पीयूष द्विवेदी

पीएम-श्री योजना : स्कूली शिक्षा में सुधार की पहल

पीएम-श्री योजना के तहत विकसित स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा निर्धारित कसौटियों के अनुरूप स्वयं को एक उदाहरण की तरह प्रस्तुत करते हुए अपने आसपास के स्कूलों को भी अपनी व्यवस्थाएं सुधारने के लिए प्रेरित करेंगे।

आदि से अंत तक प्रकृति-प्रेम की भावना से पुष्ट लोकपर्व है छठ

भारत पर्वों का देश है। यहाँ एक पर्व बीतता नहीं कि अगला हाजिर हो जाता है। भारतीय पर्वों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे किसी न किसी आस्था से प्रेरित होते हैं। अधिकाधिक पर्व अपने साथ किसी न किसी व्रत अथवा पूजा का संयोजन किए हुए हैं। ऐसे ही पर्वों की कड़ी में पूर्वी भारत में सुप्रसिद्ध छठ पूजा का नाम भी प्रमुख रूप से आता है।

उत्तर प्रदेश : सुशासन की स्थापना में सफल सिद्ध होता योगी मॉडल

मुख्यमंत्री योगी के शासन में यूपी कानून-व्यवस्था और विकास के मानदंडों को मजबूती से थामकर सुशासन की परिकल्पना को सिद्ध करते हुए सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।

ई-शासन से सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करती मोदी सरकार

देश में ई-शासन को मजबूती से स्थापित करने के लिए मोदी सरकार कमर कसके जुटी हुई है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं।

वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होते मोदी

राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे मोदी के कार्यों को तो दुनिया देख-परख रही ही है, बीते आठ सालों में विश्व पटल पर भी मोदी का नेतृत्व-कौशल उभरकर सामने आया है।

अपनी जड़ों से जुड़कर मानसिक दासता से मुक्त होगा भारत!

भारत अपनी जड़ों से जितना अधिक जुड़ेगा, उतना ही उसमें आत्मगौरव और आत्मविश्वास की भावना का विकास होगा तथा मानसिक दासता से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

भाषाई मर्यादा से बेपरवाह विपक्ष

पहले भी राजनीति में पक्ष-विपक्ष के बीच आरोपों के दौर चलते थे, लेकिन भाषाई गरिमा का लोप नहीं होता था। नेता तंज़ करते थे, मगर किसीकी तौहीन नहीं की जाती थी।

चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करता भारत

कुल मिलाकर कहने का आशय है कि भारत अब अपनी पूरी क्षमता के साथ चौथी औद्योगिक क्रांति के कारवां को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

मोदी सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं से कम हो रही गरीबी

सरकार के प्रयासों से देश में गरीबी के स्तर में कमी आई है। मोदी सरकार के शासन में गरीबी हटाओ कोई हवा-हवाई नारा नहीं, बल्कि जमीन पर साकार हो रही हकीकत है।

राष्ट्रीय नेता बनने का मोह छोड़ बंगाल की कानून व्यवस्था पर ध्यान दें ममता बनर्जी!

बंगाल का शासन ही ममता बनर्जी के राजनीतिक कद के निर्धारण की एकमात्र कसौटी है, जिसपर फिलहाल तो वे बुरी तरह से विफल नजर आ रही हैं।