अटल बिहारी वाजपेयी

किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में करीब 18 हजार करोड़ रुपए सीधे जमा किए गए। यह काम हर बार की तरह, इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

भारत को भारत की दृष्टि से देखने-समझने और समझाने वाले अनूठे राजनेता थे अटल जी

अटल जी सही मायनों में आधुनिक भारत के शिल्पी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में भारतवर्ष के विकास की आधारशिला रखी और आर्थिक उन्नति की सुदृढ़ नींव खड़ी की।

अटल सुरंग : विश्व की इस सबसे बड़ी सुरंग का महत्व भी बहुत बड़ा है

बीते रोज दुनिया की सबसे बड़ी ‘अटल सुरंग’ को प्रधानमंत्री मोदी ने देश को समर्पित कर दिया। इसका सपना अटल जी ने देखा था, इसलिए इसको उन्हीका नाम दिया गया है।

पत्रकारिता में शुचिता, नैतिकता और आदर्श के पक्षधर थे दीनदयाल उपाध्याय

दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय विचार की पत्रकारिता के पुरोधा अवश्य थे, लेकिन कभी भी संपादक या संवाददाता के रूप में उनका नाम प्रकाशित नहीं हुआ।

लाल जी टंडन : राजनीति में सक्रिय लोगों को उनकी वैचारिक निष्ठा प्रेरणा देती रहेगी

लाल जी टंडन जैसे नेता कम ही होते हैं। उनका जीवन राजनीति में वैचारिक निष्ठा के प्रति समर्पित लोगों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

जयंती विशेष : भारत की राष्ट्रीयता के प्राणतत्व को आत्मसात किए थे अटल जी

अटल बिहारी वाजपेयी इस देश की राष्ट्रीयता के प्राणतत्व को आत्मसात किए हुए थे। भारत क्या है, अगर इसे एक पंक्ति में समझना हो तो अटल बिहारी वाजपेयी का नाम ही काफी है। वे लगभग आधी शताब्दी तक हमारी संसदीय प्रणाली के अविभाज्य अंग रहे। अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व व कार्य-क्षमता से उन्होंने लोगों के हृदय पर राज किया।

जयंती विशेष : ‘भारत की राजनीति में ‘अटल’ सर्वथा अटल थे और अटल ही रहेंगे’

अपने 65 वर्षों के सक्रिय जीवन में 56 वर्ष वाजपेयी विपक्ष में रहे और नौ साल सत्ता में रहे। वे लोकसभा के लिए दस बार निर्वाचित हुए और राज्यसभा के लिए दो बार। वे मोरारजी देसाई मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री रहे और बाद में तीन बार प्रधानमंत्री बने। लेकिन चाहे वे विपक्ष में रहे हों या सत्ता में, अटलजी ने आजादी के बाद से ही देश के विकास में मौलिक

‘राजनीति के महानायक और देश के सर्वमान्य नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी’

अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन का अधिकांश समय विपक्ष में बिता। इस रूप में उन्होंने मर्यादा का नया अध्याय कायम किया। यह बताया कि सत्ता पक्ष का जोरदार विरोध भी मर्यादा की सीमा में रहते हुए किया जा सकता है। वह दो वर्ष विदेश मंत्री और छह वर्ष प्रधानमंत्री रहे। इस रूप में उन्होंने सत्ता को देशहित का माध्यम बनाया। विदेशमंत्री के रूप में मजबूत विदेश

अटल जी कोई शौकिया कवि नहीं थे, बल्कि कवित्व उनके स्वभाव में रचा-बसा था!

देश का बहत्तरवां स्वतंत्रता दिवस एक ऐसी तारीख के रूप में इतिहास में दर्ज हो चुका है, जिसके अगले ही दिन राजनीतिक जीवन में नैतिक निष्ठा और वैचारिक शालीनता के पर्याय, समावेशी राजनीति के अग्रदूत, जनप्रिय नेता, प्रखर वक्ता, काल के कपाल पर जीवन के गीत लिखने वाले मूर्धन्य कवि और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 93 वर्ष की अवस्था में मृत्यु

दशक भर से सार्वजनिक निष्क्रियता के बावजूद अटल जी का मुख्यधारा में बने रहना यूं ही नहीं था!

पूर्ण क्षमता, निष्ठा, ईमानदारी और मर्यादा के साथ दायित्व निर्वाह ही कर्म कौशल होता है। ‘योग: कर्म कौशलम’ इस अर्थ में अटल बिहारी वाजपेयी कर्म योगी थे। राजनीति में ऐसे कम लोग ही हुए हैं जो कुर्सी नहीं, कर्म से महान बने। अटल जी ऐसे ही लोगों में से एक थे।अटल जी पिछले दस वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थे। किसी विषय पर उनका कोई बयान नहीं आता था। इसके