कामकाज

गरीबी की जड़ पर चोट करने में कामयाब रही मोदी सरकार

2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी गरीबी निवारण योजनाओं के साथ-साथ गरीबी पैदा करने वाले कारणों को दूर करने में जी जान से जुट गए। प्रधानमंत्री ने उन व्‍यवस्‍थागत खामियों का दूर किया जिनके चलते योजनाएं अपने लक्ष्‍य को हासिल नहीं कर पाती थीं।

‘कोरोना से लड़ाई में योगी सरकार की कार्यकुशलता एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर रही है’

योगी आदित्यनाथ इन श्रमिकों के वर्तमान पर ही ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि उनके लिए भविष्य की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। क्वारंटीन सेन्टर में प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग की जा रही है जिससे होम क्वारंटीन पूरा करने के पश्चात उनके रोजगार की व्यवस्था की जा सके

रिज़र्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती से आमजन को मिलेगी राहत

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 22 मई को रेपो दर में 40 बीपीएस की कटौती करने से बैंक से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को राहत मिलने का अनुमान है।

नए क्रांतिकारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम से कृषि क्षेत्र को लगेंगे पंख

अभी हाल ही में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास हेतु जिस 11 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई है वह कृषि क्षेत्र के लिए एक विशाल परिवर्तक के तौर पर सिद्ध होने जा रहा है एवं इसके कारण कृषि क्षेत्र में निजी निवेशक अपने निवेश को बहुत भारी मात्रा में बढ़ा सकेंगे

कोरोना आपदा के समय में भी घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने में कामयाब रही मोदी सरकार

जिस देश में सूखा, बाढ़, भूकंप जैसी कुदरती आपदाओं के समय में राहत सामग्री के नाम पर घोटालों का रिकॉर्ड रहा हो उस देश में कोरोना जैसी वैश्‍विक महामारी से देशवासियों को बचाने साथ-साथ घरेलू उत्‍पादन को बढ़ावा देना एक बड़ी उपलब्‍धि है।

अभिनव आर्थिक उपायों से देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में जुटी सरकार

तरलता की समस्या सबसे पहले हल किए जाने का प्रयास हो रहा है ताकि देश की अर्थव्यवस्था, जो देश के नागरिकों को कोरोना महामारी से बचाने के उद्देश्य से किए गए  लॉक डाउन के चलते, जाम हो गई है उसे तरलता की चिकनाई प्रदान कर अब पुनः चालू किया जा सके।

आर्थिक पैकेज : आम आदमी और अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से निपटने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा 12 मई को की जिसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार दो दिन से इस पैकेज के प्रावधानों और आवंटनों की जानकारी दे रही है।

एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती से निकलेगा आत्मनिर्भर भारत का रास्ता

कृषि क्षेत्र के बाद, एमएसएमई क्षेत्र में रोज़गार के सबसे अधिक अवसर निर्मित होते हैं। 73वें राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण के अनुसार, देश में  एमएसएमई क्षेत्र में 6.34 करोड़ इकाईयाँ कार्यरत थीं, ज़िनके माध्यम से 11.1 करोड़ व्यक्तियों (4.98 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में एवं 6.12 करोड़ शहरी क्षेत्रों में) को रोज़गार उपलब्ध कराया जा रहा था।

श्रमिकों के हित में है श्रम कानूनों में बदलाव, आर्थिक गतिविधियों में भी आएगी तेजी

प्रधानमंत्री की सलाह को मूर्त रूप देने के लिये उत्तर प्रदेश समेत 7 राज्यों ने उद्योगों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए श्रम कानूनों में अनेक महत्वपूर्ण बदलाव किये हैं। कहा जा रहा है कि जल्द ही बिहार समेत कुछ और राज्य श्रम कानूनों में बदलाव कर सकते हैं। गौरतलब है कि श्रम कानूनों में बदलाव करने की शुरुआत 5 मई को मध्य प्रदेश ने सबसे पहले की थी।

आधुनिक कृषि बाजार के विकास की दिशा में प्रयासरत है मोदी सरकार

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने एक बार कहा था कि “सब कुछ इंतजार कर सकता है, लेकिन खेती नहीं”। दुर्भाग्‍यवश खेती की दुर्दशा उन्‍हीं के कार्यकाल में शुरू हो गई लेकिन उसकी मूल वजहों की ओर ध्‍यान नहीं दिया गया। इसके बाद हरित क्रांति, श्‍वेत क्रांति, पीली क्रांति जैसे फुटकल उपाय किए गए।