैम्पा बिल आदि के प्रभावों एवं सरकार द्वारा जनहित में उठाये गये क़दमों पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सांसद भूपेंद्र यादव से नेशनलिस्ट ऑनलाइन डॉट कॉम के एडिटर की हुई बातचीत के कुछ अंश:

सवाल: भूपेन्द्र जी, संसद का मानसून सत्र चल रहा है। इस सत्र में सरकार की अभी तक क्या-क्या उपलब्धियां रही हैं ?

भूपेन्द्र यादव: मुझे लगता है कि मानसून सत्र की सबसे बड़ी जो उपलब्धि है, वह जीएसटी के संवैधानिक संशोधन का पारित होना है। यह संशोधन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस पर देश में बहुत लंबे समय से चर्चा चल रही थी। चर्चा यह थी कि करों में रिफ़ॉर्म लाने की जरूरत है। इसके आने के बाद हम तीन तरह के विषयों को संशोधित कर पाएंगे। पहला, हमारे ऊपर टैक्स का जो जाल बुना हुआ था, उससे निजात मिलेगी। दूसरा सुधार यह होगा कि देश के 29 राज्यों में बाजार को लेकर जो विविधता है, उसे एकरूपता प्रदान की जा सकेगी। तीसरा और महत्वपूर्ण सुधार यह है कि निर्बाध रूप से जो मुक्त व्यापार पूरे देश में होना चाहिए, उसकी गति को बढ़ावा मिलेगा। प्रावधानों के अमल में आने के बाद टैक्स पर टैक्स से निजात तो मिलेगी ही, राज्य और केंद्र एक टीम के रूप में काम भी कर सकेंगे।

सवाल: मुक्त बजार की जो बात अभी आप कर रहे हैं, तो क्या यह माना जाय कि जीएसटी आने के बाद भारत में मुक्त बाजार की संभावनाएं बढ़ेगी ?

भूपेन्द्र यादव: मुक्त बाजार की संभावनाओं की धारणा क्या है, पहले उसको समझिये। मुक्त बाजार का तात्पर्य ये है कि जो आम आदमी की खाद्यान की वस्तुएं हैं, वे उनको सहजता से उपलब्ध हो सकें। इन वस्तुओं के लिए उसे अतिरिक्त टैक्स का बोझ न झेलना पड़े। दूसरी बात ये कि व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता आये। तीसरा उद्देश्य यह है कि व्यवस्थागत टैक्स इकठ्ठा करने की सरकार की प्रणाली में और शासन व्यवस्था को लागू करने के मामले में, संधिकरण की प्रक्रिया हो।

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सवाल: कई लोग ऐसा मानते हैं कि जीएसटी आने के बाद शुरूआती दौर में महंगाई बढ़ेगी। इसको लेकर आपकी क्या राय है ?

भूपेन्द्र यादव: ये विशेषज्ञों की बात है। मैं जीएसटी के सलेक्ट कमेटी का चेयरमैन था। उस कमेटी में हमने पूछा भी था कि दुनिया के अन्य देशों से क्या इस मामले में भारत की तुलना हो सकती है! इसका एक उत्तर यह भी आया था कि भारत की एक अपनी भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिस्थिति है, जो अलग है। किसी भी राज्य में अगर कोई वस्तु है, जिसको वहां का उपभोक्ता लेता है तो यह सब वहां की भौगोलिक स्थिति, वहां की सांस्कृतिक-सामाजिक परिस्थिति और वस्तु व्यापार की मांग की आवश्यकता आदि पर निर्भर करता है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में जो टैक्स लगता है, अगर एक बार उसकी चोरी रुक जाएगी और व्यवस्था में सरलता आ जाएगी तो मुझे लगता है कि परिणाम भी सकारात्मक होंगे।

सवाल: जीएसटी को लेकर एक और बात चर्चा में आती है और कई लोग ऐसा मानते हैं कि जीएसटी आने से सरकार पर भी बोझ बढ़ सकता है। आपका क्या नजरिया है इसपर ?

भूपेन्द्र यादव: ऐसा नहीं है। इस दिशा केन्द्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। जीएसटी आने के बाद जो राज्यों की आशंकाएं थी कि उनके ऊपर पड़ने वाले बोझ की भारपाई कौन करेगा ? इस समस्या को समझते हुए जीएसटी कानून के तहत पांच वर्ष तक की भरपाई का दायित्व खुद केन्द्र सरकार ने लिया है। इस संबंध में दूसरी आशंका यह थी कि जो निर्णय लिए जाएंगे उसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या होगी? इस संबंध में जीएसटी काउंसिल का जो फार्मेशन बना है, उसके तहत एक-तिहाई केन्द्र का और दो-तिहाई राज्यों का मिलाकर मतदान देने की प्रक्रिया में तीन-चौथाई के बहुमत का प्रावधान है। एक तरीके से व्यापक परामर्श की राज्यों की जो प्रक्रिया है, उसको केन्द्र ने पूरा किया है। हमारे यहां पर सीएसटी और वैट जो लंबे समय से चल रहा है। कुल मिलाकर सेल टेक्स और सर्विस टैक्स को मर्ज करके ये जो एक प्रावधान किया है, इससे व्यवस्था में बदलाव आएगा।

सवाल: आम जनता के शब्दों में जीएसटी को कैसे देखा और समझा जाय ?

