अगर सेना के साथ सरकार को भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का श्रेय मिल रहा तो इसमें गलत क्या है ?

गत महीने श्रीनगर के उड़ी में पाक-प्रेरित आतंकी हमला हुआ और हमारे १८ जवान शहीद हो गए। इसके बाद देश में आक्रोश का माहौल पनपा। प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बदला लिया जाएगा। फिर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चलता रहा। दस दिन गुजर गए। कुछ नहीं हुआ। सरकार पर सवाल उठाए जाने लगे। मोदी विरोधियों द्वारा छप्पन इंच की छाती के बयान का मज़ाक बनाया जाने लगा। चुनाव प्रचार के समय के मोदी के बयानों पर चुटकी ली जाने लगी।

हालांकि सरकार की तरफ से इस सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर अपनी पीठ थपथपाने जैसा कोई बयान नहीं दिया गया, लेकिन यह देश अंधा या मूर्ख तो है नहीं जो इतना न समझ सके कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के होने में हमारे बहादुर जवानों का सर्वाधिक योगदान है, तो सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और योजनाबद्ध विदेशनीति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी सेना तो हमेशा ही ऐसी कार्रवाई करने में सक्षम रही है, लेकिन पहले की सरकारों, खासकर पिछली दस साल की संप्रग सरकार के दौरान  इसके लिए राजनीतिक इच्छशक्ति बिलकुल ही नहीं थी, इसी कारण पाकिस्तान द्वारा २६/११ जैसा देश पर सबसे बड़ा आतंकी हमला करने के बाद भी हमारे जवान पाकिस्तान को कोई कठोर उत्तर नहीं दे सके थे।

इन्हीं सब के बीच अचानक ३० तारीख को भारतीय सेना के डीजीएमओ ने यह प्रेस कांफ्रेंस की कि भारतीय सेना ने पाक सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया है। सात-आठ आतंकी कैम्प नष्ट हुए हैं और काफी संख्या में आतंकी मारे भी गए हैं। इस चीज के बाद अंध मोदी विरोधियों का मुंह बंद हो गया। विपक्ष बेमन से ही सही, सरकार के साथ खड़ा होने को मजबूर हो गया। पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय सपोर्ट भी नहीं मिला। वो अलग-थलग पड़ गया। कुल मिलाकर हर तरह से मोदी सरकार की जय-जयकार का माहौल देश में बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों की शहादत का ‘बदला लेने’ का जो वादा देश से किया था, उसे उन्होंने शब्दशः निभाया।

Kozhikode: Prime Minister Narendra Modi before flag hoisting of BJP National Council meeting in Kozhikode, Kerala on Sunday. PTI Photo (PTI9_25_2016_000080B)
सेना के साथ सरकार को भी मिलना चाहिए सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय

हालांकि सरकार की तरफ से इस सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर अपनी पीठ थपथपाने जैसा कोई बयान नहीं दिया गया, लेकिन यह देश अंधा या मूर्ख तो है नहीं जो इतना न समझ सके कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के होने में हमारे बहादुर जवानों का सर्वाधिक योगदान है, तो सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और योजनाबद्ध विदेशनीति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी सेना तो हमेशा ही ऐसी कार्रवाई करने में सक्षम रही है, लेकिन पहले की सरकारों, खासकर पिछली दस साल की संप्रग सरकार के दौरान  इसके लिए राजनीतिक इच्छशक्ति बिलकुल ही नहीं थी, इसीलिए पाकिस्तान द्वारा २६/११ जैसा देश पर सबसे बड़ा आतंकी हमला करने के बाद भी हमारी सेना कोई कठोर कार्रवाई नहीं कर सकी थी। इसके अतिरिक्त पाक प्रेरित आतंकियों द्वारा दस जवानों का सिर काटकर ले जाने के बाद भी हमारे जवान बदला लेने के लिए सरकार का मुंह देखते रह गए, पर कमजोर संप्रग सरकार सिर्फ कड़ी निंदा करके रह गई थी। देश इन सब बातों को देखा है और आज जो हो रहा, उसे भी देख रहा है। इसलिए पान के खोखे पर मौजूद लोगों और ऑटो वालों से लेकर देश के बड़े-बड़े नामचीन लोग तक, हर कोई अगर इस सर्जिकल स्ट्राइक का पहला श्रेय सेना को दे रहा है तो उसके बाद सरकार की भी प्रशंसा करने से स्वयं को रोक नहीं पा रहा। सरकार इस सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय नहीं ले रही, मगर यह देश मुट्ठी भर अंध विरोधियों की तरह कपटी और अन्यायी थोड़े है, जो सरकार को इसके श्रेय से वंचित करे।

अब वे अंध विरोधी यह शिगूफा उछाले हैं कि यह राजनीतिक लाभ लेने के लिए की गई कार्रवाई है और सेना का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। यही लोग इस कार्रवाई से पहले सरकार को कायर, अबतक की सबसे कमजोर सरकार जैसे विशेषणों से नवाजने में नहीं हिचक रहे थे। लेकिन, अगर एकबार के लिए इनकी बात को मान लें कि हाँ, केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों में इस सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक लाभ मिलेगा, तो भी सवाल यह उठता है कि इसमें गलत क्या है ? अच्छे काम करने का अगर किसी सत्ताधारी दल को लाभ मिलता है तो ये तो वास्तव में लोकतंत्र की जीत है। तंत्र ने लोक की भावना का सम्मान करते हुए जवानों की शहादतों का प्रतिशोध लेने की मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई, अब लोक अगर तंत्र को इसका श्रेय देता है और इसके लिए पुरस्कृत करता है तो इसमें गलत क्या हो गया ? यह तो सच्चा लोकतंत्र है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)