डॉ नीलम महेंद्र

राजा महेंद्र प्रताप सिंह : इतिहास के एक गुमनाम नायक जिन्हें मोदी सरकार ने उचित सम्मान दिया है

राजा महेंद्र प्रताप सिंह के व्यक्तित्व के कई आयाम थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद, क्रांतिकारी, समाजसुधारक और दानवीर भी थे।

रामप्पा मंदिर : जिसे मार्को पोलो ने ‘मंदिरों की आकाशगंगा का सबसे चमकीला सितारा’ कहा था

मंदिर की छत पर शिवजी की कहानियां उकेरी गई हैं तो दीवारों पर रामायण और महाभारत की। मंदिर में मौजूद शिवलिंग के तो कहने ही क्या! वो अंधेरे में भी चमकता है।

आयुर्वेद और एलोपैथ मिलकर चलें तो भारतीय चिकित्सा विश्व के लिए पथप्रदर्शक सिद्ध हो सकती है

देखा जाए तो दोनों ही चिकित्सा पद्धतियाँ मानव जीवन के कल्याण के लिए आस्तित्व में आईं हैं। एक कल का विज्ञान है तो एक आज का। लेकिन इसके साथ साथ दोनों की ही अपनी सीमाएं भी हैं।

देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे पांच राज्यों के चुनाव

वर्तमान परिस्थितियों में इन राज्यों के चुनाव परिणाम ना सिर्फ इन राजनैतिक दलों का भविष्य तय करेंगे बल्कि काफी हद तक देश की राजनीति का भी भविष्य तय करेंगे।

क्या अपनी प्रासंगिकता खो रहा है किसान आंदोलन ?

देश इस बात को बहुत अच्छे से समझता है कि देश का किसान जो इस देश की मिट्टी को अपने पसीने से सींचता है वो देश के उस जवान पर कभी प्रहार नहीं कर सकता जो इस देश की आन को अपने खून से सींचता है।

‘जो भारत कल तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक था, अब वो हथियार निर्यात कर रहा है’

आज हमारे देश की अनेक सरकारी कंपनियां विश्व स्तर के हथियार बना रही हैं और भारत विश्व के 42 देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है।

बंगाल में बह रही बड़े राजनीतिक बदलाव की बयार

बंगाल के चुनावों की तैयारी करने से पहले ममता बनर्जी को देश में हुए ताज़ा चुनाव परिणामों पर नज़र डालनी चाहिए ताकि उन्हें वोटर का मनोविज्ञान समझने में आसानी हो।

गुरुनानक देव : जिन्होंने मानव को सांसारिक जीवन में रहते हुए ईश्वर को पाने का मार्ग दिखाया

जब गुरुनानक देव जी कहते हैं कि “एक ओंकार, सतनाम”, तो उनके आध्यात्म की इस परिभाषा को केवल उनके अनुयायी ही नहीं बल्कि प्राचीन वेद विज्ञान से लेकर आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करने पर विवश हो जाता है।

‘भारतीय कम्युनिस्टों का चरित्र ऐसा है कि वे किसी के सगे नहीं हो सकते सिवाय अपने स्वार्थों के’

वो वामपंथी उदारवादी जो असहमत होने के अधिकार को संविधान द्वारा दिया गया सबसे बड़ा अधिकार मानते हैं, वही दूसरों की असहमति को स्वीकार नहीं कर पाते।

रानी लक्ष्मीबाई : किरदार ऐसा कि दुश्मन भी तारीफ करने को मजबूर हो गए

रानी लक्ष्मीबाई के साहस और पराक्रम का अंदाजा जनरल ह्यूरोज के इस कथन से लगाया जा सकता है कि अगर भारत की एक फीसदी महिलाएं इस लड़की की तरह आज़ादी की दीवानी हो गईं तो हमें यह देश छोड़कर भागना पड़ेगा।