पीयूष द्विवेदी

भाषाई मर्यादा से बेपरवाह विपक्ष

पहले भी राजनीति में पक्ष-विपक्ष के बीच आरोपों के दौर चलते थे, लेकिन भाषाई गरिमा का लोप नहीं होता था। नेता तंज़ करते थे, मगर किसीकी तौहीन नहीं की जाती थी।

चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करता भारत

कुल मिलाकर कहने का आशय है कि भारत अब अपनी पूरी क्षमता के साथ चौथी औद्योगिक क्रांति के कारवां को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

मोदी सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं से कम हो रही गरीबी

सरकार के प्रयासों से देश में गरीबी के स्तर में कमी आई है। मोदी सरकार के शासन में गरीबी हटाओ कोई हवा-हवाई नारा नहीं, बल्कि जमीन पर साकार हो रही हकीकत है।

राष्ट्रीय नेता बनने का मोह छोड़ बंगाल की कानून व्यवस्था पर ध्यान दें ममता बनर्जी!

बंगाल का शासन ही ममता बनर्जी के राजनीतिक कद के निर्धारण की एकमात्र कसौटी है, जिसपर फिलहाल तो वे बुरी तरह से विफल नजर आ रही हैं।

मोदी सरकार ने किया पद्म सम्मानों का लोकतांत्रिकरण

पद्म सम्मान तो बीते साढ़े छः दशकों से दिए जा रहे हैं, लेकिन जनसामान्य के बीच से अचर्चित नायक-नायिकाओं को इस तरह सम्मानित करने का काम इतने व्यापक रूप से पहले नहीं हुआ।

आदि से अंत तक प्रकृति-प्रेम की भावना से पुष्ट लोकपर्व है छठ

भारत पर्वों का देश है। यहाँ एक पर्व बीतता नहीं कि अगला हाजिर हो जाता है। भारतीय पर्वों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे किसी न किसी आस्था से प्रेरित होते हैं। अधिकाधिक पर्व अपने साथ किसी न किसी व्रत अथवा पूजा का संयोजन किए हुए हैं। ऐसे ही पर्वों की कड़ी में पूर्वी भारत में सुप्रसिद्ध छठ पूजा का नाम भी प्रमुख रूप से आता है।

अनुच्छेद-370 हटने के बाद बदलाव की राह पर बढ़ रहा जम्मू-कश्मीर

बदलाव यह भी हुआ है कि अब जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा लहराने लगा है। भारतीय पर्वों को भी उल्लास के साथ खुलकर मनाया जाने लगा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ से खुलेगी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली तथा उसके आगे के त्योहारों के लिए लोगों से स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करके ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

भारत के विकास को रफ्तार देगी गति शक्ति योजना

मोदी सरकार के शासन में देश बदलाव की राह पर चल पड़ा है और गति शक्ति योजना उस बदलाव की ही एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो नए भारत के विकास की तस्वीर गढ़ने वाली होगी।

हिंदी दिवस विशेष : भारत की सांस्कृतिक विविधता की सच्ची प्रतिनिधि है हिंदी

किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान का आधार उसकी भाषा में सन्निहित होता है। वस्तुतः भाषा ही वो प्राणतत्व होती है, जो किसी संस्कृति को काल के निर्बाध प्रवाह में भी सतत जीवंत और गतिशील रखती है।