अर्थव्यवस्था में भी दिखेगी दिवाली की चमक

आर्थिक सुस्ती के हो-हल्ले के बावजूद इस साल की दिवाली में भी पूर्व की दिवालियों की तरह आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी। सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करेंगे। इसलिये, इस साल की दिवाली में सभी के घर दीये की रोशनी से रोशन होंगे तथा उसकी चमक अर्थव्यवस्था में भी दिखाई देगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

दिवाली में लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह पूजा तभी सार्थक मानी जाती है, जब आपके पास लक्ष्मी हो, क्योंकि बिना पैसे के यह त्योहार मन को नहीं भाता है। हालाँकि, जिनके पास पैसे नहीं होते हैं वे भी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करके सुख और समृद्धि की कामना करते हैं। 

अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयास शिद्दत से किये जा रहे हैं जिसके सकारात्मक परिणाम दिखने भी लगे हैं। इसलिये कारोबारी उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल की दिवाली में ग्राहकों की खरीददारी  चरम पर होगी। ज्वैलरी, कपड़े, लाइटिंग, मिठाई, पटाखा, रियल एस्टेट, बर्तन, ऑटो आदि क्षेत्रों में बिक्री बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। इसके तहत नये सिरे से ई-वाहन नीति को अमलीजामा पहनाया गया है, नीतिगत दर में कटौती की गई है, उधारी दर को रेपो दर से जोड़ा गया है, एनबीएफसी को राहत दी गई है, कंपनियों को सीएसआर और कॉर्पोरेट कर में राहत दी गई है, एंजेल टैक्स को वापिस लिया गया है, बुनियादी क्षेत्रों को राहत देने की पहल की गई है आदि। 

अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने के लिये बैंकिंग प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है, पूँजी की कमी को दूर करने के लिये सरकारी बैंकों का विलय कर बड़े बैंक बनाये जा रहे हैं। बैंकों को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने के लिये समीचीन बदलाव किये जा रहे हैं। क्रेडिट वृद्धि दर में तेजी लाने के लिये त्योहारी मौसम में लोन मेला और आकर्षक ब्याज दर पर कर्ज देने एवं विविध रियायतों की पेशकश की जा रही है।  

कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, इस साल की दिवाली में 5 से 6 लाख करोड़ रुपये कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। देश के सोने के कारोबारी दिवाली में 37 टन सोने के सिक्के और जेवर बिकने का अनुमान लगा रहे हैं यानी करीब 14 से 15 हजार करोड़ रूपये का कारोबार होने का अनुमान है। 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के प्रबंध निदेशक सोम सुंदरम के अनुसार इस साल की दिवाली में ज्वैलरी के मुकाबले लोग सोने के सिक्के खरीदने को प्राथमिकता देंगे, क्योंकि इसमें कन्वर्जन शुल्क कम है। सोने के सिक्कों की सर्वाधिक बिक्री धनतेरस में होती है। 

कम वजन की ज्वैलरी जैसे, अंगूठी, कान की बाली, मंगलसूत्र आदि की मांग भी धनतेरस में अधिक होती है। बड़े शहरों में 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक और छोटे शहरों में 30 से 60 लाख रुपये के फ्लैटों की मांग है। चूँकि, धनतेरस में घर खरीदना शुभ माना जाता है। इसलिये, दिवाली में अनेक तरह की रियायत मिलने पर धनतेरस में लोग फ्लैट खरीद सकते हैं। 

दिवाली में नये कपड़े पहने जाते हैं। लोग पारंपरिक परिधान ज्यादा पहनना पसंद करते हैं। अस्तु, दिवाली में आधुनिक और पारंपरिक परिधानों की खरीददारी में इजाफा हो सकता है। एक अनुमान के मुताबिक कुल कपड़ों की बिक्री में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रेडीमेड कपड़ों की होती है, जिनमें 30-40 प्रतिशत बिक्री ब्रांडेड कपड़ों की रहती है। देश में करीब 6 से 6.5 लाख करोड़ रूपये का कपड़ा बाजार है। एक अनुमान के मुताबिक दिवाली में 70 हजार करोड़ रूपये से अधिक कपड़ों की बिक्री हो सकती है। 

दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत अहूजा के अनुसार दिवाली पर लाइटिंग से जुड़े सामान जैसे लड़ी-झालर, दीये, बल्ब, एलईडी और भगवान की रोशनी वाली मूर्तियों की जबर्दस्त मांग है। लाइटिंग के बाजार पर भारत की हिस्सेदारी 10 से 15 प्रतिशत बढ़ने के आसार हैं। दिल्ली के  थोक बाजार में 35 मीटर की एक झालर की कीमत 200 से 250 रूपये और 25 मीटर वाली एलईडी झालर की कीमत 600 से 900 रूपये है। लाइटिंग वाली मूर्तियां 300 से 600 रूपये में बिक रही हैं। इस साल के दिवाली में रोशनी के बाजार में 4 से 5 हजार करोड़ रूपये का कारोबार होने का अनुमान है।

दिवाली में काजू बर्फी, बेसन बर्फी, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, लड्‌डू आदि की माँग बहुत ही ज्यादा होती है। मिठाईयों के कारोबार में 75 से 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी असंगठित क्षेत्र की है। इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम के अनुसार वर्ष 2017 तक देश में मिठाई का बाजार 65 हजार करोड़ रूपये से अधिक का था। 

मिठाई के बाजार में हर साल 10 से 12 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। इस आधार पर माना जा सकता है कि इस साल की दिवाली में मिठाइयों का कारोबार बढ़कर 75 से 80 हजार करोड़ रूपये का हो सकता है। एक अनुमान के मुताबिक देश में 13 हजार करोड़ रूपये का चॉकलेट का कारोबार है, जो बढ़कर इस साल की दिवाली में 15 से 16 हजार करोड़ रूपये का हो सकता है।  

ऑल इंडिया फायरवर्क्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सेलवन के अनुसार सरकार और अदालत की सख्ती के कारण कम आवाज वाले और ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ी है, लेकिन मांग के अनुपात में इनका निर्माण नहीं हो पा रहा हैदिवाली के लिये पटाखे जनवरी से ही बनने शुरू हो जाते हैं। पटाखों की 70 बिक्री दशहरा-दिवाली में हो जाती है। शिवाकाशी में लगभग 1070 पंजीकृत पटाखा कंपनियाँ हैं, जहां इस साल की दिवाली में लगभग 6 हजार करोड़ रूपये के कारोबार होने का अनुमान है। 

कहा जा सकता है कि आर्थिक सुस्ती के हो-हल्ले के बावजूद इस साल की दिवाली में भी पूर्व की दिवालियों की तरह आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी। सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करेंगे। इसलिये, इस साल की दिवाली में सभी के घर दीये की रोशनी से रोशन होंगे तथा उसकी चमक अर्थव्यवस्था में भी दिखाई देगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।