जीएसटी

कोरोना संकट से उबरकर तेजी से पटरी पर लौटती भारतीय अर्थव्यवस्था

कई अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थान भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वर्ष 2021-22 में 9 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि की सम्भावनाएँ व्यक्त कर रहे हैं।

भारत में तेजी से बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार के क्या हैं कारण ?

ये निवेश तब हुआ है जब पूरी दुनिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का स्तर लगातार कम हो रहा है। आज विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा है।

छूट की पेशकश से मांग बढ़ाने की कवायद में जुटी वाहन कम्पनियाँ

छोटे एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) ने भी अनेक राज्यों में काम करना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश में अब तक 23 लाख छोटे एवं मझोले उद्योगों ने फिर से उत्पादन करना शुरू कर दिया है।

ये तथ्य संकेत देते हैं कि नए साल में मजबूत रहेगी अर्थव्यवस्था

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान नई परियोजनाओं में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। पिछले साल की तीसरी तिमाही के मुकाबले यह रकम ज्यादा है। पिछले साल इस दौरान परियोजनाओं में 3.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया था। परियोजनाओं की गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी

फिर एकबार कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भारत की ऊंची छलांग!

विश्व बैंक हर साल “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” या कारोबारी सुगमता के संबंध में वैश्विक रैकिंग जारी करता है। “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस 2020”की रैकिंग में भारत 190 देशों की सूची में 14 स्थानों की छलांग लगाते हुए 77वें स्थान से 63वें स्थान पर पहुँच गया है। इतना ही नहीं भारत को देश में कारोबार का माहौल बेहतर करने के लिये सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में चुना गया है।

अरुण जेटली : भारतीय राजनीति के एक दूरदर्शी, सुधारवादी और सौम्य नेता का जाना

अब तक के अपने राजनीतिक जीवन में मुझे अनेक वरिष्ठ राजनेताओं से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ है। मगर मुझे सर्वाधिक प्रभावित किसी ने किया है, तो वह अरुण जेटली जी थे। वर्ष 2003-04 के आसपास मुझे उत्तराखंड भाजपा में प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली थी।

जीएसटी के कारण कर संग्रह में हो रही वृद्धि

वित्त वर्ष 2018-19 में मासिक जीएसटी राजस्व 981 अरब रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में 9.2 प्रतिशत अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि हाल के महीनों में राजस्व वृद्धि ने जोर पकड़ा है। मार्च में कुल जीएसटी संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है, जिसमें केंद्रीय जीएसटी 203 अरब रुपये, एसजीएसटी 275 अरब रुपये और आईजीएसटी 504 अरब रुपये रहा। इसके अलावा केंद्र सरकार को उपकर मद में 82 अरब रुपये

सरकार के सुधारों से जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में हो रही वृद्धि

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में किये जा रहे सुधारों के कारण जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका पता वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किये गये आंकड़ों से चलता है। आंकड़ों के अनुसार पंजीकृत कंपनियों/कारोबारियों में से 71.25 प्रतिशत ने नवंबर, 2018 में जीएसटी मासिक रिटर्न दाखिल किया था, जबकि जुलाई, 2018 में यह 80 प्रतिशत था। जनवरी, 2018 में 87.4 प्रतिशत रिटर्न दाखिल गया था, जबकि अगस्त, 2017 में यह 92.6 प्रतिशत था।  

क्या देश की छवि खराब करने दुबई गए थे राहुल गांधी?

कभी अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश रहना चाहिए। इसका निहितार्थ था कि राजनीतिक विरोध की एक सीमा होनी चाहिए। जहां राष्ट्रहित का प्रश्न हो वहां केवल आपसी सहमति का प्रदर्शन होना चाहिए।

मोदी सरकार के सुधारवादी क़दमों से अर्थव्यवस्था के मानकों में बेहतरी के संकेत

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल से दिसंबर महीने के दौरान सरकार का आयकर राजस्व 7.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13.6 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि अग्रिम कर संग्रह पिछले साल की तुलना में 14.5 प्रतिशत ज्यादा है।