नजरिया

बाकियों ने केवल राजनीति की, बाबा साहब के विचारों पर अमल मोदी सरकार ने किया है!

बाबा साहब की प्रतिष्ठा में सर्वाधिक कार्य वर्तमान केंद्र सरकार ने किए हैं। इसमें उनके जीवन से संबंधित स्थलों का भव्य निर्माण भी शामिल है।

नवरात्र मात्र उपवास और कन्याभोज नहीं है!

यह सनातन संस्कृतिकी महानता है कि इसमें अत्यंत गहरे और गूढ़ विषयों को जिनके पीछे बहुत गहरा विज्ञान छिपा है उन्हें बेहद सरलता के साथ एक साधारण मनुष्य के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इसका सकारात्मक पक्ष तो यह है कि एक साधारण मनुष्य से लेकर एक बालक के लिए भी वो विषय ग्रहण करना

‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ को साकार करने में सफल रहे रणदीप हुड्डा

एक और अच्छी बात निर्माता–निर्देशक ने स्थापित की है कि वैचारिक या सैद्धांतिक मतभेद होने के बाद भी बड़े नेता एक–दूसरे का सम्मान करते थे। जो लोग यह स्थापित करने की कोशिश करते हैं कि वीर सावरकर महात्मा गांधी के विरोधी थे, उनको अवश्य ही यह पता होना चाहिए कि दोनों की सोच अवश्य भिन्न

जयंती विशेष : स्वदेशी के महत्व को बताता है छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन

शिवाजी महाराज ऐसे नायक हैं, जिन्होंने मुगलों और पुर्तगीज से लेकर अंग्रेजों तक, स्वराज्य के लिए युद्ध किया। भारत के बड़े भू-भाग को आक्रांताओं के चंगुल से मुक्त कराकर, वहाँ ‘स्वराज्य’ का विस्तार किया। जन-जन के मन में ‘स्वराज्य’ का भाव जगाकर शिवाजी महाराज ने समाज को आत्मदैन्य की परिस्थिति से बाहर निकाला। ‘स्वराज्य’ के

राम मंदिर से देश के समावेशी विकास को भी मिलेगा बल

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से अयोध्या और प्रदेश के विकास के साथ-साथ देश के समावेशी विकास को बल मिलना लाजिमी है। अयोध्या में आधारभूत संरचना विकसित होगी, बुनियादी सुविधाएँ जैसे, बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्तपताल का लाभ वहाँ के रहवासियों को मिलेगा, रोजगार सृजन होगा, निर्माण व विनिर्माण, पर्यटन, सेवा, होटल व रेस्तरां, परिवहन, हवाई

जयंती विशेष : साहस, स्वाभिमान एवं स्वानुशासन के जीवंत प्रतीक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस

सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिए गए नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा’, ‘दिल्ली चलो’ या ‘जय हिंद’ – प्रमाणित करते हैं कि वे युवाओं के मन और मिज़ाज की कितनी गहरी समझ रखते थे!

अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर विशेष : वैश्विक स्तर पर हिन्दी का विस्तार

भारत के इन 75 प्रतिशत हिंदी भाषियों सहित पूरी दुनिया में लगभग 80 करोड़ लोग ऐसे हैं जो इसे बोल या समझ सकते हैं। भारत के अलावा हिन्दी को नेपाल, मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, यूगांडा, दक्षिण अफ्रीका, कैरिबियन देशों, ट्रिनिदाद एवं टोबेगो और कनाडा आदि में बोलने वालों की अच्छी खासी संख्या है। इसके अलावा इंग्लैंड,

हेमू कालाणी : जिन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में मां भारती के श्रीचरणों में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था!

हेमू कालाणी ने ‘इंकलाब-जिंदाबाद’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए खुद अपने हाथों से फांसी का फंदा अपने गले में डाला, मानो फूलों की माला पहन रहे हों।

मकर संक्रांति : भारतीय संस्कृति के समरस स्वरूप का महोत्सव

मकर संक्रांति भारत में विविध रूप से मनायी जाती है। इसमें भारतीय संस्कृति की विविधता झलकती है। लेकिन भाव भूमि समान है।

दीपावली विशेष : अबकी इस प्रकार करें लक्ष्मी पूजन !

स्वतंत्रता-प्राप्ति से पूर्व हमारे देशवासियों ने भावी भारत के रूप में सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का सपना देखा था। उन्हें विश्वास था कि अंग्रेजों की दासता से मुक्ति मिलते ही हम भारतीयों का ‘स्वराज्य’ स्वावलम्वन से सशक्त और सम्पन्न बनकर ‘सुराज’ की स्वार्णिम कल्पनाएं साकार करेगा। प्रख्यात सुकवि-नाटककार जयशंकर प्रसाद कृत ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक के निम्नांकित गीत में इस जनभावना की अनुगूँज दूर तक सुनाई देती है-