विकास के लिए ‘स्पीड बूस्टर’ साबित होगा ये मंत्रिमंडल विस्तार

मंत्रिमंडल में फेरबदल की मदद से प्रधानमंत्री विकास की गति को तेज करना चाहते हैं। हर क्षेत्र में विकास होने पर ही वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा आम जनता के सामने प्रभावशाली रिपोर्ट कार्ड पेश कर सकती है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि उत्तम प्रदर्शन ही उनकी कसौटी है। उत्तम प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को पुरस्कृत करके उन्होंने उनको प्रोत्साहित भी किया है। उम्मीद की जा सकती है कि ये मंत्रिमंडल विस्तार विकास के लिए ‘स्पीड बूस्टर’ का काम करेगा।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 2 साल से भी कम समय बच गये हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चुनाव में जीत को सुनिश्चित करना चाहते हैं और यह जीत वे तभी हासिल कर सकते हैं जब सभी क्षेत्रों में बेहतर कार्य किये जायें। इसलिये ताजे फेरबदल में कुछ नए एवं ऊर्जावान सिपहसालारों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है, क्योंकि सकारात्मक दृष्टि  के साथ 24 घंटे एवं 365 दिन लक्ष्य को हासिल करने के लिये गतिशील रहने वाले मंत्री ही लक्षित उद्देश्य को हासिल कर सकते हैं।

निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्रालय देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी संजीदगी दिखाई है। सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री होंगी। अब वे सुषमा स्वराज के साथ कैबिनेट की सुरक्षा समिति में भी शामिल हो गई हैं। प्रधानमंत्री के इस कदम से दक्षिण भारत में भाजपा की पैठ बढ़ने की संभावना है। दक्षिण भारत में भाजपा की स्थिति अभी भी कमजोर है।

पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, मुख़्तार अब्बास नक़वी, निर्मला सीतारमण

माना जा रहा है कि निर्मला सीतारमण के रक्षा मंत्री बनने से दक्षिण भारत में भाजपा की साख बढ़ेगी। सीतारमण अनुभवी एवं प्रतिभाशाली हैं। पिछली जिम्मेदारियों का निर्वहन  उन्होंने सफलतापूर्वक किया है। इसलिए माना जा रहा है कि रक्षामंत्री के रूप में भी उनका प्रदर्शन लाजबाव रहेगा। अच्छे प्रदर्शन के कारण धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल और मुख्तार अब्बास नकवी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

मौजूदा समय में बहुत सी महत्वपूर्ण परियोजनायें लंबित हैं, जिसके कारण विकास कार्यों में कुछ अवरोध आ रहा था। रुकी हुई परियोजनाओं को समय-सीमा के अंदर अमलीजामा पहनाने के लिये प्रशासनिक अनुभव की जरूरत थी। लिहाजा, मंत्रिमंडल में नौकरशाहों को भी शामिल किया गया है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राज कुमार सिंह, पूर्व राजनयिक हरदीप सिंह पुरी एवं पूर्व आईएएस अधिकारी अल्फांस कन्ननतनम को महत्वपूर्ण मंत्रालयों का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है।

पुरी को शहरी विकास और आवास का महकमा स्वतंत्र रूप से सौंपा गया है, जबकि राज कुमार सिंह ऊर्जा एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार सभालेंगे। आज रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर प्रभावी तरीके से कार्य करने की जरूरत है। कौशल विकास, आवास और शहरी मामले, बिजली, रेलवे आदि से जुड़ी परियोजनाओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।  

सुरेश प्रभु से रेल मंत्रालय लिए जाने की अटकलें थीं। प्रधानमंत्री पीयूष गोयल की क्षमता और प्रतिभा को अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिये इस मंत्रालय को पीयूष गोयल के हवाले किया गया है साथ ही साथ उन्हें कोयला मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई है। देखा जाये तो रेल मंत्रालय में कार्य करना गोयल के लिए चुनौती भरा होगा, लेकिन इसे सकारात्मक नजरिये से देखा जाना चाहिये। तत्काल में रेलवे के बुनियादी ढांचे में सुधार करने की जरूरत है। इस क्रम में यात्रियों की सुरक्षा, खान-पान की गुणवत्ता में सुधार, साफ-सफाई को सुनिश्चित करना, रेल दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना आदि कार्यों को गंभीरता पूर्वक करने की जरूरत  है।

गोयल ऋण पुनर्गठन, ऊर्जा कुशलता एवं स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों में बेहतर कार्य कर चुके हैं। रेलवे को चुस्त-दुरुस्त करने में उनका सहयोग रेलवे बोर्ड के नये चेयरमैन अश्विनी लोहानी करेंगे, जिनकी छवि काम करने एवं परिणाम देने वाले की रही है। वे सुधारात्मक कार्यों को समय-सीमा के अंदर अमलीजामा पहनाने में माहिर माने जाते हैं।   

आज की तारीख में गंगा पुनरुद्घार योजना को समय-सीमा के अंदर लागू कराना सरकार के लिये एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि गंगा को पुनर्जीवित करने की दिशा में अभी काफी काम किया जाना शेष है। नितिन गडकरी को उमा भारती के पास रहे इस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई है। गंगा को स्वच्छ बनाने में गडकरी की मदद अर्जुन राम मेघवाल एवं मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह मदद करेंगे। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की कमान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दी गई है। पहले इस मंत्रालय का कामकाज राजीव प्रताप रूडी देख रहे थे। प्रधान की सहायता कर्नाटक के अनंत कुमार हेगड़े करेंगे।

नरेंद्र तोमर को खनन मंत्रालय दिया गया है, जबकि हरिभाई पार्थिभाई चौधरी खनन एवं कोयला दोनों मंत्रालयों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य करेंगे। गिरिराज सिंह राज्य मंत्री के रूप में लघु एवं मझौले उद्यम मंत्रालय का कार्यभार सभालेंगे, वहीं संतोष गंगवार को श्रम मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। 

कहा जा सकता है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल की मदद से प्रधानमंत्री विकास की गति को तेज करना चाहते हैं। हर क्षेत्र में विकास होने पर ही वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा आम जनता के सामने प्रभावशाली रिपोर्ट कार्ड पेश कर सकती है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि उत्तम प्रदर्शन ही उनकी कसौटी है। उत्तम प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को पुरस्कृत करके उन्होंने उनको प्रोत्साहित भी किया है।

नये मंत्रियों के रूप में ऐसे लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जो परियोजनाओं को उसके अंजाम तक पहुंचाने का माद्दा रखते हैं। साथ ही, ज्यादा क्षमतावान मंत्रियों के कार्यभार में इजाफा करके प्रधानमंत्री ने उनपर अपना भरोसा जताया है, जिससे वे उत्साहित होकर अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर तरीके से निर्वहन करेंगे, जिससे अपेक्षित परिणाम मिलने में मदद मिलेगी। इस तरह मंत्रिमंडल में ताजा फेरबदल को वर्ष 2019 के लोकसभा के चुनाव की तैयारी एवं विकास की रफ्तार को बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र, मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में मुख्य प्रबंधक हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)