कमलनाथ

सियासी मजबूरी में हिंदुत्व का चोला ओढ़ रही कांग्रेस

जो कांग्रेस अयोध्‍या स्‍थित राम जन्‍मभूमि स्‍थल को राम जन्‍मभूमि परिसर कहने से संकोच करती थी, वही कांग्रेस आज खुलकर राम मंदिर के पक्ष में खड़ी दिख रही है।

आंतरिक कलह के लिए भाजपा पर उंगली उठाकर अपनी कमियां छिपाना चाहती है कांग्रेस

कांग्रेस अपने इस आंतरिक संकट का ठीकरा भाजपा पर फोड़ रही है, जबकि इसके लिए वो खुद जिम्मेदार है। परन्तु आत्मचिंतन करने को तैयार नहीं।

राजीव गांधी फाउंडेशन प्रकरण : क्या चंदे के लिए कांग्रेस ने देश के हितों की बलि चढ़ा दी ?

यह चीन से कांग्रेस पार्टी को मिले चंदे की करामात है कि यूपीए सरकार ने चीन से आयातित वस्‍तुओं पर आयात शुल्‍क में लगातार कमी की।

केजरीवाल की राजनीति को अपना रोल मॉडल मानने की गलती न करें कांग्रेस शासित बड़े राज्य

दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली जीत के बाद अब कोई शक नहीं हैं कि जनता ने अरविन्द केजरीवाल पर दोबारा विश्वास जताया है। विचित्र यह रहा कि अरविन्द केजरीवाल जो लगातार पिछले चार साल तक यह आरोप लगते रहे कि मोदी सरकार ने उन्हें काम नहीं करने दिया, चुनाव के समय अचानक यह कहने लगे कि उन्होंने जनता से किये गए सारे वादे पूरे कर

औद्योगिक विकास के इस दौर में निजी क्षेत्र में आरक्षण का सवाल

पिछले दिनों दो बड़ी खबरें अख़बारों के मुख्य पृष्ठ की सुर्खियाँ नहीं बन पाईं। दक्षिण भारत के एक बड़े राज्य आंध्र प्रदेश में यहाँ के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने प्राइवेट सेक्टर के लिए 75 फीसद आरक्षण की घोषणा कर दी। यह एक ऐसा फैसला था, जिसके ऊपर अब तक बहस भी नहीं हुई थी और एक आम राय नहीं बन सकी है।

मध्य प्रदेश: अबतक के कार्यकाल में हर मोर्चे पर नाकाम दिख रही कमलनाथ सरकार

मध्‍यप्रदेश में सत्‍ता परिवर्तन हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है। तीन बार सत्‍ता में रही भाजपा को बेदखल करके जब कांग्रेस सत्‍ता पर काबिज हुई तो इसका अर्थ यह निकाला गया था कि जरूर मतदाताओं ने बहुत उम्‍मीदों के साथ कांग्रेस को चुना है और भाजपा द्वारा बहुत सारे काम किए जाने के बावजूद ऐसे कौन से अधूरे काम रह गए थे जिसके लिए जनता ने कांग्रेस का चयन किया।

मध्य प्रदेश : किसानों के साथ छलावा साबित हो रही कांग्रेस की कर्जमाफी

मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की नवगठित सरकार अपने गठन के बाद से एक के बाद एक नकारात्मक कारणों से चर्चा में है। अब कर्जमाफी को ही लीजिये। मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों को लुभाने के लिए कर्जमाफी का लुभावना वादा किया था। जब कांग्रेस जीतकर सत्‍ता में आ गई तो वादे पूरे करने की सूची में कर्जमाफी सबसे शीर्ष क्रम पर थी।

बड़ी लकीर खींचने की बजाय शिवराज सरकार की लकीर मिटाने में क्यों लगे हैं कमलनाथ!

मध्‍यप्रदेश में इन दिनों कांग्रेस की नई सरकार काबिज हो चुकी और सरकारी मशीनरी ने नए ढंग से काम करना शुरू कर दिया है। किसी भी प्रदेश में नई सरकार बनती है तो अपने तरीके से काम करती है। इसमें नई योजनाओं को शुरू करना, नई चीजें लाना आदि शामिल रहता है, लेकिन मप्र में कमलनाथ की सरकार कुछ करने की बजाय कुछ “ना” करने पर अधिक ज़ोर देती

क्यों उठ रहे हैं कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी पर सवाल?

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने पार्टी के बड़े चुनावी वादे किसान कर्जमाफ़ी का ऐलान भी कर दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस द्वारा जारी वचन-पत्र से लेकर राहुल गांधी के भाषणों तक में कर्जमाफी का वादा प्रमुखता से दिखाई दिया था। जाहिर है, कांग्रेस पर इस वादे को पूरा करने को लेकर

‘कमलनाथ के बयान पर हैरानी नहीं होती, क्योंकि कांग्रेस की राजनीति का मूल चरित्र यही है’

मध्‍य प्रदेश में इस सप्‍ताह नई सरकार की आधिकारिक शुरुआत हो गई। सप्‍ताह की शुरुआत में ही कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और नव-निर्वाचित मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ग्रहण की और पदभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालते ही जिस तरह से उन्‍होंने जहां महज सुर्खियां बटोरने के लिए बिना किसी योजना-मंत्रणा के किसानों की कर्ज माफी का ऐलान कर दिया, वहीं दूसरी तरफ देश