भूपेन्द्र यादव: आम जनता के शब्दों में अगर सुनना चाहें तो अब जो टैक्स के तमाम बैरियर हैं, वो समाप्त हो जायेंगे। अगर एक लाइन में कहें तो टैक्स की प्रक्रिया कम और व्यापार की गति ज्यादा, यही है जीएसटी का मूल।

सवाल: राज्य सभा में आप कैंपा बिल सहित अन्य मसलों पर अपनी बात रखे हैं। कुछ और भी महत्वपूर्ण विधेयक हैं, जिनपर सरकार इस सत्र में कदम बढ़ा चुकी है। इस विषय में आपका क्या कहना है?

भूपेन्द्र यादव: पर्यावरण का विषय जहां तक है, उसको लेकर सरकार गम्भीर है। हमारे कुछ पर्यावरणीय क्षेत्र हैं, जहां स्थायी रूप से नुकसान हो रहा है, उसको बनाए रखने के लिए और जलवायु संतुलन के लिए एक कैंपा फंड की व्यवस्था की गयी है। इस विधेयक से इन क्षेत्रों को 42 हजार करोड़ रुपए उपलब्ध होंगे और वन क्षेत्र के लोग भी लाभान्वित होंगे। चाहें स्थानीय समुदाय की सहभागिता की बात हो अथवा विकास की बात हो या हमारे इको बैलेंसिंग का विषय हो, इन सबके लिए बिल सरकार के द्वारा पास किया गया है। देश में नए आईआईटी के लिए भी सरकार के द्वारा बिल पास किया गया है। बैंकिग व्यवस्था के क्षेत्र मे जो सरकार के आने के बाद स्पष्ट हुआ कि एनपीए की समस्या से हम लोग जूझ रहे थे, उसके समाधान के लिए जरूरी बिल को भी इस सत्र के अतंर्गत पास कराया गया है।

सवाल: आपका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है, इस सरकार का उद्देश्य आम जनता के हित में काम करना है। लेकिन एक बड़ा सवाल अक्सर यह भी उठता है कि ढाई साल हो गए इस सरकार को आए,  लेकिन आखिर  क्या है कि महंगाई अभी भी पकड़ से बाहर है ?

भूपेन्द्र यादव: महंगाई का इंडेक्स इतना नहीं बढ़ा है। जहाँ तक दाल का विषय है तो सरकार के द्वारा इस बात को स्पष्ट कर दिया गया है कि जितनी हमारी मांग है, उसकी तुलना में आपूर्ति कम है। अभी दाल के स्थायी मांग को बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री जी ने अपने दौरे में मोजांबिक के साथ समझौता किया है। स्थायी रूप से पहली बार ऐसा हुआ है कि दाल की फसलों को किसान ज्यादा बोयें, इसके लिए समर्थन मूल्य सरकार ने घोषित किया है, जो अभूतपूर्व है।

सवाल: इसके अलावा भी आप लगातार कुछ मुद्दों को उठाते रहे हैं, कई अन्य मुद्दों पर काम करते रहे हैं। ऐसे कौन से और मुद्दे  हैं? जिनपर भविष्य में काम होना है, या फिर जल्दी ही हो जाना  चाहिए ?

भूपेन्द्र यादव: अभी सरकार के द्वारा व्हीसल ब्लोवर बिल संसद के पटल पर लाया गया है। एक बहुत बड़ा विषय है मेंटल हेल्थ केयर का जिसका एक बिल लंबे समय से पेंडिग है। अभी स्टैंडिंग कमेटी की रिर्पोट आनी बाकी है। यह भी एक ऐसा बड़ा मुद्दा है जो अभी पेडिंग है। उस पर सरकार बड़ी तीव्र गति से काम करना चाहती है और इस दिशा में प्रयासरत भी है। ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जिनसे भविष्य के सुधारात्मक कदमों को बल मिलेगा।

सवाल: पार्टी की तरफ से अक्सर कहा जाता है कि विपक्ष ने अच्छे से सहयोग दिया होता तो तमाम कार्य बहुत पहले हो जाते। अब जाकर विपक्ष ने कुछ सहयोग  किया है। क्या लगता है, क्या कारण है कि विपक्ष कार्यों में अवरोध उत्पन्न करता है?

भूपेन्द्र यादव: मुझे लगता है कि सकारात्मकता के साथ चलना चाहिए। जब अपनी भूमिका में प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहे हैं तब सबको सहमति के साथ मिलकर ये सोचना चाहिए कि देश आगे कैसे बढ़े, यह हमारी सरकार और प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र भाई मोदी की सोच है।