पाकिस्तान

मोदी सरकार में संशयमुक्त हो राष्ट्रीय हितों का प्रभावी साधन बनी भारतीय विदेश नीति

भारतीय विदेश नीति में यह पहला ऐसा दौर है जब वैश्विक संगठनों, वैश्विक मंचों और बहुराष्ट्रीय घटनाक्रमों में भारत मूकदर्शक नहीं, इनका सक्रिय भागीदार है।

‘भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना को खत्म करने के लिए प्रेरित करेगा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’

भारत का विभाजन और स्वतन्त्रता इतिहास के एक ही अध्याय में है। भीषण त्रासदी और विभाजन की काली रात के बाद स्वतन्त्रता का प्रकाश हुआ था।

अनुच्छेद-370 पर दिग्विजय सिंह का बयान कांग्रेस का वास्तविक चेहरा दिखाने वाला है

इस अनुच्‍छेद को कांग्रेस ने ही देश पर जबरिया थोपा था और जब भाजपा सरकार ने 2019 में इस वर्षों पुरानी गलती को दुरुस्‍त किया तो अब कांग्रेस तिलमिला रही है।

विद्या भारती के विद्यालयों की तुलना पाकिस्तानी मदरसों से कर राहुल गांधी ने कांग्रेस का वैचारिक स्तर ही दिखाया है

सत्ता के लिए समाज में विभाजन की ऐसी गहरी लकीर खींचना स्वस्थ एवं दूरदर्शिता पूर्ण राजनीति नहीं है। राहुल गांधी यह सब जिस भी रणनीति के अंतर्गत कर रहे हों, पर यह रणनीति देश की छवि को दाँव पर लगाने वाली है।

‘जो भारत कल तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक था, अब वो हथियार निर्यात कर रहा है’

आज हमारे देश की अनेक सरकारी कंपनियां विश्व स्तर के हथियार बना रही हैं और भारत विश्व के 42 देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है।

ये छप्पन इंच के सीने की ताकत ही है, जिससे डरकर पाकिस्तान ने अभिनंदन को रिहा किया था

दुनिया यह बात जान चुकी है कि ये छप्पन इंच के सीने की ही धमक है, जिसके कारण पाकिस्तान ने भयभीत होकर विंग कमांडर अभिनंदन को भारत को सौंपा था।

भारत-अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक बेका समझौता, चीन-पाक की बढ़ेंगी मुश्किलें

BECA समझौते का सीधा संबंध देश की सामरिक शक्ति से जुड़ा है। इस समझौते के बाद देश अमेरिका की क्रूज मिसाइलों-बैलिस्टिक मिसाइलों की तकनीक हासिल कर सकेगा।

अटल सुरंग : विश्व की इस सबसे बड़ी सुरंग का महत्व भी बहुत बड़ा है

बीते रोज दुनिया की सबसे बड़ी ‘अटल सुरंग’ को प्रधानमंत्री मोदी ने देश को समर्पित कर दिया। इसका सपना अटल जी ने देखा था, इसलिए इसको उन्हीका नाम दिया गया है।

राफेल के जरिये भारत-फ़्रांस का संयुक्त सामरिक संदेश

पिछले दिनों राफेल लड़ाकू विमान विधिवत भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए। कोई अन्य अवसर होता तो शायद इसका सन्देश इतना व्यापक नहीं होता।

ओवैसी के राम मंदिर विरोध के मूल में मुस्लिम लीग वाली मानसिकता ही कारण है

केंद्र में कांग्रेसी सरकारों का प्रायः समर्थन करने वाला ओवैसी का दल (एआईएमआईएम) भाजपा सरकार के प्रत्येक कार्य पर उंगली उठाता रहा है।