नोटबंदी

कोरोना संकट से उबरकर धीरे-धीरे गति पकड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

धीरे-धीरे लॉकडाउन को अनलॉक किया जा रहा है। आर्थिक गतिविधियों के शुरू होने से अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ संकेतक सकारात्मक परिदृश्य की ओर इशारा कर रहे हैं।

विपक्ष के नकारने से ख़त्म नहीं हो जाते नोटबंदी के फायदे!

नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर विपक्षी दलों ने फिर से इसकी सार्थकता पर सवाल उठाया। साथ ही साथ इससे हुई परेशानी का ठीकरा सरकार के माथे पर फोड़ा। यह ठीक है कि नोटबंदी के कारण आमजन को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन केवल इस वजह से नोटबंदी के फ़ायदों को सिरे से नकारा नहीं जा सकता है। यह एक साहसिक फैसला था, जिसने

विपक्षी विरोध से इतर तथ्य तो यही बताते हैं कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है!

आज से दो वर्ष पूर्व, यही 8 नवम्बर की तारीख थी, जब देश में काले धन, नकली नोट जैसी आर्थिक विसंगतियों पर चोट करने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। रात 8 बजे अचानक प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में इस निर्णय का ऐलान किया जिसके बाद सब तरफ उथल-पुथल का एक अलग ही माहौल बन गया। निस्संदेह नोट बदलने के लिए लगने वाली लम्बी कतारों

99 प्रतिशत नोटों के वापस आ जाने से नोटबंदी विफल कैसे हो गयी?

भारतीय रिजर्व बैंक ने 29 जुलाई को 1 जुलाई, 2017 से 30 जून, 2018 की अवधि की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े मूल्य वर्ग की मुद्रा, जिसमें 500 और 2000 रूपये के नोट शामिल हैं का कुल मुद्रा संरचना में 80.6% हिस्सा है। विमुद्रीकरण के पहले बड़े मूल्य वर्ग की मुद्रा, जिसमें 500 और 1000 रूपये के नोट शामिल थे का कुल मुद्रा संरचना में

जीडीपी में वृद्धि से अर्थव्यवस्था पर सवाल उठा रहे विपक्ष के आरोपों की निकली हवा !

देश अर्थव्‍यवस्‍था के नए दौर से गुज़र रहा है। ऐसा समझें कि आर्थिक सुधारों के बाद देश में नई अर्थक्रांति का सूत्रपात हुआ है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े आर्थिक सुधारों के बाद पूरे विश्‍व में भारत की साख भी बढ़ी है, रैंकिंग भी और अब वैश्विक परिदृश्‍य में भारत को एक मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दिनों मूडीज ने भारत की सॉवरेन रेटिंग भी बढ़ाई और ग्‍लोबल सॉल्‍युशन कंपनियों ने

यूपी निकाय चुनावों में जीएसटी, नोटबंदी और ईवीएम के विरोधियों को जनता ने दिखाया आईना!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मेहनत सफल हुई। भाजपा की विजय का सिलसिला यूपी के निकाय चुनावों में भी जारी रहा। निकाय चुनाव में विपक्षी पार्टियां बहुत पीछे रह गईं। ऐसा नहीं कि योगी आदित्यनाथ ने केवल कुछ दिन प्रचार किया, वह तो मुख्यमंत्री बनने के साथ ही विकास के लिए जी-जान से जुट गए थे। किसानों की कर्ज माफी से शुरुआत हुई। फिर उनकी सरकार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गेहूं-

पेमेंट कंपनी वीजा की रिपोर्ट : नोटबंदी के बाद भारतीयों में डिजिटल पेमेंट का बढ़ रहा चलन

इसमें कोई शक नहीं है कि अब भारत क्रमिक रूप से और तेजी से डिजिटल होता जा रहा है। इस डिजिटल क्रांति का सबसे प्रभावी और सकारात्‍मक असर अर्थव्‍यस्‍था पर ही पड़ा है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित की गई नोटबंदी के बाद से ही देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन का ग्राफ बढ़ गया था। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे विवशता करार दिया और कहा कि यह सरकार की विफलता है, लेकिन ग्‍लोबल

मूडीज रेटिंग : अर्थव्यवस्था के विकास पर सवाल उठा रहे विपक्ष की बंद हुई बोलती !

यह सप्‍ताहांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कई अर्थों में सकारात्‍मक और लाभदायी रहा। व्‍यक्तिगत रूप से और शासनगत रूप से दोनों मोर्चों पर वे प्रसिद्धि के नए सोपान चढ़े। अव्‍वल तो अमेरिकी सर्वेक्षण संस्‍था प्यू ने उन्‍हें लोकप्रियता के शिखर पर बताया, वहीं अंतरराष्‍ट्रीय रेटिंग संस्था मूडीज की रेटिंग ने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का समर्थन किया है।

एक साल में देश के लिए हर तरह से लाभकारी रही नोटबंदी !

आज से एक वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन व भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिये एक सार्थक पहल नोटबंदी की घोषणा करते हुए 500 व 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। नोटबंदी, देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत ही अच्छा और सराहनीय कदम था। इससे आने वाले समय में देश में सुख और समृद्धि ही आएगी। विपक्ष नोटबंदी के फैसले का भले विरोध करता रहा हो, पर शुरूआती परेशानियों के

नोटबंदी का एक साल : बढ़ा आयकर संग्रह, कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह पर देश

नोटंबदी के एक वर्ष पूर्व होने पर स्थिति यह है कि इससे डिजिटल लेनदेन में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2017-18 में डिजिटल लेनदेन में 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो रूपये में लगभग 1800 करोड़ होगी। मार्च एवं अप्रैल, 2017 में जब नोटबंदी के बाद नकदी की किल्लत लगभग दूर हो गई थी तब भी डिजिटल लेनदेन में बढ़ोतरी हो रही थी। मार्च एवं अप्रैल 2017 में लगभग 156 करोड़ रूपये