आतंकवाद

‘पाकिस्तान की आधी हार हो चुकी है, अब उसपर सम्पूर्ण विजय का समय है’

यह सेना की बहुत बड़ी सफलता है कि उसने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल रशीद गाज़ी को आखिरकार मार गिराया हालांकि इस ऑपरेशन में एक मेजर समेत हमारे चार जांबांज सिपाही वीरगति को प्राप्त हुए। देश इस समय बेहद कठिन दौर से गुज़र रहा है क्योंकि हमारे सैनिकों की शहादत का सिलसिला लगातार जारी है।

राहुल गांधी बताएं कि सिद्धू के पाकिस्तान प्रेम से क्या कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व भी सहमत है?

करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत ने अपने प्रतिनिधि अधिकृत तौर पर भेजे थे। यह औपचारिक निर्णय था। लेकिन पंजाब के उपमुख्यमंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह व कई मंत्रियों ने अनुचित माना था। ऐसे में बेहतर यह था कि सिद्धू वहां न जाते। पिछली यात्रा के दौरान सिद्धू के करतारपुर

स्मार्ट फेंसिंग : भारत-पाक सरहद पर खड़ी हुई अदृश्य दीवार, घुसपैठियों की आएगी शामत

भारत का भौगोलिक संकट ही है कि वो चीन और पाकिस्तान के रूप में दो बेहद खतरनाक और संदिग्ध पड़ोसियों से घिरा हुआ है। वैसे चीन की तरफ से सैन्य गतिरोध  के कुछ मामलों के अलावा सीमा-क्षेत्र में बहुत अधिक कोई समस्या खड़ी नहीं की जाती है। लेकिन पाकिस्तान द्वारा अक्सर ही सरहद पर तैनात भारतीय जवानों पर फायरिंग की आड़ में आतंकी घुसपैठ की कोशिशें

खुद अक्सर देशविरोधी बयान देने वाले अब्दुल्ला अपने विधायक को किस मुंह से समझाएंगे !

फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के विधायक मोहम्मद अकबर लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 10 फरवरी को पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हैं। अब फारुक साहब कह रहे हैं कि “हमें ऐसे समय में नारेबाजी से बचना चाहिए जब पाकिस्तान हमारे लोगों पर निशाना साधने की कोशिश कर रहा है।” यानी अब्दुल्ला साहब के हिसाब से नारेबाजी गलत नहीं है, बस समय थोड़ा गलत है।

ट्रंप की चेतावनी को गंभीरता से ले पाकिस्तान, वर्ना भुगतना होगा भारी खामियाजा !

जब समूचा विश्व नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, उसी वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए झूठा और कपटी देश बताया तथा अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही वित्तीय सहायता के उपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े किये। अमेरिका के राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को जो मदद आतंक के खात्मे के लिए प्रदान की जा रही थी, उसे पाक आतंकियों की मदद में लगता रहा।

घाटी में सेना की मार ने आतंकियों के दांत खट्टे कर दिए हैं !

सरहद पर सेना की सफलता का दौर जारी है। सुरक्षाबलों ने बीते दिनों अपने आतंकरोधी अभियान के तहत फिर से बड़ी कामयाबी हासिल की। अलग-अलग अभियानों में क्रमवार कुख्‍यात आतंकियों को ढेर करके सुरक्षाबलों ने अपनी वीरता का लोहा फिर मनवाया है। बीते दिनों आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर के भतीजे महमूद तल्‍हा रशीद सहित कुछ और आतंकियों को सेना ने मार गिराया। यह मुठभेड़

संयुक्त राष्ट्र महासभा में सशक्त भारत का संबोधन !

संयुक्त राष्ट्र महासभा के ७२वें सत्र में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का संबोधन कई मायनों में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रूप से उल्लेखनीय रहा। सुषमा के संबोधन से पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने अपने संबोधन में भारत पर आतंक प्रायोजित करने और कश्मीर में अत्याचार फैलाने का आरोप लगाया था। उनके भाषण का लम्बा हिस्सा भारत की बुराई करने में ही बीता था।

देश के लिए हर तरह से घातक हैं रोहिंग्या, नहीं दी जा सकती शरण !

रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने की मांग हो रही है। ये कथित मानवतावादी जान लें कि राष्ट्रीय सुरक्षा नाम की चीज भी होती है। देश पहले ही कश्मीर, नक्सली, गरीबी, बेरोजगारी आदि समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में, देश अपने सीमित संसाधनों को रोहिंग्या पर लुटाने के लिए तैयार नहीं है। खुद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जरदारी ने रोहिंग्याओ को पाकिस्तान में शरण देने का विरोध किया है। बांग्लादेश रोहिंग्याओ को

ये ब्रिक्स सम्मेलन दिखाता है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बढ़ा है भारत का दबदबा !

ब्रिक्स सम्मेलन इस बार चीन के शियामन में 3 से 5 सितम्बर तक हुआ। इस समूह के पांचो सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में भारत ने जिस तरह आतंकवाद के मुद्दे को उठाया, वो अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाते हुए पहली बार आतंकवादी संगठनो के नाम जारी किये गए। भारत ने पाक-पोषित आतंकी संगठनो के नामों पर जोर डालते हुए घोषणापत्र में कुल 18 बार आतंकवाद का ज़िक्र किया।

डोकलाम के बाद अब ब्रिक्स में भी भारत के आगे चित हुआ चीन !

ब्रिक्स सम्मेलन के साझे घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने की बात कही गई है। आतंकवाद का ज़िक्र इस घोषणापत्र में कम से कम 18 बार किया गया है। चीन ने भी जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान जैसे पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठनों के नामों को इसमें शामिल किए जाने पर ऐतराज न जताते हुए भारत के रुख का ही साथ दिया। ये आतंकी संगठन मूलतः पाकिस्तान की धरती पर मौजूद हैं और यहीं से