काउंटर फैक्ट

वैचारिक दिवालियेपन का शिकार हो गयी है आम आदमी पार्टी

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को सत्ता में आए लगभग डेढ़ वर्ष का समय हुआ है, इस दौरान यह सरकार अपने जनहित के अपने सकारात्मक कामों के लिए कम, फिजूल के हंगामों के लिए बहुत अधिक चर्चा में रही है। कभी दिल्ली पुलिस की मांग के जरिये तो कभी राज्यपाल नजीब जंग से बिना बात जंग छेड़कर यह पार्टी बवाल करती रही है। आजकल यह अपने विधायकों की गिरफ्तारी को लेकर धरती-आकाश एक किए हुए है।

संविधान का उल्लंघन केजरीवाल की रणनीति का हिस्सा है

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के नेता खुद को संविधान से उपर समझने लगे। वे हर उस संवौधानिक प्रक्रिया को तुच्छ समझने लगे जिसका समर्थन भारतीय संविधान करता है। केजरीवाल ने संविधान के इतर जाकर ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी जिसको बाद में माननीय न्यायलय द्वारा असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। इस वाकया से सबक लेने और संवैधानिक प्रक्रियाओं का एक फिर से उल्लंघन किया और दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए जनमत संग्रह कराने का राग अलापने लगे।

भाजपा विरोधियों के दोहरे चरित्र से उठने लगा पर्दा, बेनकाब होने लगे चेहरे

साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सत्ता में आयी तभी से विपक्षी दल, सुनियोजित गैंग की तरह काम करने वाले मीडिया घरानों और कुछ एनजीअे तंत्र द्वारा पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया गया जैसे की भाजपा सरकार बनने से देश में तानाशाही लागू हो गयी हो।

मायावती ‘देवी’ हैं तो क्या उनके भक्त खुलेआम महिलाओं को गाली देंगे ?

यह भारतीय राजनीति का गिरता स्तर ही है कि गाली के प्रतिकार में गाली दी जा रही है। दरअसल, पिछले सप्ताह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया। जाहिर है कि दयाशंकर सिंह ने मायावती के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था जो किसी भी महिला के लिए अपमानजनक था।

शाह फैजल के किन्तु-परन्तु में भारत और कश्मीर कहां है?

2009 के आईएएस टॉपर शाह फैजल के दर्द भरे लेख को पढ़ लेने वाले देश के अधिकांश लोगों के मन में ये अहसास गहरा सकता है कि दरअसल भारत सरकार ने कश्मीर के साथ संवाद का गलत तरीका अपनाया है। शाह फैजल ने अपने लेख में लगातार बताया है कि गलत तरीके से हो रहे संवाद से कश्मीर लगातार भारत से दूर होता जा रहा है। शाह का लेख दरअसल एक कश्मीरी की भावनाओं को सामने लाता है। लेकिन, ये भावनाओं से ज्यादा उस डर को ज्यादा सामने लाता है, जिसमें कश्मीर के आतंकवाद, अलगाववाद के खिलाफ बोलने से हर कश्मीरी की जिंदगी जाने का खतरा है

कुर्सी से चिपकने की राजनीति में पीएचडी है केजरीवाल की पार्टी: अन्ना हजारे

भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में अन्ना हजारे के सहयोगी रहे अरविन्द केजरीवाल के संबध में सवाल पूछने पर अन्ना कहते हैं कि केजरीवाल ने राजनीति में जाकर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया। मैंने पहले ही कहा था कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए होगा, राजनीति के लिए नहीं। मैंने राजनीतिक दल बनाने के लिए अरविंद को रोका था।

गुलाम नबी को तो हीलिंग टच चाहिए, पर बाकी देश को क्या चाहिए?

अभिरंजन कुमार कश्मीर में गुलाम नबी आज़ाद हीलिंग टच की बात कर रहे थे। 70 साल से वहां हीलिंग टच ही हो रहा था। अगर किसी की फीलिंग में हीप्रॉब्लम हो, तो कब तक हीलिंग करें? हीलिंग करते-करते तो दो-दो पाकिस्तान बन गए। हमारा आधा कश्मीर फंसा हुआ है। बचे हुए आधे कश्मीर की भी समूची

फ्रांस वाला खतरा भारत पर भी मंडरा रहा है, सचेत होइए!

मैं आतंकवाद के मामले में स्वार्थी हूँ। मैं, नीस में ट्रक से कुचलने से हुयी मौतों पर, फ्रांस के साथ किसी भी शोक और श्रधांजलि में नही खड़ा हूँ। मैं आप सबसे यही कहूँगा की आप भी कोई शोक मत मनाइये, यह काम राजनैतिज्ञों और आदर्श लिबरल का है। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ? क्या मेरे अंदर का इंसान मर गया है या फिर मैं ही दानव हो गया हूँ?

काश्मीर: विलासितों के लोकतंत्र से बढ़ता आतंकवाद का खतरा

वर्तमान समय काश्मीर के सन्दर्भ में जो बुद्धिजीवी यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि काश्मीर में उत्पात मचा रहे अलगाववादी ताकतों से शांति और सद्भावना से शान्ति एवं सद्भावना की उम्मीद की जानी चाहिए, वह या तो झूठ बोलते है या फिर वह स्वयं किसी यूटोपिया में जी रहे हैं। अलगाववादी पत्थरबाजों से शान्ति की अपील इसलिए भी असंभव लगती है क्योंकि वे पिछले 69 सालो से शेष भारत से अलग और विशेष होने की विलासता में जीवन जी रहे हैं और उनको वैसे ही जीते रखने की कोशिश भी तथाकथित सेक्युलर सरकारों द्वारा की गयी है।

जाकिर नाइक के नाम खुला ख़त: पूछे गये 35 सवाल

इस्लाम और दुनिया के तमाम धर्मों के बारे में आपके ज्ञान को देखकर चकित हूं। लेकिन एक हज़ार मुद्दों पर जानकारी लेने में मेरी दिलचस्पी कम है। मैं तो बस जन्नत की हूरों के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहता हूं। आशा है, जैसे आप भारत से भाग गए हैं, वैसे मेरे इन पैंतीस सवालों से नही भागेंगे और जवाब देंगे।