पीयूष द्विवेदी

मोदी सरकार ने किया पद्म सम्मानों का लोकतांत्रिकरण

पद्म सम्मान तो बीते साढ़े छः दशकों से दिए जा रहे हैं, लेकिन जनसामान्य के बीच से अचर्चित नायक-नायिकाओं को इस तरह सम्मानित करने का काम इतने व्यापक रूप से पहले नहीं हुआ।

आदि से अंत तक प्रकृति-प्रेम की भावना से पुष्ट लोकपर्व है छठ

भारत पर्वों का देश है। यहाँ एक पर्व बीतता नहीं कि अगला हाजिर हो जाता है। भारतीय पर्वों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे किसी न किसी आस्था से प्रेरित होते हैं। अधिकाधिक पर्व अपने साथ किसी न किसी व्रत अथवा पूजा का संयोजन किए हुए हैं। ऐसे ही पर्वों की कड़ी में पूर्वी भारत में सुप्रसिद्ध छठ पूजा का नाम भी प्रमुख रूप से आता है।

अनुच्छेद-370 हटने के बाद बदलाव की राह पर बढ़ रहा जम्मू-कश्मीर

बदलाव यह भी हुआ है कि अब जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा लहराने लगा है। भारतीय पर्वों को भी उल्लास के साथ खुलकर मनाया जाने लगा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ से खुलेगी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली तथा उसके आगे के त्योहारों के लिए लोगों से स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करके ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

भारत के विकास को रफ्तार देगी गति शक्ति योजना

मोदी सरकार के शासन में देश बदलाव की राह पर चल पड़ा है और गति शक्ति योजना उस बदलाव की ही एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो नए भारत के विकास की तस्वीर गढ़ने वाली होगी।

हिंदी दिवस विशेष : भारत की सांस्कृतिक विविधता की सच्ची प्रतिनिधि है हिंदी

किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान का आधार उसकी भाषा में सन्निहित होता है। वस्तुतः भाषा ही वो प्राणतत्व होती है, जो किसी संस्कृति को काल के निर्बाध प्रवाह में भी सतत जीवंत और गतिशील रखती है।

ई-रुपी : ई-गवर्नेंस को मजबूती देने वाला कदम

ई-रुपी की सबसे ख़ास बात इसका ‘पर्सन और पर्पज बेस्ड’ होना है। यानी कि इसे जिस व्यक्ति और जिस काम के लिए जारी किया जाएगा उस व्यक्ति द्वारा उसी काम में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मॉनसून सत्र : व्यर्थ हंगामा करके संसद को बाधित करने की संकीर्ण राजनीति से बाज आए विपक्ष

मॉनसून सत्र को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो जब विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित न करनी पड़ी हो।

राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश

मोहन भागवत ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को लेकर जो कुछ कहा है, उसका उद्देश्य चुनावी राजनीति के संकीर्ण दायरे से कहीं बड़ा और व्यापक है। यह राष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान है।

कोरोना संकट के दौर में और निखरकर सामने आया प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व

आजाद भारत के इतिहास की इस सबसे बड़ी आपदा में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए रखा, जिस सक्रियता से निर्णय लिए और जिस दूरदर्शितापूर्ण कार्यशैली का परिचय दिया उसने न केवल देश के हालातों को संभाला बल्कि आगे की राह दिखाते हुए निराश हो रही जनता में आशा का संचार भी किया।